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Kanpur: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भरी हुंकार, निजीकरण के खिलाफ पैदल मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

Fri, 16 Jan 2026 05:00 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 16 Jan 2026 05:00 PM IST
सार

Kanpur News: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से निजीकरण और नई श्रम संहिताओं के विरुद्ध पैदल मार्च निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। श्रमिक नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी सात सूत्रीय मांगें पूरी नहीं हुईं, तो औद्योगिक अशांति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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Kanpur Central trade unions raised their voice held a protest march against privatization
मनरेगा कानून को बहाल कराने के लिए पैदल मार्च - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के  तत्वावधान में आयोजित इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, एआईयू टीयूसी और टीयूसीसी के बैनर तले श्रमिक नेताओं ने देश व्यापी अभियान के तहत भविष्य निधि कार्यालय से अपर श्रमायुक्त कार्यालय सर्वोदय नगर तक पैदल मार्च कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर श्रमायुक्त पीके सिंह को दिया।

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केंद्रीय श्रम महासंघों के प्रतिनिधिगण और कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे श्रमिक, कर्मचारी और किसान विरोधी कानूनों के विरुद्ध  सात सूत्रीय मांग  पत्र प्रस्तुत कर कहा कि मनरेगा की जगह केंद्र सरकार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)  विधेयक, 2025 नामक एक नए कानून को रद्द कर मनरेगा अधिनियम को लागू किया जाए।

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निजीकरण वापस लेने की मांग
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 वापस लिया जाय। उपभोक्ताओं, किसानों एवं बिजली कर्मचारियों  के हित में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का निजीकरण वापस लिया जाए। आंदोलन के बाद बिजली कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस ली जाए। बिजली कर्मचारियों की पूर्ववत मिल रही सुविधाओं को छीनना बंद किया जाए।



ये लोग रहे मौजूद
बिजली के संविदा कर्मचारियों की छटनी करना बंद किया जाए। चार श्रम संहिताओं (मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता) को वापस लिया जाए। प्रदर्शनकारियों में प्रमुख रूप से असित कुमार सिंह संयोजक, पी एस बाजपेई, राम सिंह, उमेश शुक्ला, गौरव दीक्षित, राजीव खरे, सुलेखा तिवारी, धर्मदेव, राणा प्रताप सिंह, आरडी गौतम आदि शामिल रहे।

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