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Kanpur CA Seminar: अब सीधे नहीं मिलेगा री-असेसमेंट का नोटिस; करदाताओं को पहले अपनी बात रखने का मिलेगा मौका
Fri, 27 Feb 2026 05:41 PM IST
Himanshu Awasthi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Himanshu Awasthi
Updated Fri, 27 Feb 2026 05:41 PM IST
सार
Kanpur News: कानपुर में आयोजित सीए गोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि आयकर अधिनियम 2025 के तहत अब री-असेसमेंट की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह हो गई है। विभाग को नोटिस से पहले करदाता को जवाब का मौका देना होगा और समयसीमा का सख्ती से पालन करना होगा।
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सेमिनार में जानकारी देते विशेषज्ञ
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कानपुर में केसीएएस सीपीई स्टडी सर्किल कानपुर की ओर से शुक्रवार को सिविल लाइंस स्थित रेस्टोरेंट में आयकर अधिनियम 2025 के तहत व्यवसाय एवं पेशे से होने वाले लाभ-हानि में हुए बदलाव और असेसमेंट प्रक्रिया पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि री-असेसमेंट प्रक्रिया में अब विभाग सीधा नोटिस जारी नहीं कर सकता। पहले सूचना देनी होगी और करदाता को जवाब का अवसर मिलेगा। समयसीमा, अनुमोदन और प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
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सीए गोविंद कृष्णा ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट 2025 का सबसे बड़ा योगदान व्यवसाय, पेशे और आकलन प्रक्रिया दोनों क्षेत्रों में स्पष्टता और सरलता लाना है। उन्होंने बताया कि व्यवसाय एवं पेशे से आय से जुड़े पुराने बिखरे हुए प्रावधानों को अब एक क्रमबद्ध ढांचे में रखा गया है। जिससे समझना और अनुपालन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज हो गया है। उन्होंने कहा कि डीम्ड प्रॉफिट, रिकवरी, राइट डाउन वैल्यू अंतर और विशेष परिस्थितियों में माने जाने वाले लाभ को एकीकृत कर दिया गया है, जिससे भ्रम समाप्त हुआ है। सीए विवेक खन्ना ने बताया कि री-असेसमेंट आयकर विभाग की वह प्रक्रिया है।
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पारदर्शिता को दिया जा रहा है बढ़ावा
इसमें पहले से पूरा हो चुके मूल्यांकन को तब दोबारा खोला जाता है। जब विभाग को यह विश्वास हो कि कर योग्य आय का कोई हिस्सा छूट गया है या छिपाया गया है। सामान्य मामलों में अधिकारी तीन वर्ष के भीतर पुराना मामला खोल सकता है। जबकि बड़े मामलों में यह सीमा पांच वर्ष तक बढ़ सकती है। बशर्ते कि बची हुई आय किसी संपत्ति, निवेश या विशिष्ट वित्तीय लेनदेन से संबंधित हो। इसके अलावा पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों को केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही खोला जा सकता है। संयोजक सीए प्रशांत रस्तोगी और उप संयोजक सीए नितिन सिंह ने कहा कि नए आयकर कानून में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।