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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur-Bundelkhand region... three faces make it to the Rajya Sabha; all eyes now on the Union Cabinet.

Kanpur News: कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र...राज्यसभा को मिले तीन चेहरे, अब निगाहें केंद्रीय मंत्रिमंडल पर

Wed, 07 Oct 2026 02:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:15 AM IST
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Kanpur-Bundelkhand region... three faces make it to the Rajya Sabha; all eyes now on the Union Cabinet.
कानपुर। राज्यसभा चुनाव में भाजपा की ओर से कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से प्रकाश पाल, गोपी कृष्ण पांडेय और श्रुति गंगवार के रूप में तीन नए चेहरे उतारे जाने के बाद अब इस क्षेत्र की राजनीतिक निगाहें केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर टिक गई हैं।
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क्षेत्र की लोकसभा राजनीति में भाजपा की मजबूत मौजूदगी के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व का सवाल समय-समय पर उठता रहा है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के बाद होने जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हुई हैं।
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राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए गए प्रकाश पाल और गोपी कृष्ण पांडेय का सीधा संगठनात्मक जुड़ाव कानपुर से है, जबकि श्रुति गंगवार की ससुराल कानपुर के बर्रा दो में है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार कब होगा और क्षेत्र से किसे अवसर मिलेगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन कयासों का दौर चल पड़ा है।
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अब तक कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र से मोदी मंत्रिमंडल में फतेहपुर की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति दो बार मंत्री बनी हैं। नवंबर 2014 में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और 2019 में ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया था। जालौन-गरौठा के सांसद भानु प्रताप वर्मा को वर्ष 2021 में केंद्रीय मंत्री (राज्य मंत्री, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय) बनाया गया था। अब इनमें से कोई भी मंत्री नहीं है।
दूसरी ओर जानकारों का यह भी कहना है कि विधानसभा चुनाव में कानपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों को अपने गढ़ के रूप में मजबूत करने के लिए भाजपा इनमें से किसी पर दांव लगा दे तो कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी।


इंसेट--
अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व घटा

जिन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें एक अल्पसंख्यक, चार सवर्ण, तीन ओबीसी और दो अनुसूचित जाति के हैं। इनकी जगह जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है उनमें सवर्ण-ओबीसी वर्ग से तीन-तीन,सामान्य वर्ग से एक, अनूसूचित जाति से दो लोग हैं। अल्पसंख्यक को किसी भी दल ने मौका नहीं दिया है। ऐसे में इस चुनाव में ठाकुरों का प्रतिनिधित्व कम और अल्पसंख्यक वर्ग का खत्म हो रहा है।

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