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कानपुर: ब्रह्म खूंटी नौ सप्ताह में दोबारा डूबी, नून नदी भी उफनाई, किनारे के गांवों में बाढ़ का खतरा
Mon, 25 Oct 2021 10:49 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 25 Oct 2021 10:49 PM IST
सार
किसानों का कहना है कि इस बार बारिश के मौसम में भी नून और गंगा का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था। दोनों नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो कटरी के खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो जाएंगी।
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बिठूर में ब्रह्म खूंटी डूबी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के बाद नरौरा बांध से छोड़े गए पानी से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इससे बिठूर के ऐतिहासिक ब्रह्मावर्त घाट की ब्रह्म खूंटी रविवार देर रात फिर डूब गई। इससे पहले यह 19 अगस्त को गंगा का जलस्तर बढ़ने से डूबी थी।
मानसून के दौरान ब्रह्म खूंटी डूबने पर यह माना जाता है कि कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हो गई। ब्रह्म खूंटी मंदिर के अंदर पानी भरने के साथ ही गंगा की सहायक नदी नून भी उफान पर आ गई है। वजह यह कि जलस्तर बढ़ने से नून का पानी गंगा में नहीं जा पा रहा है।
इससे किनारे स्थित बाकरगंज, रमेलनगर, हिंगूपुर समेत ख्योरा कटरी, बनियापुरवा, दुर्गापुरवा, मक्कापुरवा, भगवानदीन का पुरवा आदि गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि इस बार बारिश के मौसम में भी नून और गंगा का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था। दोनों नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो कटरी के खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो जाएंगी।
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मानसून के दौरान ब्रह्म खूंटी डूबने पर यह माना जाता है कि कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हो गई। ब्रह्म खूंटी मंदिर के अंदर पानी भरने के साथ ही गंगा की सहायक नदी नून भी उफान पर आ गई है। वजह यह कि जलस्तर बढ़ने से नून का पानी गंगा में नहीं जा पा रहा है।
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इससे किनारे स्थित बाकरगंज, रमेलनगर, हिंगूपुर समेत ख्योरा कटरी, बनियापुरवा, दुर्गापुरवा, मक्कापुरवा, भगवानदीन का पुरवा आदि गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि इस बार बारिश के मौसम में भी नून और गंगा का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था। दोनों नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो कटरी के खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो जाएंगी।
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