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Kanpur: मोबाइल पर बात करते वक्त ट्रेन की चपेट में आने से बैंक के हेड कैशियर की मौत
Sat, 05 Oct 2024 06:31 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 05 Oct 2024 06:31 PM IST
सार
Kanpur News: ट्रेन की चपेट में आने से बैंक के हेड कैशियर की मौत हो गई। हादसा कल्याणपुर थाना क्षेत्र में हुआ। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
कल्याणपुर थानाक्षेत्र में शुक्रवार देर रात मोबाइल पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक पार कर रहे बैंक के हेड कैशियर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के वक्त वह अपनी स्कूटी खड़ी कर रेलवे ट्रैक पार कर लघुशंका करने जा रहे थे। हादसे के दौरान वह ट्रेन में फंसकर करीब 500 मीटर तक घिसटते चले गए जिससे उनका शव पूरी तरह से क्षत विक्षत हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल कर परिजनों को सूचना दी।
रावतपुर के राधा विहार निवासी मुकेश कुमार कनौजिया (43) मंधना स्थित यूनियन बैंक शाखा में हेड कैशियर के पद पर कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी सौम्या के अलावा तीन वर्षीय बेटी सान्वी व मां रमा देवी हैं। भाई अमित ने बताया कि अगस्त में मुकेश की शादी के छह वर्ष पूरे हुए थे। शुक्रवार करीब पांच बजे ऑफिस से लौटने के बाद भाई मुकेश गूबा गार्डन निवासी चाचा विनोद के घर गए थे। देर रात करीब 12 बजे वह घर लौट रहे थे।
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रावतपुर के राधा विहार निवासी मुकेश कुमार कनौजिया (43) मंधना स्थित यूनियन बैंक शाखा में हेड कैशियर के पद पर कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी सौम्या के अलावा तीन वर्षीय बेटी सान्वी व मां रमा देवी हैं। भाई अमित ने बताया कि अगस्त में मुकेश की शादी के छह वर्ष पूरे हुए थे। शुक्रवार करीब पांच बजे ऑफिस से लौटने के बाद भाई मुकेश गूबा गार्डन निवासी चाचा विनोद के घर गए थे। देर रात करीब 12 बजे वह घर लौट रहे थे।
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दलहन क्रासिंग के पास क्रॉसिंग बंद होने के कारण वह लघुशंका करने के लिए अपनी स्कूटी खड़ी कर रेलवे ट्रैक पार करने लगे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर कॉल आ गई जिसे रिसीव करने के दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गए। केबिनमैन की सूचना पर पहुंची कल्याणपुर पुलिस ने उनके पास मिले दस्तावेजों के आधार पर परिजनों को सूचना दी। अमित ने शव की शिनाख्त की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक आश्रित कोटे में मिली थी नौकरी
भाई अमित ने बताया कि वह यूनियन बैंक के रीजनल ऑफिस में चालक के पद पर तैनात है। पिता गोविंद प्रसाद की आकस्मिक मौत के बाद भाई को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली थी।
न उठाते फोन तो बच जाती जान
अमित ने कहा कि मुकेश फोन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करते थे। अक्सर वह स्कूटी चलाते वक्त व लघुशंका जाने पर भी मोबाइल पर बात करने लगते थे। अगर कोई फोन न उठाते तो जान बच जाती।
भाई अमित ने बताया कि वह यूनियन बैंक के रीजनल ऑफिस में चालक के पद पर तैनात है। पिता गोविंद प्रसाद की आकस्मिक मौत के बाद भाई को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली थी।
न उठाते फोन तो बच जाती जान
अमित ने कहा कि मुकेश फोन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करते थे। अक्सर वह स्कूटी चलाते वक्त व लघुशंका जाने पर भी मोबाइल पर बात करने लगते थे। अगर कोई फोन न उठाते तो जान बच जाती।