फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur: Ayushman card holder kept wandering for treatment, Hailet-Ursala both hospitals did not admit, died

कानपुर: इलाज के लिए भटकता रहा आयुष्मान कार्ड धारक, हैलट-उर्सला दोनों अस्पतालों ने नहीं किया भर्ती, मिली मौत

Sat, 14 Aug 2021 11:47 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 14 Aug 2021 11:47 AM IST
सार

मृतक के पोते मोहित ने बताया कि बाबा को एक महीने से कमर दर्द की शिकायत थी, वह उठ बैठ नहीं पाते थे। इलाज के लिए एक निजी डॉक्टर को दिखाया तो उसने एक्सरे करवा कर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही।

विज्ञापन
Kanpur: Ayushman card holder kept wandering for treatment, Hailet-Ursala both hospitals did not admit, died
हैलट अस्पताल - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में गरीबों को मुफ्त और अच्छा इलाज मिले इसके लिए सरकार ने जरूरतमंदों के आयुष्मान कार्ड बनाए हैं। सरकार ने योजना तो ला दी लेकिन इसको जमीन पर साकार करने वाले जिम्मेदार शायद गंभीर नहीं हैं। गुरुवार रात से शुक्रवार तक भटके शास्त्री नगर निवासी राम विलास (65) की इलाज के अभाव में मौत हो गई। वह आयुष्मान कार्ड धारक थे।
विज्ञापन


मृतक के पोते मोहित ने बताया कि बाबा को एक महीने से कमर दर्द की शिकायत थी, वह उठ बैठ नहीं पाते थे। इलाज के लिए एक निजी डॉक्टर को दिखाया तो उसने एक्सरे करवा कर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही। गुरुवार देर रात तकलीफ बढ़ने पर बाबा को लेकर उर्सला पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने देखने के बाद कहा इनकी कमर में टीबी हो गया है इसका इलाज हैलट में हो पाएगा यहां से ले जाओ।
विज्ञापन


उर्सला से हैलट इमरजेंसी लेकर पहुंचे तो वहां कहा गया की सुबह लेकर आना अभी डॉक्टर साहब नहीं हैं।  शुक्रवार सुबह 9 बजे पर्चा बनवा कर ओपीडी में डॉक्टर आलोक वर्मा को दिखाया तो उन्होंने एमआरआई जांच कराने को कहा। मोहित के अनुसार जब बाबा को लेकर जांच कराने गए तो पता लगा 2 घंटे बाद जांच  हो पाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


जांच करवाकर लौटे तो पता लगा डॉक्टर साहब उठ गए थे। बाबा की तकलीफ को देखते हुए तत्काल इमरजेंसी ले गए। वहां पर पर्चा तो बना लेकिन आयुष्मान कार्ड दिखाने के बाद भी बाबा को भर्ती नहीं किया गया। कुछ देर बाद एक डॉक्टर ने आकर दवाइयां लिखी और कहा इसको खिलाओ। सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक भटकने के बाद हम बाबा को घर ले आए जहां उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed