Kanpur: नहीं बन सके अमृत सरोवर, नौ सचिवों का वेतन रोका, सीडीओ ने एक सचिव के निलंबन के भी दिए आदेश
कानपुर जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत 24 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं पर इन सरोवरों में पानी की जगह सिर्फ धूल उड़ रही है। निर्माण की अवधि (15 अगस्त) पूरी हो गई लेकिन इन सरोवरों को विकसित नहीं किया जा सका है।
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अमृत सरोवरों को विकसित करने का कार्य अधूरा मिलने पर भीतरगांव ब्लॉक के नौ ग्राम सचिवों का वेतन रोकने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी सुधीर कुमार ने दिए हैं। लाखनखेड़ा ग्राम पंचायत के सचिव पुष्पेंद्र सिंह को निलंबित करने का आदेश भी दिया है। कानपुर जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत 24 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं पर इन सरोवरों में पानी की जगह सिर्फ धूल उड़ रही है।
निर्माण की अवधि (15 अगस्त) पूरी हो गई लेकिन इन सरोवरों को विकसित नहीं किया जा सका है। पहले चरण में 118 अमृत सरोवरों को विकसित किया जाना था। सीडीओ के निर्देश पर कराई गई जांच में पता चला है कि अभी तक सिर्फ 20 फीसदी कार्य ही हो पाया है।
योजना के तहत एक अमृत सरोवर का पक्का निर्माण कराने में 30 से 35 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। पक्के निर्माण की बात तो दूर तालाब की खोदाई भी पूरी नहीं की जा सकी है। बता दें कि इन सरोवरों में वर्षा जल को संचयित किया जाना था। तालाब परिसर में बेंच लगवानी थी, तालाब के चारों तरफ ट्रैक, बैरिकेडिंग, पौधरोपण आदि होना था।
भीतरगांव ब्लॉक के बीडीओ चंद्रमणि ने सचिव ब्रजेश सिंह, सौरभ कुमार, अर्पित अवस्थी, अमित द्विवेदी, विमल गौतम, दीपक यादव, सिद्धांत कुमार, जगभान सिंह व हिमांशु का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया है। नवंबर बाद कार्य पूर्ण न होने पर निलंबन की संस्तुति भी की है।
योजना का उद्देश्यलापरवाही पर नौ ग्राम सचिवों का वेतन रोक दिया है, एक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। एक माह का समय दिया गया है। अगर कार्य पूरा नहीं हुआ तो बीडीओ के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। - सुधीर कुमार, सीडीओ
अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य भूगर्भ जल को समृद्घ करने के साथ ही इन क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था करना शामिल है। इसके अलावा सरोवरों के आसपास ऐसा पिकनिक स्पॉट तैयार करना जिससे लोग वहां पर आकर कुछ देर के लिए प्रकृति से जुड़ सकें।