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Kanpur: अमर उजाला शिक्षक सम्मान, आंखों में खुशी…दिल में गर्व लिए शिक्षक बोले- वर्षों की मेहनत का मिला फल

Sat, 13 Dec 2025 11:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 13 Dec 2025 11:35 AM IST
सार

Kanpur News: अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के हाथों सम्मानित शिक्षकों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने इसे बच्चों और समाज के विश्वास का सम्मान बताया और भविष्य में अधिक निष्ठा से मेहनत करने का संकल्प लिया।

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Kanpur Amar Ujala Teacher Award With joy teachers said Our years of hard work have finally paid off
अमर उजाला शिक्षक सम्मान 2025 - फोटो : amar ujala

विस्तार

अमर उजाला का शिक्षक सम्मान समारोह, छत्रपति शाहूजी महाराज विवि का रानी लक्ष्मी बाई सभागार...मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और पुरस्कार पाने के लिए बैठे 100 स्कूलों के छात्रों के प्यारे 100 शिक्षक और उनके प्रधानाचार्य। जैसे ही चयनित शिक्षक का नाम पुकारा गया उनकी आंखों में खुशी, दिल में गौरव का भाव उभर आया। मंच पर उप मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होते शिक्षकों की आंखों में वर्षों की मेहनत की चमक दिखाई दी।

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12 दिसंबर का दिन 100 स्कूलों के शिक्षकों और उनके प्रधानाचार्यों को न भूलने वाली यादें दे गया। सम्मान के लिए मंच की ओर बढ़ते हुए उनके कदमों में संतोष, मन में उमंग और दिल में गर्व की मिली जुली अनुभूति थी। मंच पर पहुंचकर जब उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें सम्मानित किया तो कई शिक्षकों की आंखें नम हो गईं। वे बोले यह सम्मान सिर्फ हमारा नहीं, हमारे बच्चों का, हमारे विद्यालय का और उस विश्वास का है जो समाज ने हम पर रखा है। उन्हें वर्षों की मेहनत का फल मिला है।

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Kanpur Amar Ujala Teacher Award With joy teachers said Our years of hard work have finally paid off
अमर उजाला शिक्षक सम्मान 2025 - फोटो : amar ujala


संपूर्ण जीवन की उपलब्धियों का उत्सव
इनमें से कई शिक्षक ऐसे रहे जिन्हें सार्वजनिक मंच पर पहली बार सम्मानित किया गया। शिक्षक बोले यह दिन उनकी सुनहरी यादों में दर्ज हो गया। कई शिक्षकों ने कहा कि इस सम्मान ने उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ा दी है। उन्हें लगा कि अब बच्चों के भविष्य के लिए और अधिक निष्ठा से मेहनत करनी है। सभागार में जो खुशी, गौरव और आत्मसम्मान का वातावरण बना वह इस बात का प्रमाण था कि एक शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार वही होता है जब उसकी मेहनत को समाज खुले दिल से स्वीकार करे। यह दिन शिक्षकों के लिए केवल एक समारोह नहीं, बल्कि उनके संपूर्ण जीवन की उपलब्धियों का उत्सव बन गया।

 

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