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Akhilesh Dubey: पांच घंटे में विवेचना कर लगा दी थी एफआर, कोर्ट ने दिया विवेचक पर कार्रवाई का आदेश, पढ़ें डिटेल

Thu, 18 Sep 2025 06:10 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 18 Sep 2025 06:10 AM IST
सार

Kanpur News: अधिवक्ता द्वारा दाखिल आपत्ति में रखे गए तर्कों और केस डायरी को देखने के बाद कोर्ट ने प्रज्ञा के मामले में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश कर दिए हैं। साथ ही, पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के तीन दिन के अंदर एएसपी स्तर के अधिकारी से विवेचना कराएं।

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Kanpur Akhilesh Dubey FR was filed after investigation in five hours court ordered action against investigator
akhilesh dubey kanpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पांच घंटे में विवेचना पूरी कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेज देने वाले विवेचक राजेश कुमार तिवारी के खिलाफ जांच कराने, विभागीय कार्रवाई कर सात दिन में रिपोर्ट कोर्ट भेजने के आदेश अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ईशा अग्रवाल ने पुलिस कमिश्नर को दिए हैं। साथ ही, मामले की अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।

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जूही बारादेवी स्थित क्लासिक कांटीनेंटल में रहने वाली प्रज्ञा त्रिवेदी ने कोर्ट के आदेश पर 31 जनवरी 2011 को जूही थाने में जूही लाल कालोनी निवासी अजय निगम और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि अजय ने छह दिसंबर 2010 की शाम उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। उन्हें जान से मारने की धमकी देकर गले में पहनी सोने की दो जंजीरें लूट लीं।

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प्रज्ञा के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में आपत्ति दाखिल की गई
खास बात यह थी रिपोर्ट शाम 5:45 बजे दर्ज की गई और सिर्फ पांच घंटे में ही रात 10:30 बजे इसकी विवेचना पूरी करके विवेचक राजेश कुमार तिवारी ने फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेज दी। 15 साल पुरानी इस फाइनल रिपोर्ट पर प्रज्ञा के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में आपत्ति दाखिल की गई। कहा गया कि विवेचक ने प्रज्ञा का कोई बयान नहीं लिया बल्कि अपने मन से बयान दर्ज कर लिए।

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एक जगह बैठकर ही विवेचना पूरी कर ली
घटना के समय मौजूद किसी गवाह का बयान दर्ज न करके अभियुक्तों के मिलने-जुलने वाले लोगों का ही बयान दर्ज किया गया। लूट के माल की बरामदगी की कोई कोशिश नहीं की गई। अभियुक्तों के प्रभाव में आकर एक जगह बैठकर ही विवेचना पूरी कर ली गई। फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद भी प्रज्ञा को धमकाया जाता रहा जिस कारण वह परिवार सहित मायके में रहने को मजबूर हो गई।

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एसपी स्तर के अधिकारी से विवेचना कराएं
फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल होने के बावजूद आज तक प्रज्ञा को समन नहीं भेजा गया, ताकि वह आपत्ति न जता सके। अधिवक्ता द्वारा दाखिल आपत्ति में रखे गए तर्कों और केस डायरी को देखने के बाद कोर्ट ने प्रज्ञा के मामले में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश कर दिए हैं। साथ ही, पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के तीन दिन के अंदर एएसपी स्तर के अधिकारी से विवेचना कराएं।

कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट भेजने के आदेश
वादी व अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर कानून के अनुसार साक्ष्य इकट्ठा कर समय पर रिपोर्ट कोर्ट भेजी जाए। पांच घंटे में विवेचना पूरी कर एफआर लगा देने को विवेचक की कर्तव्य के प्रति लापरवाही और गंभीर कदाचार मानते हुए सेवा नियमों के तहत राजेश के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच कराने और कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट भेजने के आदेश भी दिए हैं।

पीड़िता ने अखिलेश दुबे पर भी लगाए हैं गंभीर आरोप
मुकदमे में पीड़िता प्रज्ञा त्रिवेदी वही महिला हैं, जिन्होंने पुलिस कमिश्नरी द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन महाकाल में पिछले दिनों अखिलेश दुबे गैंग के खिलाफ एसआईटी को प्रार्थना पत्र दिया था। प्रज्ञा ने आरोप लगाया था कि बारादेवी स्थित उसके होटल पर अखिलेश दुबे ने कब्जा करने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया। प्रज्ञा ने 2009 में क्लासिक कांटीनेंटल होटल खरीदा था, जिसके बाद अखिलेश ने पहले रंगदारी मांगी और फिर होटल पर कब्जा करने के लिए परेशान करने लगा।

मंडप से उठवा लेने तक की धमकी दी थी
उनके खिलाफ अश्लील किताबें छपवाकर बंटवा दीं। उसके दर्ज कराए गए मुकदमों से डरकर उसके साझेदार ने होटल छोड़ दिया। अखिलेश ने उन्हें शादी के मंडप से उठवा लेने तक की धमकी दी थी। उन्होंने रिपोर्ट लिखाने की कोशिश की लेकिन अखिलेश के प्रभाव के चलते रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई, बल्कि अखिलेश के इशारे पर उल्टा उनके खिलाफ ही मुकदमा लिखा दिया गया।

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