Kanpur: विदेश से कमाई करने वाले 600 करदाता फंसे, टैक्स चुकाया पर रिटर्न में नहीं दिखाया, विभाग ने भेजा नोटिस
Kanpur News: अमेरिका, यूरोप, दुबई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से कमाई और विदेशी परिसंपत्तियों का ब्योरा आयकर रिटर्न में छिपाने वाले कानपुर रीजन के 600 से अधिक करदाता आयकर विभाग की जांच के घेरे में आ गए हैं। अकेले कानपुर में ऐसे 60 मामले सामने आए हैं, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में संख्या सबसे अधिक है।
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अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, दुबई जैसे तमाम देशों से कमाई के बाद भी विदेशी आय और विदेशी परिसंपत्तियों का ब्योरा छिपाने में कानपुर रीजन के 600 से ज्यादा करदाता आयकर विभाग की जांच में फंस गए हैं। इसमें कई ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने कमाई के अनुरूप कर भी चुकाया, लेकिन अपने आयकर रिटर्न में इसका खुलासा नहीं किया।
कानपुर में इस तरह के 60 मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा नोएडा और फिर गाजियाबाद के हैं। दरअसल, विदेश में नौकरी करने वाले, लाभांश पाने वाले, प्रापर्टी लेने वाले, इक्विटी, विदेशी शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले, विदेश से रकम के लेनदेन और विदेश की कंपनी में निवेश करने वाले आदि की निगरानी आयकर विभाग की फॉरेन एसेट्स इंटेलीजेंस यूनिट (एफएआईयू) करती है।
शेड्यूल एफए से जुड़े कॉलम में जानकारी नहीं दी
विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, नोटिस पाने वाले कुछ करदाताओं ने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किया है। अपनी देश में अर्जित आय पर टैक्स भी चुकाया है। इसके बावजूद जांच में सामने आया कि कई करदाताओं ने आईटीआर के विदेशी परिसंपत्तियों एवं आय (शेड्यूल एफए) से जुड़े कॉलम में आवश्यक जानकारी नहीं दी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ करदाताओं को विदेश से आय प्राप्त हो रही है।
10 लाख रुपये का नोटिस भी भेजा गया
कुछ को विदेशी कंपनियों में कार्य करने के बदले शेयर (ईशॉप/स्टॉक) मिले हैं। आयकर नियमों के तहत ऐसी विदेशी आय, बैंक खाते, निवेश, शेयर और अन्य विदेशी परिसंपत्तियों का पूरा विवरण आईटीआर के में देना अनिवार्य है। जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है इसमें सबसे ज्यादा नोएडा के हैं। इसके बाद गाजियाबाद, फिर कानपुर और इसके बाद आगरा के करदाता हैं। इनमें प्रोफेशनल, कारोबारी, सरकारी अफसर हैं। जिन्हें नोटिस भेजा गया है। तमाम लोगों को 10 लाख रुपये का नोटिस भी भेजा गया है।
विदेश के बैंकों से लेनदेन पर सख्त हैं नियम
सूत्रों के मुताबिक, यूनिट के अफसर ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत निगरानी करते हैं। 16 साल तक के पुराने मामलों की फाइल अफसर खोल सकते हैं। शिकायत के आधार पर, छापे के दौरान मिले इनपुट, मुखबिर की सूचना पर, देसी, विदेशी जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर अफसर आगे की कार्रवाई कर सकेंगे। जो जानकारी विदेश के बैंकों के जरिए दी गई है। ऐसे मामलों में विदेश में रकम भेजने का श्रोत, उद्देश्य को सबूत के साथ विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल विदेश में निवेश करने वाले भारतीय को आईटीआर में विदेशी संपत्ति का खुलासा अनिवार्य है।