कानपुर: 150 साल पुराना ऐतिहासिक मेला बारिश में धुला, दुकानें सजीं पर ग्राहक नहीं पहुंचे, लाखों का नुकसान
Kanpur News: नरवल तहसील के सिकठिया पुरवा में अनंत चतुर्दशी पर लगने वाले करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक मेले में इस बार मूसलाधार बारिश ने खलल डाल दिया। दो दिन तक लगातार हुई बारिश के कारण मेले में दुकानें और झूले सजे होने के बावजूद सन्नाटा पसरा रहा। इससे दुकानदारों और झूला ठेकेदारों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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कानपुर में नरवल तहसील के सरसौल विकासखंड के ग्राम सिकठिया पुरवा में लगने वाले करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने ऐतिहासिक मेले पर इस बार बारिश ने ग्रहण लगा दिया। दो दिन तक लगातार हुई बारिश के कारण मेले में सन्नाटा पसरा रहा। झूले लगे रहे, दुकानें सजी रहीं, लेकिन एक भी ग्राहक नहीं पहुंचा। इससे दुकानदारों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
मेला संयोजकों के अनुसार, यह मेला प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी के अवसर पर दो दिनों के लिए लगता है। डेढ़ सौ वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब लगातार बारिश के कारण मेला नहीं लग सका। यह क्षेत्र का एकमात्र बचा हुआ ऐतिहासिक मेला है, जिसमें करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग साल भर खरीदारी का इंतजार करते हैं।
15 दिन की मेहनत बेकार चली गई
बड़े-बुजुर्ग और बच्चे सभी मेले का लुत्फ उठाने आते थे, लेकिन इस बार बारिश ने मेले के रंग में भंग डाल दिया। झूला ठेकेदार केदार यादव ने बताया कि वह प्रतिवर्ष 15 दिन पहले आकर मेले की तैयारी शुरू करते हैं। इस बार भी तैयारी पूरी कर ली गई थी, लेकिन मौसम खराब होने से 15 दिन की मेहनत बेकार चली गई। 15 से 20 मजदूरों की मजदूरी और भाड़ा मिलाकर करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
भीषण बारिश के कारण मेला पूरी तरह फ्लॉप रहा
वहीं, गैर जनपदों से आए दुकानदारों ने बताया कि वे हर साल इस मेले में हजारों की बिक्री करते थे, लेकिन दोनों दिन भीषण बारिश के कारण मेला पूरी तरह फ्लॉप रहा। सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार इस मेले में कंस वध और नाग नथैया लीला का आयोजन भी किया जाता था, जो इस वर्ष बारिश के कारण नहीं हो सका।