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Kannauj Nikay Chunav: इत्रनगरी में हुआ बदलाव, लिखी नई इबारत, यहां 10 साल बाद फिर से चिंघाड़ा हाथी
Sun, 14 May 2023 05:46 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 14 May 2023 05:46 PM IST
सार
कई दशक तक सपा के दबदबे वाले कन्नौज में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जनता ने पूरी तरह से भाजपा का साथ दिया। लेकिन नगर निकाय चुनाव में वह दबदबा नहीं दिखा। यह अलग है कि पिछले बार दो सीट जीतने वाली भाजपा ने इस बार आठ में से सबसे ज्यादा तीन सीट जीता है। ले
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कन्नौज नगर निकाय चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल मचा दिया है। जिले की कमोबेश सभी सीट पर बदलाव की बही सियासी बयार ने नई इबारत लिख दी है। कन्नौज जिले में तीनों नगर पालिकाओं से लेकर सभी नगर पंचायत में हुए बदलाव ने कईयों को आईना दिखाया है। सियासी गलियारे में अब इस बदलाव के बाद के नफा-नुकसान को तौला जा रहा है। कई बड़े सियासी चेहरे के माथे पर आए शिकन ने भी काफी कुछ बयान कर दिया है।
कई दशक तक सपा के दबदबे वाले कन्नौज में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जनता ने पूरी तरह से भाजपा का साथ दिया। लेकिन नगर निकाय चुनाव में वह दबदबा नहीं दिखा। यह अलग है कि पिछले बार दो सीट जीतने वाली भाजपा ने इस बार आठ में से सबसे ज्यादा तीन सीट जीता है। लेकिन पिछले बार जीते दो में से एक सौरिख पर बागी के हाथों मिली शिकस्त ने उसकी रणनीति पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। तिर्वा में बमुश्किल मिली जीत ने भी भाजपा को आईना दिखाया है। छिबरामऊ में जरूर भाजपा चेहरा बदलकर लगातार दूसरी बार काबिज हो गई है। सदर सीट पर मिली करारी शिकस्त ने उसकी सियासी हसरत पर पानी जरूर फेर दिया है। तालग्राम में तीसरे स्थान पर खिसकने और सिकंदरपुर में मौजूदा चेयरमैन पर दांव लगाने के बाद भी मिली शिकस्त ने पार्टी के रणनीतिकारों के माथे पर बल ला दिया है। समधन में भाजपा ने पहले ही मैदान छोड़ दिया था। अंदरखाने जिसे समर्थन दिया था, वह भी मुकाबले में नहीं दिखा।
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कई दशक तक सपा के दबदबे वाले कन्नौज में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जनता ने पूरी तरह से भाजपा का साथ दिया। लेकिन नगर निकाय चुनाव में वह दबदबा नहीं दिखा। यह अलग है कि पिछले बार दो सीट जीतने वाली भाजपा ने इस बार आठ में से सबसे ज्यादा तीन सीट जीता है। लेकिन पिछले बार जीते दो में से एक सौरिख पर बागी के हाथों मिली शिकस्त ने उसकी रणनीति पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। तिर्वा में बमुश्किल मिली जीत ने भी भाजपा को आईना दिखाया है। छिबरामऊ में जरूर भाजपा चेहरा बदलकर लगातार दूसरी बार काबिज हो गई है। सदर सीट पर मिली करारी शिकस्त ने उसकी सियासी हसरत पर पानी जरूर फेर दिया है। तालग्राम में तीसरे स्थान पर खिसकने और सिकंदरपुर में मौजूदा चेयरमैन पर दांव लगाने के बाद भी मिली शिकस्त ने पार्टी के रणनीतिकारों के माथे पर बल ला दिया है। समधन में भाजपा ने पहले ही मैदान छोड़ दिया था। अंदरखाने जिसे समर्थन दिया था, वह भी मुकाबले में नहीं दिखा।
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तालग्राम में दौड़ी साइकिल
पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव हारकर अपना गढ़ गंवा चुकी सपा अब नए सिरे से सियासी जमीन तलाशने की जुगत में है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले यह सपा के लिए किसी सेमीफाइनल की ही तरह था। लेकिन उसे आठ में से सिर्फ एक सीट तालग्राम पर ही जीत मिल सकी है। कन्नौज सौरिख, तिर्वा, सिकंदरपुर में वह मुकाबले में ही नहीं दिखी। छिबरामऊ में जरूर भाजपा को टक्कर दी, लेकिन कामयाबी से दूर ही रही। यह जरूर है कि पिछली बार 2017 के निकाय चुनाव में एक भी सीट न जीतने वाली सपा इस बार तालग्राम में मिली जीत की संजीवनी से संतोष कर सकती है।
पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव हारकर अपना गढ़ गंवा चुकी सपा अब नए सिरे से सियासी जमीन तलाशने की जुगत में है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले यह सपा के लिए किसी सेमीफाइनल की ही तरह था। लेकिन उसे आठ में से सिर्फ एक सीट तालग्राम पर ही जीत मिल सकी है। कन्नौज सौरिख, तिर्वा, सिकंदरपुर में वह मुकाबले में ही नहीं दिखी। छिबरामऊ में जरूर भाजपा को टक्कर दी, लेकिन कामयाबी से दूर ही रही। यह जरूर है कि पिछली बार 2017 के निकाय चुनाव में एक भी सीट न जीतने वाली सपा इस बार तालग्राम में मिली जीत की संजीवनी से संतोष कर सकती है।
सदर पर हाथी चिंघाड़ा, चार सीट पर दी टक्कर
पिछले चुनाव में गुरसहायगंज और समधन में जीत दर्ज करने वाली बसपा को हालांकि इस बार सिर्फ कन्नौज सदर सीट पर ही कामयाबी मिल सकी है। लेकिन तिर्वा में बेहद नजदीकी मुुकाबले में भाजपा की सांस रोक देने वाले उसके प्रदर्शन ने सियासी पंडितों को जरूर चौंकाया है। सौरिख, समधन में भी भाजपा ने खूब मुकाबला किया। गुरसहायगंज में भी उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा। छिबरामऊ में भी पार्टी ने संतोषजनक प्रदर्शन किया। तालग्राम और सिकंदरपुर में उसे नामांकन के दौरान ही पार्टी प्रत्याशियों से ही झटका मिला था।
पिछले चुनाव में गुरसहायगंज और समधन में जीत दर्ज करने वाली बसपा को हालांकि इस बार सिर्फ कन्नौज सदर सीट पर ही कामयाबी मिल सकी है। लेकिन तिर्वा में बेहद नजदीकी मुुकाबले में भाजपा की सांस रोक देने वाले उसके प्रदर्शन ने सियासी पंडितों को जरूर चौंकाया है। सौरिख, समधन में भी भाजपा ने खूब मुकाबला किया। गुरसहायगंज में भी उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा। छिबरामऊ में भी पार्टी ने संतोषजनक प्रदर्शन किया। तालग्राम और सिकंदरपुर में उसे नामांकन के दौरान ही पार्टी प्रत्याशियों से ही झटका मिला था।
कांग्रेस ने जीत कर दिखाया दम
इस बार के चुनावी नतीजे में कांग्रेस ने अपनी इंट्री से जरूर सभी को चौंकाया है। समधन नगर पंचायत में उसे मिली ऐतिहासिक जीत से सियासी पंडित भी चौंक पड़े हैं। यह अलग ही वहां पार्टी का मजबूत चेहरा उसकी जीत की राह बना गया। लेकिन पार्टी सिंबल को मिली कामयाबी ने यहां के कार्यकर्ताओं का जोश जरूर बढ़ा दिया है। दशकों से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में नाकामी झेल रही कांग्रेस की यहां यह जीत कार्यकर्ताओं और पार्टी के लिए रेगिस्तान में मिले पानी की तरह है।
इस बार के चुनावी नतीजे में कांग्रेस ने अपनी इंट्री से जरूर सभी को चौंकाया है। समधन नगर पंचायत में उसे मिली ऐतिहासिक जीत से सियासी पंडित भी चौंक पड़े हैं। यह अलग ही वहां पार्टी का मजबूत चेहरा उसकी जीत की राह बना गया। लेकिन पार्टी सिंबल को मिली कामयाबी ने यहां के कार्यकर्ताओं का जोश जरूर बढ़ा दिया है। दशकों से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में नाकामी झेल रही कांग्रेस की यहां यह जीत कार्यकर्ताओं और पार्टी के लिए रेगिस्तान में मिले पानी की तरह है।