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धरोहर में शामिल होगा भुजपुरा में लगा कल्प वृक्ष, वन विभाग की टीम ने जांच के बाद की पुष्टि
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भुजपुरा गांव में लगा कल्प वृक्ष। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
शिवली। मैथा ब्लॉक के भुजपुरा गांव में रिंद नदी के किनारे लगे कल्प वृक्ष (पारिजात) की पुष्टि वन विभाग ने कर दी है। इसके साथ ही कल्प वृक्ष को ग्राम पंचायत में सूचीबद्ध कर लिया गया है। अब इस पेड़ की धरोहर के तौर पर देखरेख की जाएगी। अमर उजाला की पहल पर यह कार्रवाई की गई है।
मैथा-रनियां मार्ग पर भुजपुरा गांव में काफी पुराना कल्प वृक्ष लगा है। ग्रामीण यहां पूजा अर्चना भी करते हैं। पूर्व सीडीओ जोगिंदर सिंह ने कल्प वृक्ष की जानकारी पर बीडीओ को पेड़ के रखरखाव के निर्देश दिए थे।
इधर दिलीप नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार व डॉ. अरविंद कुमार ने वृक्ष की पत्तियों व छाल आदि से इसकी पहचान कल्प वृक्ष के तौर पर की थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी।
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अमर उजाला ने 27 अगस्त को खबर प्रकाशित की थी। इस पर वन विभाग के अफसरों ने प्राचीन पेड़ के परीक्षण के बाद इसके कल्प वृक्ष होने या न होने की पुष्टि करने की बात कही थी। डीएफओ ने रसूलाबाद वन रेंजर अरविंद शुक्ला को कल्प वृक्ष जैसे प्राचीन पेड़ के स्थलीय निरीक्षण कर इसकी पुष्टि करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में फारेस्ट गार्ड सुप्रीति साहू ने वन टीम के साथ मौके पर जाकर प्राचीन पेड़ का परीक्षण किया। वन टीम ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्क पर सहमति देकर प्राचीन पेड़ के कल्प वृक्ष होने की पुष्टि की है।
फारेस्ट गार्ड ने कल्प वृक्ष को सूचीबद्ध कराया है। फिलहाल कल्प वृक्ष की देखदेख ग्रामीण अपने स्तर पर ही करते हैं। ग्राम पंचायत को कल्प वृक्ष की निगरानी का दायित्व दिया गया है। धरोहर के तौर पर कल्प वृक्ष सूचीबद्ध हो सके इसके लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।
भुजपुरा गांव में लगे प्राचीन वृक्ष की वन टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। पत्तियों व तना आदि की पड़ताल के बाद इसे कल्प वृक्ष होने की पुष्टि की गई है। वृक्ष की आयु की जानकारी के लिए स्थानीय लोगों व प्रधान के बयान लिए गए। - अरविंद शुक्ला, वन रेंजर, रसूलाबाद
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मैथा-रनियां मार्ग पर भुजपुरा गांव में काफी पुराना कल्प वृक्ष लगा है। ग्रामीण यहां पूजा अर्चना भी करते हैं। पूर्व सीडीओ जोगिंदर सिंह ने कल्प वृक्ष की जानकारी पर बीडीओ को पेड़ के रखरखाव के निर्देश दिए थे।
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इधर दिलीप नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार व डॉ. अरविंद कुमार ने वृक्ष की पत्तियों व छाल आदि से इसकी पहचान कल्प वृक्ष के तौर पर की थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी।
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अमर उजाला ने 27 अगस्त को खबर प्रकाशित की थी। इस पर वन विभाग के अफसरों ने प्राचीन पेड़ के परीक्षण के बाद इसके कल्प वृक्ष होने या न होने की पुष्टि करने की बात कही थी। डीएफओ ने रसूलाबाद वन रेंजर अरविंद शुक्ला को कल्प वृक्ष जैसे प्राचीन पेड़ के स्थलीय निरीक्षण कर इसकी पुष्टि करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में फारेस्ट गार्ड सुप्रीति साहू ने वन टीम के साथ मौके पर जाकर प्राचीन पेड़ का परीक्षण किया। वन टीम ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्क पर सहमति देकर प्राचीन पेड़ के कल्प वृक्ष होने की पुष्टि की है।
फारेस्ट गार्ड ने कल्प वृक्ष को सूचीबद्ध कराया है। फिलहाल कल्प वृक्ष की देखदेख ग्रामीण अपने स्तर पर ही करते हैं। ग्राम पंचायत को कल्प वृक्ष की निगरानी का दायित्व दिया गया है। धरोहर के तौर पर कल्प वृक्ष सूचीबद्ध हो सके इसके लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।
भुजपुरा गांव में लगे प्राचीन वृक्ष की वन टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। पत्तियों व तना आदि की पड़ताल के बाद इसे कल्प वृक्ष होने की पुष्टि की गई है। वृक्ष की आयु की जानकारी के लिए स्थानीय लोगों व प्रधान के बयान लिए गए। - अरविंद शुक्ला, वन रेंजर, रसूलाबाद