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दिन होता तो शायद इमरजेंसी ब्रेक लगने पर न होता हादसा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 24 Aug 2017 07:58 PM IST
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औरैया में दुर्घटनाग्रस्त कैफियत एक्सप्रेस
दिल्ली-आजमगढ़ कैफियत एक्सप्रेस के ड्राइवर ने सूझबूझ से इमरजेंसी ब्रेक लगाकर हादसा टालने की कोशिश की लेकिन फिर भी इंजन डंफर से टकरा गया। अगर यह घटना दिन की होती तो इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर ट्रेन डिरेलमेंट (बेपटरी होना) से बच जाती।
इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर 850 मीटर रेंगती है ट्रेन
ट्रेन ड्राइवरों के मुताबिक अगर तेज गति ट्रेन को किसी हादसे से बचने के लिए ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक लगाता है तो ट्रेन करीब 850 मीटर तक रेंगने के बाद रुकती है। ट्रेन अपनी निर्धारित गति से आधी रफ्तार से चल रही है तो ट्रेन करीब 400 से 500 मीटर रेंगकर रुक जाएगी। रात के वक्त अंधेरा होता है और इंजन में लगी लाइट की रोशनी से ड्राइवर करीब 50 मीटर की दूरी तक ही साफ दे सकता है। ऐसे में अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाई गई तो ट्रेन का टकराना या पलटना लगभग निश्चित है।
दूर से दिख जाता डंफर, ड्राइवर पहले ही लगा देता ब्रेक
ट्रेन ड्राइवर शैलेंद्र और विजय ने बताया कि कैफियत एक्सप्रेस का ड्राइवर अगर दिन में ट्रेन लेकर जा रहा होता तो डंफर को दूर से ही देख लेता और इमरजेंसी ब्रेक लगा देता। लेकिन घटना रात के समय की है। इसलिए डंफर काफी करीब होने के बाद ही ड्राइवर को दिखा होगा। इमरजेंसी ब्रेक ही ड्राइवर के पास ऐसा अधिकार या ड्यूटी है, जिसे वह आपाताकाल के समय लगा सकता है। वरना बिना मेमू (विभागीय पत्र) के ट्रेन चलती नहीं है। रूट पर पूरा संचालन सिग्नल का होता है। जैसा सिग्नल मिलता है, उसी के मुताबिक ट्रेन रुकती, बढ़ती या धीमी होती है।
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इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर 850 मीटर रेंगती है ट्रेन
ट्रेन ड्राइवरों के मुताबिक अगर तेज गति ट्रेन को किसी हादसे से बचने के लिए ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक लगाता है तो ट्रेन करीब 850 मीटर तक रेंगने के बाद रुकती है। ट्रेन अपनी निर्धारित गति से आधी रफ्तार से चल रही है तो ट्रेन करीब 400 से 500 मीटर रेंगकर रुक जाएगी। रात के वक्त अंधेरा होता है और इंजन में लगी लाइट की रोशनी से ड्राइवर करीब 50 मीटर की दूरी तक ही साफ दे सकता है। ऐसे में अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाई गई तो ट्रेन का टकराना या पलटना लगभग निश्चित है।
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दूर से दिख जाता डंफर, ड्राइवर पहले ही लगा देता ब्रेक
ट्रेन ड्राइवर शैलेंद्र और विजय ने बताया कि कैफियत एक्सप्रेस का ड्राइवर अगर दिन में ट्रेन लेकर जा रहा होता तो डंफर को दूर से ही देख लेता और इमरजेंसी ब्रेक लगा देता। लेकिन घटना रात के समय की है। इसलिए डंफर काफी करीब होने के बाद ही ड्राइवर को दिखा होगा। इमरजेंसी ब्रेक ही ड्राइवर के पास ऐसा अधिकार या ड्यूटी है, जिसे वह आपाताकाल के समय लगा सकता है। वरना बिना मेमू (विभागीय पत्र) के ट्रेन चलती नहीं है। रूट पर पूरा संचालन सिग्नल का होता है। जैसा सिग्नल मिलता है, उसी के मुताबिक ट्रेन रुकती, बढ़ती या धीमी होती है।
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