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जमात-ए-इस्लामी हिंद ने माना तीन तलाक मुसलमानों का अंदरूनी मामला
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 25 Oct 2016 12:54 AM IST
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समान नागरिक संहिता मंजूर नहीं: सालेहा
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जमात-ए-इस्लामी हिंद, कानपुर की महिला शाखा की अध्यक्ष साहेला सालेहाती ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा उनका अंदरूनी मामला है। कुछ लोग तीन तलाक को एक ही मानते हैं और कुछ तीन तलाक को तीन ही मानते हैं। यह हम लोग मिल बैठ कर सुलझा लेंगे। समान नागरिक संहिता भी इस्लामी शरीयत के खिलाफ है। इसके खिलाफ 30 अक्तूबर को डेढ़ बजे से हलीम मुस्लिम इंटर कालेज में महिलाओं की सभा होगी। इसमें संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अतिया सिद्दीकी भाग लेंगी। वह सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से मुखातिब थीं।
उन्होंने कहा कि तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के संबंध में केंद्र सरकार का व्यवहार और कमीशन के सवाल देश की एकता और अखंडता और राष्ट्रीय सद्भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस तरह हमारी धार्मिक आजादी को छीनने की कोशिश की जा रही है।
कहा कि इस्लामी शरीयत के तमाम अहकाम खास तौर पर तलाक, खुला (महिलाओं का अलग होना), उत्तराधिकार, शादी, गोद लेने के इस्लामी नियमों से देशभर की मुस्लिम महिलाएं पूरी तरह से संतुष्ट हैं। देश में किसी भी धर्म के मानने वालों को उसके धर्म पर चलने की पूरी स्वतंत्रता संविधान में दी गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार इस्लाम में ही सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि हम शरीयत की हिफाजत के लिए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के साथ हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव करीब हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए बड़ी चालाकी से तीन तलाक और समान नागरिक संहिता का मुद्दा उछाला है।
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उन्होंने कहा कि तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के संबंध में केंद्र सरकार का व्यवहार और कमीशन के सवाल देश की एकता और अखंडता और राष्ट्रीय सद्भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस तरह हमारी धार्मिक आजादी को छीनने की कोशिश की जा रही है।
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कहा कि इस्लामी शरीयत के तमाम अहकाम खास तौर पर तलाक, खुला (महिलाओं का अलग होना), उत्तराधिकार, शादी, गोद लेने के इस्लामी नियमों से देशभर की मुस्लिम महिलाएं पूरी तरह से संतुष्ट हैं। देश में किसी भी धर्म के मानने वालों को उसके धर्म पर चलने की पूरी स्वतंत्रता संविधान में दी गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार इस्लाम में ही सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि हम शरीयत की हिफाजत के लिए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के साथ हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव करीब हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए बड़ी चालाकी से तीन तलाक और समान नागरिक संहिता का मुद्दा उछाला है।
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