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जालौन में खाद के लिए हाहाकार: सात दिन से भटक रहे किसान, कुसमिलिया समिति पर हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति

Tue, 13 Oct 2026 12:25 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 13 Oct 2026 12:25 PM IST
सार

Jalaun News: मोहम्मदाबाद स्थित कुसमिलिया सहकारी समिति पर पिछले सात दिनों से खाद के लिए किसान चक्कर काटने को मजबूर हैं। सोमवार को खाद का वितरण न होने और कागजात न जमा किए जाने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित किसानों ने जमीन पर खतौनी और पहचान पत्र रखकर विरोध दर्ज कराते हुए लाइन लगाई।

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Jalaun Farmers left wandering for seven day commotion at Kusmilia society police bring situation under control
खाद के लिए भटक रहे किसान - फोटो : amar ujala

विस्तार

जालौन जिले के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र में सहकारी समिति पर खाद के लिए किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले सात दिनों से किसान खाद के लिए समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद मिलने के बजाय निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सोमवार को भी खाद का वितरण नहीं होने से किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।

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नंबर लगाने के लिए कर्मचारियों के सामने गुहार लगाने के बाद भी जब किसानों के कागजात नहीं लिए गए तो उन्होंने अपनी खतौनी और आधार कार्ड जमीन पर रखकर लाइन लगा दी। किसानों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। इसी सभी को देखते हुए डेकोर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची किसानों को समझ कर लाइन लगाई गई और कहा सभी लोगों को खाद दिलाई जाएगी, जब जाकर कुछ किसान माने।

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बुवाई का समय नजदीक आने से किसानों की चिंता बढ़ गई
कुसमिलिया सहकारी समिति से मुहम्मदाबाद, ऐरी, रामपुर और चिल्ली समेत आधा दर्जन गांवों के किसान जुड़े हैं। समिति में करीब 1200 कार्डधारक हैं। इनमें कुछ किसानों के खाते में पैसा जमा नहीं होने से खाते बंद हैं, जबकि करीब 800 कार्डधारकों के खाते चालू बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद किसानों को खाद के लिए कई-कई दिन तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रविवार को समिति बंद रहती है और सोमवार को भी खाद नहीं बांटी गई। ऐसे में खेतों में बुवाई का समय नजदीक आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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कर्मचारियों पर चहेतों को पहले खाद दिलाने का आरोप
किसानों का आरोप है कि वे सुबह से ही समिति पहुंचकर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों के पास पहले से ही कुछ किसानों के कागजात बैग में रखे होते हैं। उन्हीं का नंबर पहले लगा दिया जाता है। बाकी किसानों को घंटों धूप में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिल पाती। कई बार नंबर आने से पहले ही खाद खत्म होने की बात कहकर अगले दिन आने को कह दिया जाता है।

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किसानों को समान रूप से खाद मिल सके
सोमवार को भी कागजात जमा करने से मना करने पर किसानों ने नाराजगी जताई और नारेबाजी शुरू कर दी। किसानों का कहना है कि समिति में स्थानीय कर्मचारियों की तैनाती के कारण अपने परिचितों को प्राथमिकता दिए जाने की आशंका है। व्यवस्था में सुधार के लिए कुछ दिनों तक मुख्यालय से कर्मचारियों को भेजकर खाद वितरण कराया जाए, ताकि सभी किसानों को समान रूप से खाद मिल सके। समिति पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं और दिव्यांग किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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