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सरकारी स्कूल में पढ़कर शिवि बने इसरो के वैज्ञानिक
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इसरो के तत्कालीन चेयरमैन एएस किरन कुमार के साथ शिवि पटेल। फोटो
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। कहते हैं प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इस बात को साबित किया है फर्रुखाबाद के युवा शिवि पटेल ने। सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाले शिवि अपनी प्रतिभा के बूते वैज्ञानिक बने। उनका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हुआ है। वर्तमान में वह जियो इमेजिंग सैटेलाइट विभाग में साथी वैज्ञानिकों के साथ रियल टाइम डाटा प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
आवास विकास कालोनी निवासी भारतीय महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. श्याम निर्मोही के पुत्र शिवि ने सरस्वती शिशु मंदिर व विद्या मंदिर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद राजकीय इंटर कॉलेज फर्रुखाबाद से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। स्कूली शिक्षा के दौरान ही शिवि को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी करने में रुचि थी। वह वैज्ञानिक बनने का सपना देखने लगे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से 2011 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद शिवि ने कनाडा की एक कंपनी में नौकरी शुरू की। इस दौरान भी वह अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रयत्नशील रहे। ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में अच्छी रैंक मिली तो आईआईटी पटना में एमटेक में दाखिला ले लिया। वर्ष 2017 में एमटेक करने के बाद विदेश जाने का भी प्रस्ताव आया। इसी वर्ष इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरसीसी), हैदराबाद में साइंटिस्ट-सी के लिए चयन हो गया।
सेटेलाइट प्रोजेक्ट के कई मॉड्यूल पर किया काम
एनआरसीसी में वह अब तक सेटेलाइट प्रोजेक्ट के कई मॉड्यूल पर काम कर चुके हैं। साथी वैज्ञानिकों के साथ इन दिनों जियो इमेजिंग सेटेलाइट में रियल डाटा पर काम चल रहा है। शिवि कहते हैं कि अंतरिक्ष में भारत के सपनों को पंख लगाने वाली संस्था में काम करने का मौका मिलना गर्व की बात है। हर समय इस बात का अहसास होता कि देश के लिए बेहतर करना है। प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान, भौगोलिक सूचना प्रणाली, आपदा प्रबंधन जैसे सामाजिक हित से जुड़ी प्रौद्योगिकी में नवीनता बनाए रखना जरूरी है। इसी कार्य से वह जुड़े हैं।
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आवास विकास कालोनी निवासी भारतीय महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. श्याम निर्मोही के पुत्र शिवि ने सरस्वती शिशु मंदिर व विद्या मंदिर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद राजकीय इंटर कॉलेज फर्रुखाबाद से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। स्कूली शिक्षा के दौरान ही शिवि को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी करने में रुचि थी। वह वैज्ञानिक बनने का सपना देखने लगे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से 2011 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद शिवि ने कनाडा की एक कंपनी में नौकरी शुरू की। इस दौरान भी वह अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रयत्नशील रहे। ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में अच्छी रैंक मिली तो आईआईटी पटना में एमटेक में दाखिला ले लिया। वर्ष 2017 में एमटेक करने के बाद विदेश जाने का भी प्रस्ताव आया। इसी वर्ष इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरसीसी), हैदराबाद में साइंटिस्ट-सी के लिए चयन हो गया।
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सेटेलाइट प्रोजेक्ट के कई मॉड्यूल पर किया काम
एनआरसीसी में वह अब तक सेटेलाइट प्रोजेक्ट के कई मॉड्यूल पर काम कर चुके हैं। साथी वैज्ञानिकों के साथ इन दिनों जियो इमेजिंग सेटेलाइट में रियल डाटा पर काम चल रहा है। शिवि कहते हैं कि अंतरिक्ष में भारत के सपनों को पंख लगाने वाली संस्था में काम करने का मौका मिलना गर्व की बात है। हर समय इस बात का अहसास होता कि देश के लिए बेहतर करना है। प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान, भौगोलिक सूचना प्रणाली, आपदा प्रबंधन जैसे सामाजिक हित से जुड़ी प्रौद्योगिकी में नवीनता बनाए रखना जरूरी है। इसी कार्य से वह जुड़े हैं।
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