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इस्राइल-ईरान युद्ध : कानपुर के निर्यातकों ने सौ करोड़ के ऑर्डर रोके

Sun, 15 Jun 2025 02:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jun 2025 02:07 AM IST
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Israel-Iran war: Kanpur exporters put on hold orders worth Rs 100 crore
कानपुर। इस्राइल-ईरान युद्ध से कानपुर के निर्यातकों ने सौ करोड़ के ऑर्डर रोक दिए हैं। इस्राइल को शहर से सैडलरी, मशीनरी उत्पाद, डायमंड का पॉलिश और ईरान को अलग-अलग प्रकार के चारा फूड सप्लीमेंट और चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। युद्ध के चलते माल और भुगतान फंसने के डर से निर्यातकों ने ऑर्डर रोक दिए हैं। वहीं, माल भाड़ा भी 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
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जानकारों का कहना है कि युद्ध से निर्यात मार्ग बदल जाएगा। हवाई क्षेत्र बंद होने से मध्य एशिया के देशों में समुद्र मार्ग से जाना होगा। इससे निर्यात लागत बढ़ सकेगी। लाल सागर में हूती विद्रोहियों का भी संकट बढ़ने की आंशका है। माल पहुंचने के दिन भी ज्यादा हो जाएंगे। इससे नए ऑर्डर रद होने की भी आशंका बन सकती है।
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कानपुर से इस्राइल को सालाना 500 करोड़ और ईरान को 200 करोड़ के उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। वहीं, ईरान से खजूर, अलग-अलग के ड्राईफ्रूट आते हैं। यह गुजरात, मुंबई के पोर्ट में आने के बाद शहर पहुंचते हैं। युद्ध बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
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फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन फियो के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की छाया निर्यात क्षेत्र पर पड़ने लगी है। युद्ध की आहट पहले से ही निर्यातकों को थी, वो जोखिम नहीं उठाना चाहते थे। इसके चलते इस्राइल को भेजे जाने वाले 50-70 करोड़ के ऑर्डर रोक दिए गए हैं। ईरान जाने वाले 20-30 करोड़ के आर्डर फिलहाल रोक दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि ईरान और आसपास के क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र के बंद होने से एयरलाइन को यूरोप और अन्य पश्चिमी बाजारों में कार्गो शिपमेंट के लिए लंबे, अधिक महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसके चलते हवाई माल भाड़े में वृद्धि हो जाएगी। समुद्री रास्ते से माल जाने में भी संकट आ सकता है। दरअसल, लाल सागर संकट का जोखिम पहले से ही है। हूती विद्रोहियों की ओर से समुद्री वाहनों को निशाना बनाया जाता है। युद्ध बढ़ने से इस रूट पर ही माल का आवागमन हो सकेगा। इस्राइल और ईरान के मार्ग के जरिये ही यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में पहुंच होती है।

चर्म निर्यात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल ने बताया कि युद्ध से सबसे तत्काल और गंभीर प्रभाव शिपिंग की बढ़ती लागत और बढ़ती समय सीमा पर होगा। लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के साथ अब एक उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। प्रमुख शिपिंग लाइनें केप ऑफ गुड होप के आसपास जहाजों को फिर से शुरू कर देंगी। जिससे अनुमानित समय 14 से 20 दिन बढ़ जाएगा। जिससे लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा एक प्रभाव ये भी होगा कि कंटेनरों की समस्या फिर आ सकेगी। दरअसल अमेरिका की ओर से पहले चीन पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच समझौता हो गया। इससे चीनी कंपनियां तेजी से अपने ऑर्डर पूरे करने के लिए कंटेनरों को मंगाएंगी। जिसका असर जल्द दिख सकेगा।
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