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Kanpur News: फर्जी बिलिंग के साथ पेट्रोल-डीजल के खर्च में भी गड़बड़ी मिली

Tue, 22 Sep 2026 02:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:48 AM IST
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Irregularities in petrol and diesel expenses, along with fake billing, were also detected.
कानपुर। नगर निगम में टेंडर हासिल करने के खेल में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। समिति की जांच में 15 से अधिक फर्मों के पंजीकरण और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियां मिली हैं। इसमें फर्जी बिलिंग के साथ ही पेट्रोल-डीजल के खर्च में भी गड़बड़ी मिली है। अब रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
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29 अगस्त को गठित इस जांच कमेटी ने नगर निगम में पंजीकृत फर्मों के दस्तावेज, ठेकेदारी की प्रक्रिया और विभिन्न टेंडरों में भागीदारी की पड़ताल की। जांच के दौरान कुछ फर्मों के दस्तावेजों में ऐसी कमियां सामने आईं जिनसे उनके पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में टेंडर हासिल करने और काम बांटने के लिए सांठगांठ के साक्ष्य भी मिले हैं। जांच में ठेकेदारों के साथ कुछ अधिकारियों और पार्षदों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, किसकी भूमिका कितनी है और किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ इसका खुलासा नहीं किया गया है।
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तीन सदस्यीय समिति में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल पांडेय भी शामिल हैं। समिति ने टेंडर प्रक्रिया के साथ उन निर्माण कार्यों की भी जांच की है जिनके ठेके संबंधित फर्मों को दिए गए। काम की गुणवत्ता, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और फर्जी बिलिंग के मामले भी पकड़ में आए हैं। समिति के सदस्यों ने जांच के दौरान नगर निगम में पेट्रोल-डीजल के खर्च में भी अनियमितताएं पकड़ी हैं। इसके अलावा, कुछ नगर निगम और आउटसोर्सिंग कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है।



अब तक इन पर हुई कार्रवाई
कानपुर। नगर निगम के टेंडर घोटाले में 25 अगस्त को पांच ठेकेदारों पर एफआईआर होने के साथ ही पांच कंपनियां ब्लैकलिस्टेड की गई थी। इसमें दो ठेकेदार संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया गया था जबकि सरगना गोविंद शर्मा हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लेकर बाहर है। मामले में ठेकेदार फर्म दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राईजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला एंटरप्राईजेज पर कार्रवाई हुई थी। अब तक फर्म पंजीकरण मामले में निगरानी न करने और कागजों का बिना सत्यापन पंजीकरण करने में अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह, दो जेई अमनदीप सिहं और बालेंद्र कुमार का निलंबन किया जा चुका है। वर्षों से एक ही विभाग में डटे लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद को इधर से उधर किया गया है। मामले में एसआईटी के साथ ही मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ के नेतृत्व में गठित कमेटी भी अलग-अलग जांच कर रही है। (संवाद)
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