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IPS Arti Singh: पांच बार मिली असफलता, अंतिम मौके में मिला मुकाम और बन गई आईपीएस अफसर; आरती सिंह से खास बातचीत
Sat, 11 May 2024 10:51 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 11 May 2024 10:51 AM IST
सार
आईपीएस आरती सिंह ने बताया कि उन्हें पांच बार असफलता के बाद अंतिम बार में मुकाम मिला था। बंगलुरू में प्राइवेट नौकरी करने के साथ कर सिविल सेवा की तैयारी रही थीं। स्कूल टॉपर से तीन नंबर कम आने पर फतेहपुर की छात्रा साक्षी ने जान दी थी। यह गलत है। इस मुद्दे पर अमर उजाला ने अभियान चलाया है।
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IPS Arti Singh
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मेरा पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता था। जैसे तैसे हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के बाद एमबीएम की पढ़ाई पूरी की। फिर बंगलुरू में एक एक्सपोर्ट हाउस में नौकरी करने लगी। इसके साथ ही सिविल सर्विसेस के परीक्षा भी देती रहीं। कई बार वह परीक्षा में बैठीं लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
इस बीच उम्र भी निकलती जा रही थी। 2017 में उन्हें अंतिम मौका मिला। इसके बाद मैंने नौकरी छोड़ दी। फिर जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। इसके बाद 2017 बैच में 118 रैंक हासिल कर आईपीएस अफसर बन गई।
ये कहना है आईपीएस आरती सिंह का। वर्तमान में आईपीएस आरती सिंह कमिश्नरी पुलिस में डीसीपी ट्रैफिक हैं। आरती सिंह बताती हैं कि हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा के अंक गेम भर हैं। असफलता अंत नहीं होता। संघर्ष ही जीवन का नाम है। अगर आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तो दूसरा क्यों करेगा। हार तभी होती है जब हौसला टूटता है।
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उन्होंने बताया कि वह मध्यम परिवार से ताल्लुकात रखती हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। सीबीएससी बोर्ड से उन्होंने हाईस्कूल में 61 प्रतिशत हासिल की। इसके बाद इंटरमीडिएट फिर वर्ष 2011 में एमबीए की पढ़ाई पूरी की। फिर बंगलुरू में एक एक्सपोर्ट हाउस में नौकरी करने लगी।
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इस बीच उम्र भी निकलती जा रही थी। 2017 में उन्हें अंतिम मौका मिला। इसके बाद मैंने नौकरी छोड़ दी। फिर जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। इसके बाद 2017 बैच में 118 रैंक हासिल कर आईपीएस अफसर बन गई।
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ये कहना है आईपीएस आरती सिंह का। वर्तमान में आईपीएस आरती सिंह कमिश्नरी पुलिस में डीसीपी ट्रैफिक हैं। आरती सिंह बताती हैं कि हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा के अंक गेम भर हैं। असफलता अंत नहीं होता। संघर्ष ही जीवन का नाम है। अगर आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तो दूसरा क्यों करेगा। हार तभी होती है जब हौसला टूटता है।
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उन्होंने बताया कि वह मध्यम परिवार से ताल्लुकात रखती हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। सीबीएससी बोर्ड से उन्होंने हाईस्कूल में 61 प्रतिशत हासिल की। इसके बाद इंटरमीडिएट फिर वर्ष 2011 में एमबीए की पढ़ाई पूरी की। फिर बंगलुरू में एक एक्सपोर्ट हाउस में नौकरी करने लगी।
इस वह वर्ष 2011 से लेकर 2015 तक लगातार सिविल सर्विसेस की परीक्षा में बैठीं, लेकिन असफलता ही हाथ लगी। वर्ष 2016 में उन्हें अंतिम मौका मिलना था। लेकिन बढ़ती उम्र के चलते वह नहीं बैठ सकतीं थी।
जिसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू कर दीं और सिविल सर्विस की परीक्षा दी। जिसके बाद वह 2017 बैच की आईपीएस अफसर बन गईं।
सीख... मेहनत से पीछे न हटें
हौसला और जज्बा कभी कम नहीं होना चाहिए। मेहनत से पीछे नहीं हटें। मुकाम हर हाल में हासिल हो जाएगा।