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Kanpur News: एनआरआई सिटी के निदेशक और अधिवक्ता राकेश तिवारी के खिलाफ जारी रहेगी जांच

Wed, 18 Feb 2026 02:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 02:08 AM IST
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Investigation to continue against NRI City director and advocate Rakesh Tiwari
कानपुर। अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड और उससे जुड़े जमीन के विवाद की अग्रिम विवेचना जारी रहेगी। अधिवक्ता राकेश तिवारी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस विवेचना को नियम के विपरीत बताया गया था। हालांकि, मंगलवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विवेचना जारी रखने के आदेश दिए हैं। यह जानकारी मामले के विवेचक इंस्पेक्टर जगदीश पांडेय ने दी है।
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विवेचक ने बताया कि अग्रिम विवेचना शुरू होने के बाद बीते दिनों एनआरआई सिटी के निदेशकों और बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को बुलाकर पूछताछ की गई थी। इसके बाद इन लोगों की ओर से अग्रिम विवेचना को नियम विपरीत बताते हुए रोकने की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तारीख लगी थी। उस दिन केस की संख्या ज्यादा होने पर मामला पास ओवर हो गया। इसके बाद मंगलवार को तारीख पड़ी थी। सुनवाई में उनके अधिवक्ता ने पहली चार्जशीट लगने और विवेचना पूरी होने की बात कही थी। हालांकि, जवाब में कहा गया कि चार्जशीट दाखिल करते समय विवेचना जारी रहने की बात कही गई थी। ऐसे में कोर्ट ने पुलिस को विवेचना जारी रखने के आदेश दे दिए।
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अग्रिम जमानत अर्जी भी खारिज
विवेचक के अनुसार अधिवक्ता राकेश तिवारी और एनआरआई सिटी के निदेशकों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करने के बाद डबल बेंच वाली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। विवेचक ने कहा कि मामले की जांच के लिए जरूरत पड़ने पर अधिवक्ता और दोनों निदेशकों को बुलाकर पूछताछ की जाएगी।
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पहली चार्जशीट में ये थे आरोपी
21 दिसंबर 2021 को अधिवक्ता राजाराम वर्मा की उनके ही घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में 23 दिसंबर 2021 को राजाराम के बेटे नरेंद्र देव की ओर से हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें एनआरआई सिटी के निदेशक व राजबहादुर और दो अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। विवेचना में दिलन्याज, अंकित, रोहित और रामखिलावन का नाम सामने आने के बाद 22 मार्च 2022 को इन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। आरोपी जेल भी गए। साथ ही राजबहादुर व एनआरआई सिटी के निदेशकों के खिलाफ विवेचना जारी रखी गई थी। इसके बाद दो जून 2022 को इनके नाम हटाए गए।



बहू को बुलाने के लिए बैंक को सूचना देगी पुलिस
राजाराम की बहू रेखा वर्मा की भूमिका पूरे मामले में अहम है। उन्हाेंने ही राजाराम की हत्या के पहले और बाद में जमीन का एग्रीमेंट किया था। वह एसबीआई की मुंबई स्थित एक शाखा में कार्यरत हैं। विवेचना में जुटी पुलिस टीम जब उनके मुंबई स्थित फ्लैट पर गई थी तो वह घर पर नहीं थीं। घर पर मिली बेटी ने उनके बारे में कोई जानकारी न होने का दावा किया था। इसके बाद टीम वापस लौट आई थी। अब पुलिस उनकी बैंक शाखा को नोटिस भेजकर उन्हें शहर भेजने और जांच में सहयोग करने के लिए कहेगी।
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