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Kanpur News: जांच समिति ने एक करोड़ से अधिक की पाई वित्तीय अनियमितता
Fri, 13 Oct 2023 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 13 Oct 2023 12:17 AM IST
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल में पिछले वित्तीय वर्ष में जरूरी सामान के लिए करीब दो करोड़ से हुई खरीद के मामले में एक करोड़ से अधिक की जांच समिति ने वित्तीय अनियमितता पाई है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने क्रय समिति व आपूर्ति करने वाली फर्म पर गड़बड़ी किए जाने की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है। जांच समिति से मिली रिपोर्ट को जिलाधिकारी ने कार्रवाई के लिए शासन भेज दिया है। अब गोलमाल करने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इससे अस्पताल में खलबली मची हुई है।
जिला अस्पताल में तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजेंद्र गुप्ता ने जरूरी सामान खरीद के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में डिमांड शासन को भेजी थी। मांग के अनुरूप शासन ने करीब ढाई करोड़ का बजट जिला अस्पताल को भेजा। इसी बीच लापरवाही के चलते डाॅ. राजेंद्र गुप्ता को निलंबित कर शासन ने अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. खालिद रिजवान को चार्ज दे दिया। उनके निलंबन के बाद अस्पताल प्रशासन उक्त धनराशि में से करीब दो करोड़ रुपये में कुर्सी, मेज, चादर, व्हीलचेयर, कूलर, ओटी टेबल, डस्टबिन, ट्रॉली और लाइट सहित अन्य सामान की खरीदारी लखनऊ की एक फर्म के माध्यम से कर ली। इस बीच तत्कालीन जिलाधिकारी से कई गुना अधिक दाम पर करोड़ों की खरीद किए जाने की शिकायत हुई। इस पर एडीएम न्यायिक अमित राठौर, डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा और औषधि निरीक्षक अजय कुमार संतोषी की संयुक्त जांच टीम गठित की गई। जांच समिति ने खरीद सामग्री के बिल व उपकरणों के कीमत का कई स्तर से मिलान कराया। इसमें ऑनलाइन भी सामान की खरीद की जानकारी जुटाई। करीब एक माह तक चली जांच में जांच समिति ने पाया कि जिस सामग्री की खरीद के लिए दो करोड़ से अधिक भुगतान किया गया, उस सामान की बाजार में वास्तविक कीमत 70 से 80 लाख ही है। जांच समिति ने खरीद में एक करोड़ से अधिक वित्तीय अनियमितता बरते जाने की रिपोर्ट तैयार की। बुधवार को जांच समिति ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है। जिसमें क्रय समिति व आपूर्ति करने वाली लखनऊ की फर्म पर कार्रवाई तय माना जा रहा है।
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ऑनलाइन सामान छह हजार का भुगतान हुआ 18 हजार
जांच कर रही तीन सदस्यीय ने वित्तीय अनियमितता पकड़ने के लिए कई तरह से जानकारियां जुटाई। खरीदे गए सामान की वास्तविक कीमत जानने के लिए एमेजॉन, फ्लिप कार्ट समेत अन्य ऑनलाइन कंपनियों से जिला अस्पताल में सामान खरीद के रेट का मिलान कराया। जिसमें कई सामग्री ऐसी मिली जिसकी कीमत बाजार में छह से 10 हजार के बीच थी, मगर उसका भुगतान 18 से 25 हजार के बीच किया गया। इसी तरह जिन कुर्सी मेजों को महंगे दामों पर खरीदा गया। उनकी कीमत भी भुगतान की गई धनराशि से आधे से भी कम पाई गई है।
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एक डॉक्टर ने जताया था विरोध
क्रय समिति में शामिल एक डॉक्टर ने सामान की आपूर्ति किए जाते ही सामग्री को गुणवत्ता विहीन बताते हुए आपत्ति दर्ज कराते हुए भुगतान न करने पर सीएमएस को पत्राचार भी किया। मगर इसके बाद कुछ दिन तक फर्म को भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद फर्म को भुगतान कर दिया गया। अब मामला खुल कर सामने आया तो कई कर्मचारी अपने को बचाने में जुटे हैं।
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जिला अस्पताल में अधिक दामों पर सामान खरीद किए जाने की शासन ने रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट शासन कार्रवाई के लिए भेजी गई है। खरीद में नियमों का पालन नहीं किया गया है। सामान भी अधिक दामों पर खरीदा गया है।
- आलोक सिंह, जिलाधिकारी
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जिला अस्पताल में तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजेंद्र गुप्ता ने जरूरी सामान खरीद के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में डिमांड शासन को भेजी थी। मांग के अनुरूप शासन ने करीब ढाई करोड़ का बजट जिला अस्पताल को भेजा। इसी बीच लापरवाही के चलते डाॅ. राजेंद्र गुप्ता को निलंबित कर शासन ने अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. खालिद रिजवान को चार्ज दे दिया। उनके निलंबन के बाद अस्पताल प्रशासन उक्त धनराशि में से करीब दो करोड़ रुपये में कुर्सी, मेज, चादर, व्हीलचेयर, कूलर, ओटी टेबल, डस्टबिन, ट्रॉली और लाइट सहित अन्य सामान की खरीदारी लखनऊ की एक फर्म के माध्यम से कर ली। इस बीच तत्कालीन जिलाधिकारी से कई गुना अधिक दाम पर करोड़ों की खरीद किए जाने की शिकायत हुई। इस पर एडीएम न्यायिक अमित राठौर, डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा और औषधि निरीक्षक अजय कुमार संतोषी की संयुक्त जांच टीम गठित की गई। जांच समिति ने खरीद सामग्री के बिल व उपकरणों के कीमत का कई स्तर से मिलान कराया। इसमें ऑनलाइन भी सामान की खरीद की जानकारी जुटाई। करीब एक माह तक चली जांच में जांच समिति ने पाया कि जिस सामग्री की खरीद के लिए दो करोड़ से अधिक भुगतान किया गया, उस सामान की बाजार में वास्तविक कीमत 70 से 80 लाख ही है। जांच समिति ने खरीद में एक करोड़ से अधिक वित्तीय अनियमितता बरते जाने की रिपोर्ट तैयार की। बुधवार को जांच समिति ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है। जिसमें क्रय समिति व आपूर्ति करने वाली लखनऊ की फर्म पर कार्रवाई तय माना जा रहा है।
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ऑनलाइन सामान छह हजार का भुगतान हुआ 18 हजार
जांच कर रही तीन सदस्यीय ने वित्तीय अनियमितता पकड़ने के लिए कई तरह से जानकारियां जुटाई। खरीदे गए सामान की वास्तविक कीमत जानने के लिए एमेजॉन, फ्लिप कार्ट समेत अन्य ऑनलाइन कंपनियों से जिला अस्पताल में सामान खरीद के रेट का मिलान कराया। जिसमें कई सामग्री ऐसी मिली जिसकी कीमत बाजार में छह से 10 हजार के बीच थी, मगर उसका भुगतान 18 से 25 हजार के बीच किया गया। इसी तरह जिन कुर्सी मेजों को महंगे दामों पर खरीदा गया। उनकी कीमत भी भुगतान की गई धनराशि से आधे से भी कम पाई गई है।
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एक डॉक्टर ने जताया था विरोध
क्रय समिति में शामिल एक डॉक्टर ने सामान की आपूर्ति किए जाते ही सामग्री को गुणवत्ता विहीन बताते हुए आपत्ति दर्ज कराते हुए भुगतान न करने पर सीएमएस को पत्राचार भी किया। मगर इसके बाद कुछ दिन तक फर्म को भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद फर्म को भुगतान कर दिया गया। अब मामला खुल कर सामने आया तो कई कर्मचारी अपने को बचाने में जुटे हैं।
जिला अस्पताल में अधिक दामों पर सामान खरीद किए जाने की शासन ने रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट शासन कार्रवाई के लिए भेजी गई है। खरीद में नियमों का पालन नहीं किया गया है। सामान भी अधिक दामों पर खरीदा गया है।
- आलोक सिंह, जिलाधिकारी