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डेंगू के लक्षण वाले बुखार से मासूम की मौत
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कानपुर देहात। डेंगू के लक्षण वाले बुखार से शनिवार को एक बालिका की जिला अस्पताल में मौत हो गई। परिजन उसे हालत नाजुक होने पर सुबह ही चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। जिला चिकित्सालय के ईएमओ ने उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक के अनुसार बालिका को बुखार आने के साथ शरीर पर चकत्ते भी पड़े थे, जो डेंगू के ही लक्षण हैं।
मूसानगर निवासी हरीशंकर की बेटी आयशा साहू (6) को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिजनों ने स्थानीय निजी डॉक्टर के यहां इलाज कराया, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इधर आयशा के शरीर पर चकत्ते भी पड़ गए। शनिवार को उसकी हालत अधिक बिगड़ गई तो परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए।
वहां इमरजेंसी में मौजूद डॉ. श्रीप्रकाश ने परीक्षण के बाद बालिका को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने करीब दस दिन से बुखार आने की जानकारी दी है। इधर बेटी की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। पिता ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
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डॉक्टर ने बताया कि आयशा के शरीर पर चकत्ते पड़ गए थे। बुखार के बाद शरीर पर चकत्ते पड़ना डेंगू के लक्षण हैं। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया है। बता दें कि डेंगू से कुछ दिन पूर्व एक निजी अस्पताल कर्मी की मौत हो चुकी है। वहीं अमरौधा के कमलपुर में एक महिला ने बुखार से दम तोड़ दिया था।
मूसानगर मेें डेंगू जैसे लक्षण से मासूम की मौत की जानकारी कराई जाएगी। गांवों में कोरोना काल के दौरान बनाई गई निगरानी समितियां, एएनएम व आशा ठीक तरह से काम नहीं कर रही। जिसके कारण डेंगू, बुखार सहित अन्य संक्रामक रोग फैलने व मौत की जानकारी नहीं मिल पा रही। व्यवस्था को दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
गांवों में फिर निष्क्रिय हो गई निगरानी समितियां
कोरोना कॉल में संक्रमितों की जानकारी देने के लिए जिले की सभी 640 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों को क्रियाशील किया गया था। जिस पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर जाकर संक्रमितों को आइसोलेशट कर अन्य कार्रवाई शुरू करती। दूसरी लहर के बाद कोरोना संक्रमितों की जैसे ही रफ्तार घटी, वैसे ही निगरानी समितियां भी निष्क्रिय हो गई। जिससे गांवों में बुखार व डेंगू फैलने की जानकारी समय पर अफसरों को नहीं मिल पाती।
स्वास्थ्य कर्मी ही नहीं देते अफसरों को जानकारी
जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए विभाग के पास खुद का भारी-भरकम अमला है। जिसमें गांव-गांव तैनात करीब 1700 आशा बहुओं व एएनएम की भूमिका प्रमुख है। इनकी अधिकांश घरों में सीधी पकड़ होती है, लेकिन गांव में बुखार, डेंगू समेत अन्य संक्रामक रोग फैलने की जानकारी आशाएं भी नहीं देती। जिससे मरीज इधर-उधर इलाज कराते हैं और जान पर भी बन आती है।
कागजों में खूब मेहनत कर रही 22 टीमें
मानसूनी बारिश के बाद बुखार, डेंगू सहित अन्य संक्रामक रोगों पर रोकथाम के लिए जिले स्तर पर एसीएमओ डॉ. सुखलाल वर्मा को संक्रामक रोग का नोडल बनाया गया है।
उनकी निगरानी में मलेरिया विभाग की दो टीमों सहित सभी दस ब्लॉकों में दो-दो स्वास्थ्य टीमें गठित की गई हैं, लेकिन सबसे हैरत की बात है कि डेंगू, बुखार सहित अन्य बीमारी से मौत की जानकारी मीडिया से मिलने पर ही यह टीमें मौके पर पहुंचती हैं। अफसर व टीमें खुद से गांव जाना भी मुनासिब नहीं समझते।
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मूसानगर निवासी हरीशंकर की बेटी आयशा साहू (6) को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिजनों ने स्थानीय निजी डॉक्टर के यहां इलाज कराया, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इधर आयशा के शरीर पर चकत्ते भी पड़ गए। शनिवार को उसकी हालत अधिक बिगड़ गई तो परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए।
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वहां इमरजेंसी में मौजूद डॉ. श्रीप्रकाश ने परीक्षण के बाद बालिका को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने करीब दस दिन से बुखार आने की जानकारी दी है। इधर बेटी की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। पिता ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
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डॉक्टर ने बताया कि आयशा के शरीर पर चकत्ते पड़ गए थे। बुखार के बाद शरीर पर चकत्ते पड़ना डेंगू के लक्षण हैं। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया है। बता दें कि डेंगू से कुछ दिन पूर्व एक निजी अस्पताल कर्मी की मौत हो चुकी है। वहीं अमरौधा के कमलपुर में एक महिला ने बुखार से दम तोड़ दिया था।
मूसानगर मेें डेंगू जैसे लक्षण से मासूम की मौत की जानकारी कराई जाएगी। गांवों में कोरोना काल के दौरान बनाई गई निगरानी समितियां, एएनएम व आशा ठीक तरह से काम नहीं कर रही। जिसके कारण डेंगू, बुखार सहित अन्य संक्रामक रोग फैलने व मौत की जानकारी नहीं मिल पा रही। व्यवस्था को दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
गांवों में फिर निष्क्रिय हो गई निगरानी समितियां
कोरोना कॉल में संक्रमितों की जानकारी देने के लिए जिले की सभी 640 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों को क्रियाशील किया गया था। जिस पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर जाकर संक्रमितों को आइसोलेशट कर अन्य कार्रवाई शुरू करती। दूसरी लहर के बाद कोरोना संक्रमितों की जैसे ही रफ्तार घटी, वैसे ही निगरानी समितियां भी निष्क्रिय हो गई। जिससे गांवों में बुखार व डेंगू फैलने की जानकारी समय पर अफसरों को नहीं मिल पाती।
स्वास्थ्य कर्मी ही नहीं देते अफसरों को जानकारी
जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए विभाग के पास खुद का भारी-भरकम अमला है। जिसमें गांव-गांव तैनात करीब 1700 आशा बहुओं व एएनएम की भूमिका प्रमुख है। इनकी अधिकांश घरों में सीधी पकड़ होती है, लेकिन गांव में बुखार, डेंगू समेत अन्य संक्रामक रोग फैलने की जानकारी आशाएं भी नहीं देती। जिससे मरीज इधर-उधर इलाज कराते हैं और जान पर भी बन आती है।
कागजों में खूब मेहनत कर रही 22 टीमें
मानसूनी बारिश के बाद बुखार, डेंगू सहित अन्य संक्रामक रोगों पर रोकथाम के लिए जिले स्तर पर एसीएमओ डॉ. सुखलाल वर्मा को संक्रामक रोग का नोडल बनाया गया है।
उनकी निगरानी में मलेरिया विभाग की दो टीमों सहित सभी दस ब्लॉकों में दो-दो स्वास्थ्य टीमें गठित की गई हैं, लेकिन सबसे हैरत की बात है कि डेंगू, बुखार सहित अन्य बीमारी से मौत की जानकारी मीडिया से मिलने पर ही यह टीमें मौके पर पहुंचती हैं। अफसर व टीमें खुद से गांव जाना भी मुनासिब नहीं समझते।