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Kanpur News: सहालग से पहले महंगाई की मार, उधारी से उखड़ रहा टेंट कारोबार

Mon, 06 Apr 2026 02:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 02:19 AM IST
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Inflation hits ahead of wedding season, tent business eroding due to debt
कानपुर। शहर के टेंट कारोबारियों को सहालग सीजन में भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं। उधारी पर निर्भरता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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उत्पादों के दाम बढ़ने से बाजार में ग्राहकों की कमी हो गई है। कारोबारियों के 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फंस गई है। शहर में जूही परमपुरवा और बीएम बाजार में करीब 70 सप्लायर हैं। अन्य हिस्सों में लगभग 30 सप्लायर हैं। यहीं से पूरे प्रदेश में टेंट और सजावटी सामान की आपूर्ति होती है। टेंट का कारोबार मुख्य रूप से उधारी पर चलता है, जिससे भुगतान चक्र बाधित हो गया है।
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कुर्सी, मेज, गद्दे और कपड़े जैसे सभी आवश्यक सामानों की कीमतें बढ़ी हैं। लोहा के दाम 58 रुपये किलो से बढ़कर 65-70 रुपये किलो हो गए हैं। 25 एमएम का ईपीसी गद्दा 140 रुपये से 205-215 रुपये प्रति पीस हो गया है। लाइक्रा और ताइवान कपड़े के दाम में पांच-आठ रुपये प्रति मीटर की बढ़ोतरी हुई है। फाइबर वाली कुर्सी 240 रुपये से 320 रुपये प्रति कुर्सी हो गई है। युद्ध के चलते प्लास्टिक दाना या पेट्रो केमिकल उत्पादों की उपलब्धता कम हुई है। बढ़ी हुई लागत के कारण ग्राहकों ने खरीदारी कम कर दी है। नए ऑर्डर मिलने बंद हो गए हैं और पुराने ग्राहक भी अपनी रकम चुकाने नहीं आ रहे हैं।
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महंगे उत्पादों के कारण बाजार से ग्राहक दूर हो गए हैं। नए ऑर्डर की कमी से कारोबारियों की आय पर सीधा असर पड़ा है। पुरानी उधारी की वसूली न होने से कारोबारियों की पूंजी फंस गई है। 100 करोड़ रुपये से अधिक की यह फंसी हुई रकम बड़ी चुनौती है। 15 अप्रैल से सहालग शुरू हो रही हैं। -सुबोध चोपड़ा, चेयरमैन, कानपुर उद्योग व्यापार मंडल
उधारी और बढ़ती लागत का प्रभाव सहालगी सीजन में बंंपर कारोबार होता था। युद्ध ने पूरा कारोबार ही पलट दिया है। टेंट कारोबार की नींव उधारी पर टिकी है। नकदी प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध के चलते कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। कुर्सी, मेज, गद्दे और कपड़ों की लागत बढ़ने से कारोबारियों का झटका दे रहे हैं। -विशाल बाजपेई, टेंट कारोबारी

कारोबारियों को इस बार सहालग से बहुत उम्मीदें थी। युद्ध ने अरमानों पर पानी फेर दिया। बाहर जिलों का व्यापारी आ नहीं रहा है। लोगों को सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। लोग अपनी शादियों की तारीखें आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार अप्रैल से जून तक बंपर सहालग है। लगातार भाव बढ़ने से कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। -मनीष द्विवेदी, टेंट कारोबारी।
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