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इंडियन टी20 लीग में सट्टेबाजीः दुबई और यूएस के पांच बुकी के संपर्क में थे सटोरिये, सामने आया ये सच
Fri, 12 Apr 2019 12:03 AM IST
प्रशांत कुमार
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:03 AM IST
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सटोरियों को एसटीएफ ने किया गिरफ्तार (फाइल फोटो)
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कानपुर और वाराणसी से पकड़े गए सटोरिये दुबई व यूएस के पांच बुकी के संपर्क में थे। गिरोह का सरगना जितेंद्र शिवहरे उर्फ जीतू के मोबाइल फोन और लैपटॉप से इसका खुलासा हुआ है। मौके से बरामद चार रजिस्टरों में कानपुर शहर समेत अलग-अलग शहरों के कई बड़े लोगों के नाम भी लिखे हुए हैं। जिनमें कारोबारी, वकील, डॉक्टर भी हैं। एसटीएफ ने इनके बारे में सटोरियों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई है। टीमें लगाकर इन नामों का सत्यापन कराया जाएगा।
दस साल से अधिक समय तक दुबई में रहकर जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट खड़ा किया था। वहीं यूएस जाकर कई बड़े बुकी के साथ भी काम किया था। सूत्रों के मुताबिक सटोरियों के पास से जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उसमें दुबई व यूएस के पांच बुकी के नाम शामिल हैं।
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दस साल से अधिक समय तक दुबई में रहकर जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट खड़ा किया था। वहीं यूएस जाकर कई बड़े बुकी के साथ भी काम किया था। सूत्रों के मुताबिक सटोरियों के पास से जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उसमें दुबई व यूएस के पांच बुकी के नाम शामिल हैं।
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इसलिए ये सटोरिए ऐप का इस्तेमाल करते थे
कानपुर व वाराणसी समेत अन्य राज्यों में बैठकर इन बुकी के सहारे वह विदेश में सट्टेबाजी का खेल चला रहा था। लखनऊ एसटीएफ के सीओ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि चारों रजिस्टरों में सट्टेबाजी का लेखा जोखा लिखा हुआ है। बुकी के नाम, बेटिंग की रकम, किससे कितना लेनदेन है आदि। सट्टा खेलने के दौरान जो फौरी तौर पर जानकारी एक दूसरे से सटोरिए लेते थे वो भी इन्हीं रजिस्टरों में लिखी जाती थी।
सटोरिए लंदन के ऐप ऑरेंज के जरिए पूरा रैकेट चला रहे थे। जानकारों के मुताबिक इस ऐप के जरिए जो लोग जुड़ते थे, उनके बारे में सट्टा खिलाने वालों को पूरी जानकारी रहती थी। इससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहता था। सट्टे की वेबसाइट की अपेक्षा ऐप से सट्टा खेलना काफी सुरक्षित है। इसलिए ये सटोरिए ऐप का इस्तेमाल करते थे।
सटोरिए लंदन के ऐप ऑरेंज के जरिए पूरा रैकेट चला रहे थे। जानकारों के मुताबिक इस ऐप के जरिए जो लोग जुड़ते थे, उनके बारे में सट्टा खिलाने वालों को पूरी जानकारी रहती थी। इससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहता था। सट्टे की वेबसाइट की अपेक्षा ऐप से सट्टा खेलना काफी सुरक्षित है। इसलिए ये सटोरिए ऐप का इस्तेमाल करते थे।