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''जिला उन्नाव'' 'महीने 7' 'शव 74', बढ़ती जा रही अज्ञात शवों की संख्या, मुसीबत में लोग
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 10 Sep 2018 09:10 PM IST
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यूपी के उन्नाव जिले में प्रत्येक महीने अज्ञात शवों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस हाईवे किनारे पड़े व नहर में बहकर आने वाले शवों की पहचान नहीं करा पाती। एक शव को 72 घंटे रखने के निर्देश हैं। शव रखने का उचित प्रबंध न होने से परेशानी बढ़ती जा रही है। मुर्दाघर में दुर्गंध फैलने से वहां तैनात कर्मचारियों के अलावा आसपास रहने वाले लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
मुर्दाघर में हर महीने अज्ञात शवों की संख्या में इजाफा होता है। यह वह शव हैं जो हाईवे किनारे पड़े मिले या फिर नहर में बहकर आए। इनकी शिनाख्त नहीं हो पाई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। लखनऊ-कानपुर हाईवे के अलावा नहरों में आए दिन कोई न कोई शव मिलता ही रहता है। सूत्रों की माने तो नहरों में जो भी शव बहकर आते हैं वह अक्सर हत्या करके ही फेंके जाते हैं।
पुलिस उनका पोस्टमार्टम कराने से बचने के लिए अपने थानाक्षेत्र की सीमाएं पार कराया करती है। इससे गैर जिले के शव आकर यहां झाड़ियों में फंसते हैं। काफी दिनों के शव होने से चेहरा भी पहचान में नहीं आता। पुलिस को जब शव झाड़ियों में मिलता है तो वह निकलवाकर मुर्दाघर में रखवाती है और 72 घंटे का इंतजार करती है। डीप फ्रीजर की व्यवस्था न होने से शव सड़ा करते हैं। इससे दुर्गंध फैल जाती है।
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मुर्दाघर में हर महीने अज्ञात शवों की संख्या में इजाफा होता है। यह वह शव हैं जो हाईवे किनारे पड़े मिले या फिर नहर में बहकर आए। इनकी शिनाख्त नहीं हो पाई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। लखनऊ-कानपुर हाईवे के अलावा नहरों में आए दिन कोई न कोई शव मिलता ही रहता है। सूत्रों की माने तो नहरों में जो भी शव बहकर आते हैं वह अक्सर हत्या करके ही फेंके जाते हैं।
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पुलिस उनका पोस्टमार्टम कराने से बचने के लिए अपने थानाक्षेत्र की सीमाएं पार कराया करती है। इससे गैर जिले के शव आकर यहां झाड़ियों में फंसते हैं। काफी दिनों के शव होने से चेहरा भी पहचान में नहीं आता। पुलिस को जब शव झाड़ियों में मिलता है तो वह निकलवाकर मुर्दाघर में रखवाती है और 72 घंटे का इंतजार करती है। डीप फ्रीजर की व्यवस्था न होने से शव सड़ा करते हैं। इससे दुर्गंध फैल जाती है।
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गन शॉट से मौतों की भी बढ़ रही संख्या
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डीप फ्रिजर आया, जगह का अभाव
सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि शासन ने दो साल पहले ही डीप फ्रिजर भेज दिया था। कंपनी लगाने को भी तैयार है। लेकिन पोस्टमार्टम हाउस में उसे लगाने की जगह नहीं है। इसलिए वह नहीं लग पा रहा है। जगह के लिए जेई से कहा गया है। जैसे ही जगह की व्यवस्था होती है उसे लगवाया जाएगा।
गन शॉट से मौतों की भी बढ़ रही संख्या
अज्ञात शवों के साथ-साथ गन शाट की भी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। गन शॉट के मुर्दाघर भेजे गए शवों पर गौर किया जाए तो अभी तक गोली मारने से हुई मौत के मामले में सात शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। इसमें मार्च महीने में बांगरमऊ के बल्लापुर निवासी मुनेश्वर, अप्रैल में बांगरमऊ के ही पंचूपुरवा निवासी गोकरन, मई में बांगरमऊ के मोहल्ला गुलाम मुस्तफा निवासी शाहिद, लखनऊ की काकोरी मौरा निवाी कुमकुम, जून में सफीपुर के मिर्जापुर निवासी अभिलाष सिंह असोहा के गोकुलपुुर निवासी रामप्रसाद की गोली मारकर हत्या की गई और उनका पोस्टमार्टम कराया गया।
महीना अज्ञात शवों की संख्या
जनवरी 11
फरवरी 06
मार्च 08
अप्रैल 08
मई 13
जून 14
जुलाई 11
अगस्त 02
सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि शासन ने दो साल पहले ही डीप फ्रिजर भेज दिया था। कंपनी लगाने को भी तैयार है। लेकिन पोस्टमार्टम हाउस में उसे लगाने की जगह नहीं है। इसलिए वह नहीं लग पा रहा है। जगह के लिए जेई से कहा गया है। जैसे ही जगह की व्यवस्था होती है उसे लगवाया जाएगा।
गन शॉट से मौतों की भी बढ़ रही संख्या
अज्ञात शवों के साथ-साथ गन शाट की भी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। गन शॉट के मुर्दाघर भेजे गए शवों पर गौर किया जाए तो अभी तक गोली मारने से हुई मौत के मामले में सात शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। इसमें मार्च महीने में बांगरमऊ के बल्लापुर निवासी मुनेश्वर, अप्रैल में बांगरमऊ के ही पंचूपुरवा निवासी गोकरन, मई में बांगरमऊ के मोहल्ला गुलाम मुस्तफा निवासी शाहिद, लखनऊ की काकोरी मौरा निवाी कुमकुम, जून में सफीपुर के मिर्जापुर निवासी अभिलाष सिंह असोहा के गोकुलपुुर निवासी रामप्रसाद की गोली मारकर हत्या की गई और उनका पोस्टमार्टम कराया गया।
महीना अज्ञात शवों की संख्या
जनवरी 11
फरवरी 06
मार्च 08
अप्रैल 08
मई 13
जून 14
जुलाई 11
अगस्त 02