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इन लक्षणों को न करें अनदेखा, तेजी से बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक से मौतों का सिलसिला
Wed, 09 Jan 2019 01:08 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 09 Jan 2019 01:08 PM IST
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कानपुर में महाराजपुर के राजेश कुमार को ब्रेन अटैक पड़ने के तीसरे दिन हैलट लाया गया। जब उनका सीटी स्कैन कराया गया तो ब्रेन जगह-जगह से डैमेज होने के साथ ही पूरे सिर के अंदर खून के थक्के जम गए थे।
इन्हें न दवाओं से गलाया जा सकता था और न ही उनकी सर्जरी से कोई लाभ था। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। इसी तरह दिसबंर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में जो रोगी आए हैं, उनमें करीब 50 फीसदी की मौत हो जा रही है। हैलट के इमरजेंसी प्रभारी न्यूरो फिजिशियन डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है।
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इन्हें न दवाओं से गलाया जा सकता था और न ही उनकी सर्जरी से कोई लाभ था। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। इसी तरह दिसबंर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में जो रोगी आए हैं, उनमें करीब 50 फीसदी की मौत हो जा रही है। हैलट के इमरजेंसी प्रभारी न्यूरो फिजिशियन डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है।
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नए साल के पहले सप्ताह में हैलट में औसत छह ब्रेन अटैक के रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। इन्हें बचा पाना मुश्किल पड़ रहा है। आठ से 36 घंटे के अंदर गंभीर रोगियों की मौत हो जा रही है। अधिकांश रोगी कानपुर के आसपास के जिलों के हैं।
इनमें फतेहपुर, उन्नाव, औरैया आदि जिलों के रोगियों की संख्या अधिक है। डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि ब्रेन अटैक पड़ने पर रोगी पहले मोहल्ले के डॉक्टर के पास जाता है।
इनमें फतेहपुर, उन्नाव, औरैया आदि जिलों के रोगियों की संख्या अधिक है। डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि ब्रेन अटैक पड़ने पर रोगी पहले मोहल्ले के डॉक्टर के पास जाता है।
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इसके बाद आसपास के नर्सिंगहोम में भर्ती होता है। जब उसकी हालत और अधिक गंभीर होती है तो हैलट रिफर कर दिया जाता है। तब तक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी होती है कि जान बचाना असंभव हो जाता है।
ब्रेन अटैक के रोगियों की स्थिति के बदलते ट्रेंड पर मेडिसिन विभाग ने अध्ययन शुरू कर दिया है। विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि रोगियों की हालत और नए ट्रेंड पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
ब्रेन अटैक के रोगियों की स्थिति के बदलते ट्रेंड पर मेडिसिन विभाग ने अध्ययन शुरू कर दिया है। विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि रोगियों की हालत और नए ट्रेंड पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।