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इस दाल के हो जाओगे मुरीद, क्योंकि इसमें है कुछ खास
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 04 Mar 2017 02:11 PM IST
सार
-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर ने विज्ञानियों ने विकसित की आईपीएल 220 प्रजाति
- अरहर, चना और मटर में भी पोषक तत्व बढ़ाने की कवायद
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विस्तार
कहते हैं इस दाल को जो कोई चख लेगा वह इसका मुरीद हो जाएगा। फिर बार-बार वह इसी की मांग करेगा। दरअसल यह दाल और दालों की तरह आम दाल नहीं है। ये है सबसे खास...
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वैज्ञानिकों ने तैयार की यह उन्नत किस्म
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कानपुर के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान ने दाल की सबसे उन्नत किस्म तैयार कर ली है। यह कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। अपनी नई खोज में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर (आईआईपीआर) के विज्ञानियोें ने दालों में प्रोटीन और कैल्शियम के साथ ही जिंक, आयरन सरीखे पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने का प्रयोग तेज किया है। ऐसी एक प्रजाति मसूर की आईपीएल 220 विकसित की गई है।
इसमें जिंक और आयरन की मात्रा पहले से ज्यादा है। प्रोटीन, कैल्शियम की मात्रा पहले जैसी है। यह दाल खाने वाले व्यक्ति में खून की कमी नहीं होगी। आईआईपीआर के निदेशक प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि मसूर दाल में पहले 100 ग्राम में जिंक की मात्रा 30 मिलीग्राम थी, जो अब बढ़ाकर 55 मिलीग्राम कर दी गई है।
इसमें जिंक और आयरन की मात्रा पहले से ज्यादा है। प्रोटीन, कैल्शियम की मात्रा पहले जैसी है। यह दाल खाने वाले व्यक्ति में खून की कमी नहीं होगी। आईआईपीआर के निदेशक प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि मसूर दाल में पहले 100 ग्राम में जिंक की मात्रा 30 मिलीग्राम थी, जो अब बढ़ाकर 55 मिलीग्राम कर दी गई है।
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खून की कमी को कर देगी पूरा
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आयरन की मात्रा 40-60 मिलीग्राम से बढ़कर 75-100 मिलीग्राम कर दी गई है। आयरन से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा अच्छी रहती है जिससे खून की कमी नहीं होती जबकि जिंक से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आईपीएल 220 प्रजाति की बुआई देश के किसी भी राज्य में अक्तूबर-नवंबर में की जा सकती है।
प्रति हेक्टेयर पैदावार 10-12 कुंतल है। अरहर, चना और मटर में भी जिंक, आयरन सहित अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ फसलें ऐसी थीं जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा अच्छी पाई गई। इन फसलों का लैब में जीनोम (विशेष संरचना) बनाया गया, फिर जीन ट्रांसफर करके पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई गई।