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कानपुर में होलिका दहन के बाद सात गुना बढ़ा प्रदूषण, 379 पहुंचा एक्यूआई
Sat, 23 Mar 2019 02:09 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 23 Mar 2019 02:09 PM IST
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तेज धूप, आसमान खुला होने और बीच-बीच में बूंदाबांदी की वजह से कानपुर की हवा में काफी सुधार था। होलिका दहन (20 मार्च) के बाद प्रदूूषण में अचानक सात गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नेहरू नगर में लगे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटर में इसके 500 मीटर के दायरे में होली की रात एक बजे हवा में प्रदूषण की मात्रा 379 एक्यूआई पाई गई। हवा में प्रदूषण (पीएम 2.5) की सामान्य स्थिति 50 एक्यूआई है।
इस लिहाज से देखा जाए तो प्रदूषण की मात्रा सात गुना से अधिक रही। नेहरू नगर के आस-पास प्रदूषण की मात्रा के आधार पर शहर के अन्य क्षेत्रों में मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। जहां आवागमन ज्यादा है, वाहन ज्यादा चलते हैं, ज्यादा होलिका दहन हुआ वहां एक्यूआई 379 से 40-50 अंक ज्यादा होगा और जहां ये सब कम है, वहां कम रहा होगा।
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इस लिहाज से देखा जाए तो प्रदूषण की मात्रा सात गुना से अधिक रही। नेहरू नगर के आस-पास प्रदूषण की मात्रा के आधार पर शहर के अन्य क्षेत्रों में मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। जहां आवागमन ज्यादा है, वाहन ज्यादा चलते हैं, ज्यादा होलिका दहन हुआ वहां एक्यूआई 379 से 40-50 अंक ज्यादा होगा और जहां ये सब कम है, वहां कम रहा होगा।
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बोर्ड के अनुसार होलिका दहन से ठीक एक दिन पहले शाम सात बजे ब्रह्मनगर क्षेत्र के आसपास शाम करीब 7 बजे पहली बार हवा में प्रदूषण की मात्रा 67 एक्यूआई आ गई थी जो लगभग सामान्य स्थिति के करीब थी। कानपुर में इतनी कम एक्यूआई अभी शहरी क्षेत्र में रिकार्ड नहीं हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से प्रदूषण की मात्रा पीएम 2.5 माइक्रोग्राम में दर्ज की जाती है। जबकि मैनुअल एकत्र किए गए प्रदूषण के कणों को पीएम 10 के रूप में जांच की जाती है।
बोर्ड फिलहाल ब्रह्मनगर क्षेत्र में स्थापित मानीटर की रीडिंग के अनुसार ही पूरे शहर का अनुमान लगाता है। शहर में जो स्थान ब्रह्मनगर से कम घना है वहां पर प्रदूषण की मात्रा यहां से कम होगी। यदि अधिक घना है तो उसी मात्रा में प्रदूषण की मात्रा भी ज्यादा हो सकती है। शुक्रवार शाम 6 बजे के करीब मात्रा 78 एक्यूआई रही। दिन मेें करीब दो बजे के आसपास यह 100 एक्यूआई रिकार्ड हुई।
बोर्ड फिलहाल ब्रह्मनगर क्षेत्र में स्थापित मानीटर की रीडिंग के अनुसार ही पूरे शहर का अनुमान लगाता है। शहर में जो स्थान ब्रह्मनगर से कम घना है वहां पर प्रदूषण की मात्रा यहां से कम होगी। यदि अधिक घना है तो उसी मात्रा में प्रदूषण की मात्रा भी ज्यादा हो सकती है। शुक्रवार शाम 6 बजे के करीब मात्रा 78 एक्यूआई रही। दिन मेें करीब दो बजे के आसपास यह 100 एक्यूआई रिकार्ड हुई।
तो इस वजह से घट-बढ़ रहा एक्यूआई
मौसम विभाग के अनुसार वातावरण में इस महीने पारा सामान्य से ऊपर रहने की वजह से ऐसी स्थिति बनी है। 15 मार्च के बाद आम तौर पर अधिकतम सामान्य तापमान 30 के करीब माना जाता है लेकिन पिछले तीन दिनों से यह 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है। इसी तरह न्यूनतम सामान्य तापमान 15 होना चाहिए, जिसमें दो दिनों से दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़त चल रही है।
तापमान अधिक होने की स्थिति में हवा में प्रदूषित कण शुष्क होकर बिखर जाते हैं। यदि हल्की हवा भी रहती है तो वे अधिक संख्या में एक स्थान पर एकत्र नहीं रह पाते हैं। यही वजह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटर पर यह अंकित नहीं हो पाते हैं। इससे अलग होलिका दहन वाले दिन पूरे शहर में एक साथ होलिका जलने से उसका धुआं बड़ी मात्रा में ऊपर पहुंचकर परत की तरह जमा हो गया। इसी वजह से एक्यूआई अचानक बढ़ गया।
मौसम विभाग के अनुसार वातावरण में इस महीने पारा सामान्य से ऊपर रहने की वजह से ऐसी स्थिति बनी है। 15 मार्च के बाद आम तौर पर अधिकतम सामान्य तापमान 30 के करीब माना जाता है लेकिन पिछले तीन दिनों से यह 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है। इसी तरह न्यूनतम सामान्य तापमान 15 होना चाहिए, जिसमें दो दिनों से दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़त चल रही है।
तापमान अधिक होने की स्थिति में हवा में प्रदूषित कण शुष्क होकर बिखर जाते हैं। यदि हल्की हवा भी रहती है तो वे अधिक संख्या में एक स्थान पर एकत्र नहीं रह पाते हैं। यही वजह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटर पर यह अंकित नहीं हो पाते हैं। इससे अलग होलिका दहन वाले दिन पूरे शहर में एक साथ होलिका जलने से उसका धुआं बड़ी मात्रा में ऊपर पहुंचकर परत की तरह जमा हो गया। इसी वजह से एक्यूआई अचानक बढ़ गया।
पीएम 10 और पीएम 2.5 में अंतर
पीएम 2.5 यानि प्रति मीटर क्यूब (एक मीटर चौड़ाई, एक मीटर लंबाई, एक मीटर गहराई में) मेें 2.5 माइक्रोग्राम वजह वाले प्रदूषित कणों की मात्रा। होलिका दहन वाले दिन 2.5 माइक्रोग्राम के 379 प्रदूषित कण एक मीटर क्यूब के दायरे में पाए गए।
यही स्थिति पीएम 10 में भी होती है। पीएम 2.5 के कण ज्यादा खतरनाक होते हैं। क्योंकि यह आकार में छोटे होते हैं और शरीर के अंदर सांस के जरिए आसानी पहुंच जाते हैँ। पीएम 10 आकार में बड़ा होने की वजह से कम मात्रा में शरीर के अंदर जा पाता है।
पीएम 2.5 यानि प्रति मीटर क्यूब (एक मीटर चौड़ाई, एक मीटर लंबाई, एक मीटर गहराई में) मेें 2.5 माइक्रोग्राम वजह वाले प्रदूषित कणों की मात्रा। होलिका दहन वाले दिन 2.5 माइक्रोग्राम के 379 प्रदूषित कण एक मीटर क्यूब के दायरे में पाए गए।
यही स्थिति पीएम 10 में भी होती है। पीएम 2.5 के कण ज्यादा खतरनाक होते हैं। क्योंकि यह आकार में छोटे होते हैं और शरीर के अंदर सांस के जरिए आसानी पहुंच जाते हैँ। पीएम 10 आकार में बड़ा होने की वजह से कम मात्रा में शरीर के अंदर जा पाता है।