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आयकर-सेवाकर का नया डर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 29 Mar 2015 03:17 AM IST
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अपनी आय को कम दिखाकर टीडीएस कटौती की राशि को फर्जी तरीके से वापस लेने में फंसे तमाम केंद्रीय कर्मचारी अब रकम को लौटा रहे हैं। अब तक पकड़ में आए ऐसे लगभग तीन हजार मामलों में करीब चार करोड़ रुपये की राशि आयकर विभाग में वापस आ चुकी है।
बात केवल पैसा वापसी तक ही बनने वाली नहीं है, क्योंकि आयकर विभाग सभी मामलों को स्क्रूटनी में लेगा। इससे पहले हुए घपले भी खोले जा सकेंगे।
शहर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री, स्माल आर्म्स फैक्ट्री, ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री, पैराशूट फैक्ट्री और फील्ड गन फैक्ट्री के अलावा रेलवे, बीएसएनएल आदि के तमाम कर्मचारियों ने टीडीएस कटौती की रकम वापस पाने के लिए फर्जीवाड़ा करके अपनी निर्धारित आय को रिटर्न में कम दिखाया, जिससे कटौती की राशि रिफंड हो गई।
आयकर विभाग ने छानबीन की तो पता चला कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों की संख्या हजारों में है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने आयुध फैक्ट्री के अधिकारियों से मुलाकात करके उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी भी दी। इसके बाद सभी मामलों में नोटिस जारी किए गए तो कर्मचारियों की हालत खराब हुई।
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उन्होंने तत्काल रिफंड की राशि वापस करनी शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब चार करोड़ रुपये आयकर विभाग को अकेले आयुध फैक्ट्री के कर्मचारियों से वापस मिल चुके हैं। अन्य केंद्रीय सरकारी महकमों से हुई रकम वापसी को जोड़ा जाए तो यह रकम पांच करोड़ से भी ज्यादा हो गई है।
अब विभाग के अधिकारियों ने सभी मामलों को स्क्रूटनी में लेने के आदेश भी कर दिए हैं। इससे न केवल बीते वित्तीय वर्ष में आय और टीडीएस रिफंड की छानबीन होगी, बल्कि पूर्व के मामले भी जांचें जाएंगे। कुछ मामलों में अभियोजन की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है।
निर्माण ठेकेदार भी सेवाकर की जद में
केंद्र और राज्य के सभी विभागों में अब निर्माण या रिपेयरिंग कार्य करने वाले या लेबर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों को भी सेवाकर देना होगा। एक विशेष संशोधन करके केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर बोर्ड (सीबीईसी) ने ठेकेदारों पर सेवाकर लाद दिया है।
अब उन्हें अलग-अलग कार्य के लिए 4.8 फीसदी से लेकर 12.36 फीसदी तक टैक्स अदा करना होगा। नई दरें लागू होने के बाद अधिकतम करदेयता 14.28 फीसदी तक हो जाएगी। यह भी निर्देश हैं कि 30 अप्रैल तक रजिस्ट्रेशन न कराने की दशा में पेनाल्टी भी लगाई जाएगी।
सेवाकर सलाहकार सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक अभी तक केंद्र और राज्य सरकार के महकमों में विभिन्न प्रकार की सेवाएं देने पर सर्विस टैक्स से छूट दी जाती थी, मगर एक अप्रैल से सरकारी क्षेत्र में निर्माण, रिपेयरिंग और लेबर सप्लाई करने वालों को सेवाकर के दायरे में ला दिया गया है।
बोर्ड ने इसी सप्ताह इस संशोधन से संबंधित अधिसूचना (नंबर 25/2012) जारी करके इस छूट को समाप्त कर दिया है। जानने योग्य बात यह है कि इस संशोधन को मान्य होने के लिए बजट पास होने का भी इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।
इस संशोधन के बाद ऐसे सभी ठेकेदार जो लेबर कांट्रैक्ट पर काम करते हैं, उन्हें अपने बिल एमाउंट पर 12.36 फीसदी से सेवाकर का भुगतान करना होगा। बजट पास होने के पास यह दर बढ़कर 14.28 हो जाएगी।
वहीं ऐसे ठेकेदार जो निर्माण सामाग्री के साथ नया निर्माण कर रहे हैं उन्हें 4.8 फीसदी और पुराने काम की मरम्मत करने वालों को 8.4 फीसदी की दर से सेवाकर का भुगतान करना होगा।
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बात केवल पैसा वापसी तक ही बनने वाली नहीं है, क्योंकि आयकर विभाग सभी मामलों को स्क्रूटनी में लेगा। इससे पहले हुए घपले भी खोले जा सकेंगे।
शहर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री, स्माल आर्म्स फैक्ट्री, ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री, पैराशूट फैक्ट्री और फील्ड गन फैक्ट्री के अलावा रेलवे, बीएसएनएल आदि के तमाम कर्मचारियों ने टीडीएस कटौती की रकम वापस पाने के लिए फर्जीवाड़ा करके अपनी निर्धारित आय को रिटर्न में कम दिखाया, जिससे कटौती की राशि रिफंड हो गई।
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आयकर विभाग ने छानबीन की तो पता चला कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों की संख्या हजारों में है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने आयुध फैक्ट्री के अधिकारियों से मुलाकात करके उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी भी दी। इसके बाद सभी मामलों में नोटिस जारी किए गए तो कर्मचारियों की हालत खराब हुई।
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उन्होंने तत्काल रिफंड की राशि वापस करनी शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब चार करोड़ रुपये आयकर विभाग को अकेले आयुध फैक्ट्री के कर्मचारियों से वापस मिल चुके हैं। अन्य केंद्रीय सरकारी महकमों से हुई रकम वापसी को जोड़ा जाए तो यह रकम पांच करोड़ से भी ज्यादा हो गई है।
अब विभाग के अधिकारियों ने सभी मामलों को स्क्रूटनी में लेने के आदेश भी कर दिए हैं। इससे न केवल बीते वित्तीय वर्ष में आय और टीडीएस रिफंड की छानबीन होगी, बल्कि पूर्व के मामले भी जांचें जाएंगे। कुछ मामलों में अभियोजन की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है।
निर्माण ठेकेदार भी सेवाकर की जद में
केंद्र और राज्य के सभी विभागों में अब निर्माण या रिपेयरिंग कार्य करने वाले या लेबर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों को भी सेवाकर देना होगा। एक विशेष संशोधन करके केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर बोर्ड (सीबीईसी) ने ठेकेदारों पर सेवाकर लाद दिया है।
अब उन्हें अलग-अलग कार्य के लिए 4.8 फीसदी से लेकर 12.36 फीसदी तक टैक्स अदा करना होगा। नई दरें लागू होने के बाद अधिकतम करदेयता 14.28 फीसदी तक हो जाएगी। यह भी निर्देश हैं कि 30 अप्रैल तक रजिस्ट्रेशन न कराने की दशा में पेनाल्टी भी लगाई जाएगी।
सेवाकर सलाहकार सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक अभी तक केंद्र और राज्य सरकार के महकमों में विभिन्न प्रकार की सेवाएं देने पर सर्विस टैक्स से छूट दी जाती थी, मगर एक अप्रैल से सरकारी क्षेत्र में निर्माण, रिपेयरिंग और लेबर सप्लाई करने वालों को सेवाकर के दायरे में ला दिया गया है।
बोर्ड ने इसी सप्ताह इस संशोधन से संबंधित अधिसूचना (नंबर 25/2012) जारी करके इस छूट को समाप्त कर दिया है। जानने योग्य बात यह है कि इस संशोधन को मान्य होने के लिए बजट पास होने का भी इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।
इस संशोधन के बाद ऐसे सभी ठेकेदार जो लेबर कांट्रैक्ट पर काम करते हैं, उन्हें अपने बिल एमाउंट पर 12.36 फीसदी से सेवाकर का भुगतान करना होगा। बजट पास होने के पास यह दर बढ़कर 14.28 हो जाएगी।
वहीं ऐसे ठेकेदार जो निर्माण सामाग्री के साथ नया निर्माण कर रहे हैं उन्हें 4.8 फीसदी और पुराने काम की मरम्मत करने वालों को 8.4 फीसदी की दर से सेवाकर का भुगतान करना होगा।