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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   In order to relieve pain kidneys are deteriorating, main reason for the use of painkillers in patients

UP: दर्द दूर करने के चक्कर में गुर्दे कर रहे खराब, रोगियों में पेनकिलर का सेवन मुख्य कारण, ये जानना बेहद जरूरी

Sun, 19 Mar 2023 10:55 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 19 Mar 2023 10:55 AM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि दर्द से राहत के लिए रोगी महीनों, वर्षों दर्दनाशक दवाएं बिना सोचे-समझे खाते हैं। इससे दिक्कत आती है। दर्दनाशक दवाओं का सेवन बंद करने पर गुर्दे ठीक हो जाते हैं। दूसरी तरफ वे रोगी होते हैं जिनके गुर्दे सिकुड़ जाते हैं, उनमें सुधार नहीं होता।

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In order to relieve pain kidneys are deteriorating, main reason for the use of painkillers in patients
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कमर दर्द, घुटनों के दर्द, शरीर दर्द, सिर दर्द सरीखे तमाम दर्दों से छुटकारा पाने के लिए बिना सोचे-विचारे दर्दनाशक दवाएं ले रहे लोगों के गुर्दे खराब हो रहे हैं। पेशाब में जलन, कम पेशाब होना, चेहरे और पैरों में सूजन जैसे लक्षण उभरते हैं तो रोगी अस्पताल आते और जांच कराते हैं। तब पता चल रहा है कि दर्दनाशक सॉल्ट के सेवन गुर्दों की शामत आ गई है।

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कानपुर किडनी फाउंडेशन इस तरह के रोगियों के सैंपल सर्वे में पाया कि गुर्दा खराबी के कुल रोगियों में 11 से 12 फीसदी रोगियों को पेन किलर के कारण दिक्कत हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दर्द से राहत के लिए रोगी महीनों, वर्षों दर्दनाशक दवाएं बिना सोचे-समझे खाते हैं। इससे दिक्कत आती है। फाउंडेशन के संयोजक वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिन्हा का कहना है कि इनमें भी दो तरह के रोगी होते हैं।

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एक समूह के रोगियों में वे रोगी होते हैं जिनके दर्दनाशक दवाओं का सेवन बंद करने पर गुर्दे ठीक हो जाते हैं। दूसरी तरफ वे रोगी होते हैं जिनके गुर्दे सिकुड़ जाते हैं, उनमें सुधार नहीं होता। सर्वे में यह भी पाया गया कि रोगी अपने से मेडिकल स्टोर से दवा खरीद कर खाने लगते हैं। यह गलत है। हमेशा डॉक्टर से सलाह लेकर दवा लें। अगर गुर्दे में खराबी आ रही है तो पेन किलर का सॉल्ट बदल दिया जाता है। इससे गुर्दे का बचाव होता है। अपने मन से ओवर दि काउंटर दवाएं खरीद कर खाने से दिक्कत होती है। कुछ महीनों से लेकर वर्षों तक दर्दनाशक लेने से दिक्कत होती है।

इसलिए होती है दिक्कत
दर्दनाशक दवाओं का सॉल्ट कोशिकाओं में प्रोस्टाग्लैंडिंन नामक रसायन बनना बंद कर देता है। यह रसायन गुर्दों में खून की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे गुर्दे प्रभावित होते हैं। अधिक दिनों तक खून आपूर्ति बाधित रहने से गुर्दों में फाइबर टिश्यू का जमाव हो जाता है। इससे गुर्दे सिकुड़ने लगते हैं।

केस-एक: दादानगर के रहने वाले रामलाल (52) ने बताया कि उनके घुटनों में दर्द रहता है। हैलट ओपीडी में तीन साल से दिखा रहे हैं। डॉक्टर ने घुटना बदलने का सुझाव दिया। इतना पैसा है नहीं। दर्द की गोली से काम चला रहे थे। अब गुर्दों में खराबी आई है। सीरम क्रेटेनिन बढ़ गया। गुर्दा रोग विशेषज्ञ को दिखा रहे हैं।

केस-दो: चकेरी की सावित्री देवी (45) के पेट की दो साल पहले सर्जरी हुई थी। पेट में दर्द रहता है। वह दर्दनाशक दवा लेती हैं। चेहरे और पैर में सूजन आने के बाद मेडिसिन की ओपीडी में जांच कराई। अल्ट्रासाउंड में गुर्दे का आकार सिकुड़ा आया है। सीरम क्रेटेनिन का स्तर भी बढ़ा है। गुर्दे का इलाज कर रही हैं।

 

 

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एडवाइजरी
- दर्द नाशक डॉक्टर की सलाह पर लें।
- लंबे समय तक दर्दनाशक लेते हैं तो गुर्दों की जांच करा लें।
- ऐसे भी दर्दनाशक सॉल्ट हैं, जो गुर्दों को नुकसान नहीं पहुंचाते, उनका सेवन करें।
- दर्द किस कारण से हो रहा है उसका इलाज कराएं।
- मेडिकल स्टोर पर अपने मर्जी से दवा न लें।
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