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जगमगाए सरकारी भवन, आजादी का उत्सव आज

Sun, 15 Aug 2021 12:44 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Aug 2021 12:44 AM IST
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Illuminated government building, the celebration of independence today
कानपुर देहात। देश की आजादी का पर्व स्वतंत्रता दिवस रविवार को जिले भर में कोविड प्रोटोकॉल के बीच मनाया जाएगा। रविवार सुबह साढ़े सात बजे देशभक्ति के गीत बजाए जाएंगे। आठ बजे सरकारी व अर्ध सरकारी भवनों में ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रगान होगा।
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स्वतंत्रता दिवस का पर्व मनाने के लिए जिले में एक दिन पहले से ही तैयारी शुरू हो गई। सरकारी व अर्ध सरकारी भवनों को रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया। शाम होते ही कलक्ट्रेट, विकास भवन, पुलिस कार्यालय, जिला पंचायत, माती कचहरी, नगर पंचायत कार्यालय आदि रंग बिरंगी झालरों से रोशन हो गए। रविवार को स्कूलों व अन्य संस्थाओं में कोविड प्रोटाकॉल के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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डीएम जेपी सिंह साढ़े नौ बजे कलक्ट्रेट परिसर में पौधरोपण करेंगे। इसके पूर्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। बाद में डीएम जिला अस्पताल व वृद्धाश्रम में मरीजों को फल वितरित करेंगे।
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स्थायी तहसील भवन में 160 वर्ष बाद होगा ध्वजारोहण
शिवली। स्थायी तहसील भवन मैथा में 160 साल बाद ध्वजारोहण होगा। 1857 की क्रांति के बाद आजादी के दीवानों का प्रभाव बढ़ा तो अंग्रेजों ने दमन करने के लिए तत्कालीन शिवली तहसील को 1861 में खत्म कर दिया था। बाद में यहीं पर थाना स्थापित कर दिया था।
अंग्रेजों के जुल्म और अत्याचार की यादें शिवली-मैथा क्षेत्र में अभी भी ताजा हैं। पांच वर्ष पूर्व मैथा तहसील बनी तो अस्थायी भवन में काम काज शुरू हुआ। आजादी की 75वीं वर्ष गांठ पर पहली बार तहसील के निजी भवन में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। कानपुर के इतिहास पुस्तक में पुराने समय में अंग्रेजों द्वारा शिवली की तहसील को खत्म करने का जिक्र है।
इतिहासविद् प्रो. अनिल मिश्र ने बताया कि अंग्रेजों के विरोध के चलते तहसील खत्म की गई थी। मैथा तहसील के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि तहसील के साथ ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं।
रामजी अग्निहोत्री ने बताया कि तहसील बहाल होने से ग्रामीणों को राहत मिली है। ककरदही के कुलदीप तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की याद होगी तो तहसील का जिक्र भी होगा। रास्तपुर के दुर्गेश त्रिपाठी ने कहा कि मैथा तहसील ऐतिहासिक है।
शिलापट में लिखवाएंगे सेनानियों के नाम
शिवली। एसडीएम रामशिरोमणि ने कहा कि तहसील परिसर में शीघ्र ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का नाम लिखा शिलापट लगवाया जाएगा। इससे स्वतंत्रता सेनानियों से आने वाली पीढ़ी परिचित हो सकेंगी। (संवाद)

राममोहन का हाता है शिवली तहसील का गवाह
शिवली। कानपुर इतिहास समिति के सचिव अनूप कुमार शुक्ल के अनुसार कानपुर का राममोहन का हाता शिवली तहसील का गवाह है। तत्कालीन तहसीलदार राममोहन घोष थे। उन्होंने जमीन हड़पने के लिए किशन मोहन के नाम पर एक मौजा लिख दिया था। अंग्रेज अधिकारियों की जांच में मामला पकड़ा गया। बंगाली मोहाल (कानपुर) में राममोहन का हाता अभी भी है। (संवाद)
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