अवैध निर्माण गंगा किनारे वालाः केडीए के सभी एक्शन प्लान फेल, आंखें मूंदे रहे अफसर और होता रहा खेल
कानपुर में गंगा किनारे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के लिए केडीए की ओर से बनाए गए सभी एक्शन प्लान फेल साबित हुए हैं। केडीए ने 2008 के बाद गंगा नदी के 200 मीटर के दायरे में बने निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी 2017 में की थी। इसके लिए ऐसे निर्माणों का सर्वे भी कराया गया था। सर्वे में करीब 75 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए थे। इनके खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण अभियान का अंजाम भी केडीए की तमाम अन्य योजनाओं जैसा हुआ। तहसीलकर्मियों, सिंचाई विभाग और केडीए अभियंताओं से सेटिंग कर लोग डूब क्षेत्र में निर्माण करा रहे हैं। सिविल लाइंस जैसे पॉश एरिया में बने मकानों को फ्लैटों में बदलकर करोड़ों की कमाई हो रही है।
वर्ष 2008 में कोर्ट और फिर शासन ने भी आदेश जारी कर नदी के 200 मीटर के दायरे में आ रहे निर्माणों को गिराने और इस दायरे में कोई नक्शा पास न करने के आदेश दिए थे। इसके बाद केडीए की ओर से इस आदेश को बिल्डिंग बायलॉज में अंगीकार किया गया। 2017 में केडीए ने जाजमऊ से लेकर बिठूर तक बीते दो वर्षों में बनाए गए निर्माणों की जानकारी जुटाई थी। सिर्फ सूची ही बनी, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब नए सिरे से ड्रोन से सर्वे कराया जा रहा है।
नदी के 200 मीटर के दायरे में कानपुर जेल भी आ रही है
नदी के 200 मीटर के दायरे में कानपुर जेल भी आ रही है। जेल प्रशासन ने केडीए से जेल की जमीन लेकर इसके बदले सरसौल या माती में जमीन मांगी थी। केडीए ने जेल की जमीन पर मल्टीप्लेक्स और कामर्शियल कांप्लेक्स बनाने के लिए इस प्रस्ताव पर काम भी शुरू कर दिया था। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद केडीए ने अपने हाथ पीछे कर लिए। इसका कारण था कि करोड़ों की जमीन लेकर केडीए यहां सिर्फ पार्क ही बना सकता था।
गंगा नदी के किनारे सिविल लाइंस में बनाई जा रही दो मंजिला इमारत को जमींदोज करने पर कमिश्नर कोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है। बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन केडीए की अधिकारियों की टीम ने प्रवर्तन दस्ते के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। दोपहर तक मजदूर लगाकर इमारत को तोड़ने का काम चला।
स्टे ऑर्डर देखते ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकवा दी
दोपहर बाद निर्माणकर्ता राम कुमार सिंह के अधिवक्ता अश्विनी द्विवेदी मौके पर स्टे ऑर्डर की कॉपी लेकर पहुंचे। वहां मौजूद केडीए के ओएसडी अलोक कुमार वर्मा ने स्टे ऑर्डर देखते ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकवा दी। इसके बाद दस्ता लौट गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों को दरकिनार कर गंगा नदी के 10 मीटर के दायरे में बनाई जा रही दो-मंजिला इमारत को गिराने की कार्रवाई बुधवार को शुरू की गई थी। पहले दिन आधी से अधिक इमारत तोड़ी दी गई थी। इमारत को पूरी तरह से जमींदोज करने के लिए बृहस्पतिवार को दस्ता पहुंचा था।
अधिवक्ता अश्वनी द्विवेदी ने बताया कि इमारत की गंगा नदी से दूरी को लेकर गलत रिपोर्ट दी गई। गंगा तट के 10 मीटर के दायरे में इमारत के पिलर कैसे खड़े हो सकते हैं। केडीए ने इसका नक्शा भी पास किया है। साथ ही सुनवाई का निर्धारित मौका दिए बिना ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी गई। केडीए की इन अनियमितताओं के आधार पर कमिश्नर कोर्ट ने स्टे का ऑर्डर जारी किया है।