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Kanpur News: उत्तराखंड की खेती को उपजाऊ बनाएगा आईआईटी स्टार्टअप
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कानपुर। उत्तराखंड में फसलों का उत्पादन बढ़ाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने का जिम्मा अब आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप एलसीबी फर्टिलाइजर ने उठाया है। समझौते के तहत एलसीबी फर्टिलाइजर अब नैनो फर्टिलाइजर की मदद से जैविक खेती को बढ़ावा देकर पानी की बचत भी करेगा। पहले चरण में पांच जिलों के किसानों से नई तकनीक के साथ खेती कराई जाएगी। यह पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
उत्तराखंड में खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए अब सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। इसके तहत आईआईटी कानपुर अब उत्तराखंड में जैविक खेती को न सिर्फ बढ़ावा देगा बल्कि विभिन्न फसलों की पैदावार को बढ़ाने के साथ पानी की भी बचत कराएगा। इसके लिए संस्थान के स्टार्टअप एलसीबी फर्टिलाइजर और उत्तराखंड ग्राम विकास समिति और रूरल एंटरप्राइज एक्सिलरेशन प्रोजेक्ट (यूजीवीएस-आरईएपी) के बीच समझौता हुआ है।
एलसीबी फर्टिलाइजर के फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि कंपनी माइक्रोऑर्गेनिज्म, नैनोपार्टिकल्स और सुपर-एब्जॉर्बेंट पॉलिमर्स के उन्नत संयोजन से ऐसी खाद तैयार करती है जो मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्व उपलब्धता बढ़ाने और पानी की खपत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बार बार खाद या पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं बीज भी किसी भी तापमान को बर्दाश्त करने की क्षमता पाता है जिससे फसल खराब नहीं होती। इस खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ने के साथ पानी की 35 फीसदी बचत होती है। मिट्टी में पर्याप्त पोषणतत्व होने से फसलों की गुणवत्ता में भी 30 फीसदी से अधिक सुधार होता है। मतलब, उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन अधिक होगा। अक्षय ने बताया कि शुरुआती चरण में सरकार किसानों का एक समूह बनाएगी जो एलसीबी के विशेषज्ञों की देखरेख में खेती करेंगे।
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उत्तराखंड में खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए अब सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। इसके तहत आईआईटी कानपुर अब उत्तराखंड में जैविक खेती को न सिर्फ बढ़ावा देगा बल्कि विभिन्न फसलों की पैदावार को बढ़ाने के साथ पानी की भी बचत कराएगा। इसके लिए संस्थान के स्टार्टअप एलसीबी फर्टिलाइजर और उत्तराखंड ग्राम विकास समिति और रूरल एंटरप्राइज एक्सिलरेशन प्रोजेक्ट (यूजीवीएस-आरईएपी) के बीच समझौता हुआ है।
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एलसीबी फर्टिलाइजर के फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि कंपनी माइक्रोऑर्गेनिज्म, नैनोपार्टिकल्स और सुपर-एब्जॉर्बेंट पॉलिमर्स के उन्नत संयोजन से ऐसी खाद तैयार करती है जो मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्व उपलब्धता बढ़ाने और पानी की खपत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बार बार खाद या पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं बीज भी किसी भी तापमान को बर्दाश्त करने की क्षमता पाता है जिससे फसल खराब नहीं होती। इस खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ने के साथ पानी की 35 फीसदी बचत होती है। मिट्टी में पर्याप्त पोषणतत्व होने से फसलों की गुणवत्ता में भी 30 फीसदी से अधिक सुधार होता है। मतलब, उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन अधिक होगा। अक्षय ने बताया कि शुरुआती चरण में सरकार किसानों का एक समूह बनाएगी जो एलसीबी के विशेषज्ञों की देखरेख में खेती करेंगे।
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