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देश के टॉप-10 अमेजिंग इनोवेशन में आईआईटी कानपुर का बैंडेज, ये है खासियत
Fri, 15 Jan 2021 01:27 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 15 Jan 2021 01:27 AM IST
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर आईआईटी के संक्रमण से बचाने वाले बैंडेज के इनोवेशन को लंदन की ग्लोबल बिजनेस मैगजीन ने भारत के टॉप-10 अमेजिंग इनोवेशन में शामिल किया है। यह बैंडेज न केवल शरीर के बाहरी अंगों पर लगी हल्की चोटों को ठीक करता है, बल्कि संक्रमण से भी बचाता है।
इस बैंडेज को ई-स्पिन नैनोटेक के निदेशक डॉ. संदीप पाटिल, तुषार देशपांडे, सेंटर फॉर नैनो साइंसेज में प्रोजेक्ट एसोसिएट योगेश सिंह ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सचिव डॉ. आशुतोष शर्मा, प्रो. योगेश जोशी की देखरेख में तैयार किया है।
डॉ. संदीप ने बताया कि अभी जो बैंडेज हैं, उनमें हवा का आवागमन नहीं होता है। इससे चोट सूखने में समय लगता है और इससे फैलने वाला संक्रमण भी खत्म नहीं होता। डॉ. पाटिल ने कहा कि इस बैंडेज को पॉलीडाई मिथाइल सिलोक्सेन से तैयार किया गया है।
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इसमें हवा का वेंटीलेशन भी होता है, लेकिन वायरस और बैक्टीरिया उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। कहा कि यह बैंडेज अस्पताल पहुंचने तक ब्लड को रोकने का भी काम करेगा। तुषार पांडे का दावा है कि अतिसूक्ष्म छिद्र वाला इस तरह का बैंडेज अभी तक भारत में नहीं बना है। इसका पेटेंट भी करा लिया गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीक को मार्केट में लाने के लिए कई कंपनियों से बातचीत चल रही है। साल भर में इसके मार्केट में आने की उम्मीद है। बता दें कि इस मैगजीन में आने के लिए विभिन्न कैटेगरी में दुनिया भर से आवेदन किए जाते हैं। देश वार टॉप 10 स्टार्टअप की सूची हर साल मैगजीन जारी करती है।
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इस बैंडेज को ई-स्पिन नैनोटेक के निदेशक डॉ. संदीप पाटिल, तुषार देशपांडे, सेंटर फॉर नैनो साइंसेज में प्रोजेक्ट एसोसिएट योगेश सिंह ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सचिव डॉ. आशुतोष शर्मा, प्रो. योगेश जोशी की देखरेख में तैयार किया है।
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डॉ. संदीप ने बताया कि अभी जो बैंडेज हैं, उनमें हवा का आवागमन नहीं होता है। इससे चोट सूखने में समय लगता है और इससे फैलने वाला संक्रमण भी खत्म नहीं होता। डॉ. पाटिल ने कहा कि इस बैंडेज को पॉलीडाई मिथाइल सिलोक्सेन से तैयार किया गया है।
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इसमें हवा का वेंटीलेशन भी होता है, लेकिन वायरस और बैक्टीरिया उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। कहा कि यह बैंडेज अस्पताल पहुंचने तक ब्लड को रोकने का भी काम करेगा। तुषार पांडे का दावा है कि अतिसूक्ष्म छिद्र वाला इस तरह का बैंडेज अभी तक भारत में नहीं बना है। इसका पेटेंट भी करा लिया गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीक को मार्केट में लाने के लिए कई कंपनियों से बातचीत चल रही है। साल भर में इसके मार्केट में आने की उम्मीद है। बता दें कि इस मैगजीन में आने के लिए विभिन्न कैटेगरी में दुनिया भर से आवेदन किए जाते हैं। देश वार टॉप 10 स्टार्टअप की सूची हर साल मैगजीन जारी करती है।