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यूपी: आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र बोले- चुनावी रैलियां फूंकेंगी कोरोना पीक का बिगुल
Sun, 02 Jan 2022 11:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 02 Jan 2022 11:38 PM IST
सार
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि मॉडल के पैरामीटर की वैल्यू में तेज बदलाव दिखने लगे हैं। सभी लोगों को सुरक्षित रहने पर फोकस करना होगा।
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प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल
- फोटो : amar ujala
विस्तार
यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर आयोजित हो रहीं रैलियों से कोरोना के पीक का शंखनाद हो सकता है। यह कहना है आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल का। अपने गणितीय मॉडल सूत्र से दूसरी लहर की भयावहता का आकलन करने वाले प्रो. अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर को कोई रोक नहीं सकता है।
चुनाव हों या न हों, कोरोना की तीसरी लहर का पीक आना निश्चित है। उन्होंने कहा कि लहर की शुरुआत हो गई है। केस तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका पीक फरवरी में आएगा। कहा, अब तक के डाटा के आधार पर यह तय है कि ओमिक्रॉन कई राज्यों में पहुंच चुका है।
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि मॉडल के पैरामीटर की वैल्यू में तेज बदलाव दिखने लगे हैं। सभी लोगों को सुरक्षित रहने पर फोकस करना होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव न होने पर कुछ समय के लिए पीक टल सकता है, लेकिन पीक आएगा जरूर।
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चुनाव हों या न हों, कोरोना की तीसरी लहर का पीक आना निश्चित है। उन्होंने कहा कि लहर की शुरुआत हो गई है। केस तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका पीक फरवरी में आएगा। कहा, अब तक के डाटा के आधार पर यह तय है कि ओमिक्रॉन कई राज्यों में पहुंच चुका है।
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प्रो. अग्रवाल ने बताया कि मॉडल के पैरामीटर की वैल्यू में तेज बदलाव दिखने लगे हैं। सभी लोगों को सुरक्षित रहने पर फोकस करना होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव न होने पर कुछ समय के लिए पीक टल सकता है, लेकिन पीक आएगा जरूर।
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उन्होंने कहा कि यह वैरिएंट खतरनाक नहीं है। डेल्टा वैरिएंट फेफड़ों, दिल और लिवर को प्रभावित करता है पर ओमिक्रॉन में ऐसा नहीं है। देश में तीसरी लहर के पीक पर एक लाख लोगों पर अस्पतालों में 80 हजार बेड की जरूरत पड़ सकती है। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में तीसरी लहर आसानी से गुजर गई। वहां डेल्टा वैरिएंट के कारण अस्पतालों में भर्ती हुए लोगों के मुकाबले ओमिक्रॉन में पांच गुना कम लोग अस्पताल पहुंचे।