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प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान लगाएगा आईआईटी कानपुर, सेंटर फॉर जिओडेसी की होगी स्थापना
Wed, 04 Mar 2020 12:47 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:47 PM IST
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी कानपुर में सेंटर फॉर जिओडेसी (भूगणित या पृथ्वी की आंतरिक संरचना का आकलन) की स्थापना होगी। इसके जरिये संस्थान देशभर में समुद्री तूफान, भूकंप, ज्वालामुखी जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाकर चेतावनी जारी करेगा। अभी इसके लिए अमेरिका, जापान, जर्मनी समेत अन्य देशों की तकनीक के भरोसे इन आपदाओं का आकलन किया जा रहा है।
आईआईटी में मंगलवार को सेंटर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और भविष्य की संभावनाओं के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। उद्घाटन सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने किया। इसमें बार्क, इसरो, सर्वे ऑफ इंडिया, डीएसटी, एनपीएल समेत अन्य तकनीकी संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल हुए।
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आईआईटी में मंगलवार को सेंटर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और भविष्य की संभावनाओं के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। उद्घाटन सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने किया। इसमें बार्क, इसरो, सर्वे ऑफ इंडिया, डीएसटी, एनपीएल समेत अन्य तकनीकी संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल हुए।
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विशेषज्ञों ने बताया कि सेंटर में सभी उपकरण और तकनीक मेक इन इंडिया पर आधारित होगी। इसके लिए डीएसटी की ओर से पांच साल तक आर्थिक सहयोग मिलेगा। बुधवार तक चलने वाली कार्यशाला के नतीजों और सेंटर का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
नेशनल सेंटर के गठन में जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियो साइंस सहयोग करेगा। वहां जियोडेसी के निदेशक प्रो. हेराल्ड के निर्देशन में उपकरण तैयार किए जाएंगे। कार्यशाला में डीएसटी के नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम के वैज्ञानिक एके सिंह, नेशनल जियोडेसी प्रोग्राम के अध्यक्ष मेजर जनरल डॉ. बी नागराजन, आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, प्रो. एआर हरीश, प्रो. ओंकार दीक्षित, प्रो. सुजाता धर आदि शामिल हुए।
नेशनल सेंटर के गठन में जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियो साइंस सहयोग करेगा। वहां जियोडेसी के निदेशक प्रो. हेराल्ड के निर्देशन में उपकरण तैयार किए जाएंगे। कार्यशाला में डीएसटी के नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम के वैज्ञानिक एके सिंह, नेशनल जियोडेसी प्रोग्राम के अध्यक्ष मेजर जनरल डॉ. बी नागराजन, आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, प्रो. एआर हरीश, प्रो. ओंकार दीक्षित, प्रो. सुजाता धर आदि शामिल हुए।
नेशनल सेंटर से क्या होंगे फायदे
- एमटेक और पीएचडी छात्र जियोडेसी में शोध कर सकेंगे।
- धरती की मैपिंग करना आसान हो जाएगा।
- उपग्रह के ऑर्बिट की सही गणना के लिए दूसरे देशों से निर्भरता खत्म होगी।
- दूसरी आकाशगंगा की खोज में सहायता मिलेगी।
- एमटेक और पीएचडी छात्र जियोडेसी में शोध कर सकेंगे।
- धरती की मैपिंग करना आसान हो जाएगा।
- उपग्रह के ऑर्बिट की सही गणना के लिए दूसरे देशों से निर्भरता खत्म होगी।
- दूसरी आकाशगंगा की खोज में सहायता मिलेगी।