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खर्च नहीं कर पाए तो सरकार ले लेगी सीएसआर फंड, मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स ने जारी किए नए नियम

Sun, 24 Jan 2021 01:52 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 24 Jan 2021 01:52 AM IST
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If you are unable to spend, the government will take CSR fund, Ministry of Corporate Affairs has issued new rules
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड में अब कंपनियों का गोलमाल नहीं चल पाएगा। सरकार ने नकेल कसते हुए जो नई व्यवस्था बनाई है। उसके तहत यदि कंपनी अपने वार्षिक बजट का सीएसआर फंड नहीं खर्च कर पाती है, तो उसे सरकार की ओर से बताए गए फंड में रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस संबंध में शुक्रवार को मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स ने सीएसआर के संशोधित नियम जारी किए हैं।
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शहर में करीब पांच सौ से अधिक कंपनियां इस मद में फंड खर्च करती हैं। ऐसी कोई भी कंपनी जिसने पिछले साल में पांच करोड़ का मुनाफा कमाया है या जिसकी नेटवर्थ पांच सौ करोड़ है या सालाना टर्न ओवर एक हजार करोड़ है, उसे अपने पिछले तीन सालों के औसत मुनाफे का दो फीसदी सामाजिक दायित्वों पर खर्च करना होता है।
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कोई कंपनी पूरा खर्च नहीं कर पाती है तो उसे अपनी डायरेक्टर रिपोर्ट में इसका जिक्र करना होता है। नई व्यवस्था के तहत यदि कंपनी पूरा सीएसआर फंड नहीं खर्च कर पाती तो बची राशि को सरकार द्वारा बताए गए किसी फंड में ट्रांसफर करना होगा। यदि कंपनी वार्षिक बजट से ज्यादा खर्च करती है तो अगले तीन सालों तक उस रकम को समाहित कर सकती है।
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भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के कानपुर चैप्टर के पूर्व चेयरमैन सीए अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत ऐसी संस्थाएं जो पंजीकृत ट्रस्ट हों या सोसाइटी या चैरिटेबल उद्देश्य से बनी कंपनी हों यदि सीएसआर का काम कर रही हैं तो उन्हें सीएसआर एक फार्म फाइल करके पंजीकरण करवाना होगा। इस पंजीकरण नंबर से सीएसआर का काम कर रही कंपनियों की पहचान की जा सकेगी। इस नए फॉर्म को प्रैक्टिसिंग प्रोफेशनल से सत्यापित भी करवाना होगा।

ये नियम भी बनाए गए
- कंपनियां अब अपने सीएसआर प्रोग्राम को बनाने व विकसित कराने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था को नियुक्त कर सकती हैं।
- कंपनियां अब अकेले या दूसरी कंपनियों के साथ शामिल रूप से सीएसआर फंड खर्च कर सकती हैं। लेकिन अपने-अपने खर्च का ब्यौरा अलग-अलग देना होगा।
- कंपनी का चीफ फाइनेंसियल अफसर या फाइनेंसियल हेड साल भर हुए सीएसआर फंड के खर्चों को सत्यापित करेगा।

- सीएसआर समिति कंपनी के वार्षिक सीएसआर प्लान, बजट और उसे खर्च करने के मदों व तरीकों को बनाकर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को देगी और कंपनी उसी तरीके से सीएसआर खर्च करेगी। हालांकि जरूरी होने पर कंपनी इन मदों व तरीकों में परिवर्तन कर सकती है।
- कंपनी सीएसआर के अंतर्गत किसी संपत्ति को खरीदने या विकसित करने में कैपिटल एक्सपेंडीचर भी कर सकती है लेकिन ये संपत्ति कंपनी के नाम पर पंजीकृत नहीं होनी चाहिए।

- ऐसी कंपनियां, जिनका वार्षिक पंजीकृत खर्च पिछले तीन सालों में 10 करोड़ या उससे अधिक है, उन्हें इंपैक्ट असेसमेंट करवाना होगा।
- कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर सीएसआर पॉलिसी के साथ-साथ सीएसआर समिति का ब्यौरा भी देना होगा।
- पहली बार कंपनी द्वारा कोविड-19 की वैक्सीन से संबंधित रिसर्च पर काम किया जा रहा है तो अगले तीन वर्षों तक यह कार्य सीएसआर में शामिल किया जा सकता है। हालांकि यह रिसर्च किसी सरकारी संस्था के साथ ही होनी चाहिए।
 
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