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UP: 'DM के यहां दिखावे का जनता दर्शन, मेरे आधे दिन काम के बदले आधा वेतन...', आईएएस रिंकू सिंह का सरकार को पत्र
Mon, 20 Jul 2026 03:05 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, जालौन
अमर उजाला नेटवर्क, जालौन
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 20 Jul 2026 03:05 PM IST
सार
आईएएस रिंकू सिंह (एसडीएम न्यायिक) ने प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उपयुक्त तैनाती न मिलने तक आधे दिन काम के बदले आधा वेतन देने का अनुरोध किया है। पूरा दायित्व देने या दूसरे राज्य के कैडर में भेजने की भी मांग रखी है।
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IAS officer Rinku Singh Rahi
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही (एसडीएम न्यायिक, जालौन) ने शासन को एक पत्र भेजकर हलचल मचा दी है। इसमें उन्होंने जालौन के जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली के साथ ही जनप्रतिनधियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने जालौन के डीएम के यहां दिखावे का जनता दर्शन आयोजित करने का आरोप भी लगाया।
साथ ही आईजीआरएस और एंटी भू-माफिया संदर्भों का फर्जी निस्तारण स्वीकृत करने का दबाव बनाने की बात कही। पत्र के अनुसार, डीएम ने उन्हें एक विधायक के सामने अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकने का आदेश दिया।
राही आगे लिखते हैं कि अवैध खनन की उनकी जांच को भी लीक कर इसे विफल किया गया। इन विवादों के बीच उनका तबादला एसडीएम, जलौन पद से हटाकर एसडीएम (न्यायिक) के पद पर कर दिया गया।
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साथ ही आईजीआरएस और एंटी भू-माफिया संदर्भों का फर्जी निस्तारण स्वीकृत करने का दबाव बनाने की बात कही। पत्र के अनुसार, डीएम ने उन्हें एक विधायक के सामने अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकने का आदेश दिया।
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राही आगे लिखते हैं कि अवैध खनन की उनकी जांच को भी लीक कर इसे विफल किया गया। इन विवादों के बीच उनका तबादला एसडीएम, जलौन पद से हटाकर एसडीएम (न्यायिक) के पद पर कर दिया गया।
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उन्होंने फील्ड में उपयुक्त तैनाती न मिलने तक आधा दिवस कार्य के बदले आधा ही वेतन दिए जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन उन्हें अन्य आईएएस अधिकारियों की तरह पूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपता है तो वह पूरा दायित्व निभाने के लिए तैयार हैं।
वहीं, यदि शासन को लगता है कि उनकी कार्यशैली प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तो उनका कैडर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित कर दिया जाए। उन्होंने लिखा कि ईमानदारी से काम करने वाले अफसरों को यदि हतोत्साहित किया जाएगा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पूरी व्यवस्था पर पड़ेगा।
त्रुटि हुई तो दंडित किया जाए
राही ने शासन से अनुरोध किया है कि यदि उनसे कोई त्रुटि हुई है तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह क्षेत्र में कार्य करने के अवसर मिलें। उन्होंने उनका संवर्ग परिवर्तन की अनुमति देने का विकल्प भी रखा है।
राही ने शासन से अनुरोध किया है कि यदि उनसे कोई त्रुटि हुई है तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह क्षेत्र में कार्य करने के अवसर मिलें। उन्होंने उनका संवर्ग परिवर्तन की अनुमति देने का विकल्प भी रखा है।
राही ने पत्र में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जालौन नगर में मंत्री के नाम का प्रयोग कर अवैध कब्जे की जांच रोकने का षड्यंत्र रचा गया। मंत्री के तथाकथित संबंधी रामराजा निरंजन के शीतगृह की जांच में भी विवाद खड़ा किया गया। राजनीतिक दबाव के चलते जांच रिपोर्ट आने से पहले ही उनका तबादला न्यायिक पद पर कर दिया गया।
एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह के चेतावनी वाले पत्र पर आमने-सामने आए अफसर
नगर पालिका की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील ने एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही के उस पत्र का विस्तृत जवाब दिया है, जिसमें उनसे नगर पालिका के विभिन्न अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
नगर पालिका की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील ने एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही के उस पत्र का विस्तृत जवाब दिया है, जिसमें उनसे नगर पालिका के विभिन्न अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
ईओ ने अपने जवाब में न केवल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पर सवाल उठाए हैं, बल्कि एसडीएम न्यायिक के जांच अधिकार पर भी आपत्ति दर्ज कर दी है। उनका कहना है कि जिस प्रकरण की जांच के लिए बार बार अभिलेख मांगे जा रहे हैं, उसकी जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और शासनादेश के अनुसार श्रेणी-2 नगर पालिका की जांच एसडीएम न्यायिक नहीं, बल्कि अपर जिलाधिकारी स्तर का अधिकारी ही कर सकता है।
नगर पालिका की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पूर्व में नगर पालिका से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। उस दौरान जांच टीम को सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध करा दिए गए थे और समिति ने अपनी जांच पूरी भी कर ली थी।
ऐसे में उन्हीं अभिलेखों की दोबारा मांग किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। ईओ रामअचल कुरील ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से लगातार रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्रवाई पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर की जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से परिषद की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जांच का अधिकार किसके पास, सबसे बड़ा सवाल
जवाबी पत्र में ईओ ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा है कि उरई नगर पालिका परिषद श्रेणी-2 की नगर पालिका है। शासन के प्रावधानों के अनुसार इस श्रेणी की नगर पालिकाओं की जांच अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा कराई जानी चाहिए। ऐसे में एसडीएम न्यायिक इस मामले में जांच करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
जवाबी पत्र में ईओ ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा है कि उरई नगर पालिका परिषद श्रेणी-2 की नगर पालिका है। शासन के प्रावधानों के अनुसार इस श्रेणी की नगर पालिकाओं की जांच अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा कराई जानी चाहिए। ऐसे में एसडीएम न्यायिक इस मामले में जांच करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में जारी जांच संबंधी आदेश में अब तक कोई संशोधन या नया आदेश जारी नहीं किया गया है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में जांच की प्रक्रिया को लेकर पहले जिलाधिकारी से स्थिति स्पष्ट कराई जानी चाहिए। इसके बाद ही अभिलेख उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा सकती है।