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मानव तस्करी का मामला: ओमान में तीन बार बेची गई महिला का केस दोबारा खोलेगी क्राइम ब्रांच
Fri, 16 Apr 2021 09:55 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
Kanpur
Kanpur
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 16 Apr 2021 09:55 AM IST
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मानव तस्करी का मामला
- फोटो : pexels.com
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मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद बेकनगंज में दर्ज एक और मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने शुरू कर दी है। पकड़ा गया आरोपी मुजम्मिल उस केस में भी आरोपी है। साक्ष्य न मिलने की वजह से जांच रुकी थी।
क्राइम ब्रांच ने बेकनगंज थाने से शिकायत का पूरा ब्योरा मांगा है। विदेश मंत्रालय को इस संबंध में ई-मेल भेजकर जानकारी भी मांगी गई है। बेकनगंज निवासी महिला को नौकरी लगवाने के बहाने अक्तूबर 2019 में मुजम्मिल ने ओमान भेजा था।
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क्राइम ब्रांच ने बेकनगंज थाने से शिकायत का पूरा ब्योरा मांगा है। विदेश मंत्रालय को इस संबंध में ई-मेल भेजकर जानकारी भी मांगी गई है। बेकनगंज निवासी महिला को नौकरी लगवाने के बहाने अक्तूबर 2019 में मुजम्मिल ने ओमान भेजा था।
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वहां उसको तीन बार बेचा गया था। परिजनों की मशक्कत और विदेश मंत्रालय की मदद से वह सितंबर 2020 को भारत लौट सकी थी। इस मामले में महिला के बेटे ने मुजम्मिल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
पुलिस ने आरोपी को एक तरह से क्लीन चिट दे दी थी। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि इस मामले में विस्तार से जांच की जा रही है। पकड़े गए आरोपी मुजम्मिल और अति उर्र रहमान के बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। खातों में विदेश से पैसे आया और भेजा गया है। पांच से छह लाख रुपये हर साल आरोपी तस्करी से कमाते थे।
खाने के पैसे नहीं टूरिस्ट वीजा कैसे
मुजम्मिल और अति उर्र रहमान ऐसी महिलाओं को अपना शिकार बनाते थे जो बेहद गरीब थीं। जिनके खाने के भी लाले थे। ऐसे में उनको टूरिस्ट वीजा कैसे मिल गया। क्राइम ब्रांच इसकी पड़ताल में जुटी है। पुलिस अफसरों ने सवाल उठाया है कि जब पासपोर्ट के वक्त एलआईयू और पुलिस उनका सत्यापन करने जाती थी तो उन्होंने अपने स्तर से ये पड़ताल क्यों नहीं की। सभी महिलाओं के पासपोर्ट का भी सत्यापन कराया जा रहा है।
पुलिस ने आरोपी को एक तरह से क्लीन चिट दे दी थी। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि इस मामले में विस्तार से जांच की जा रही है। पकड़े गए आरोपी मुजम्मिल और अति उर्र रहमान के बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। खातों में विदेश से पैसे आया और भेजा गया है। पांच से छह लाख रुपये हर साल आरोपी तस्करी से कमाते थे।
खाने के पैसे नहीं टूरिस्ट वीजा कैसे
मुजम्मिल और अति उर्र रहमान ऐसी महिलाओं को अपना शिकार बनाते थे जो बेहद गरीब थीं। जिनके खाने के भी लाले थे। ऐसे में उनको टूरिस्ट वीजा कैसे मिल गया। क्राइम ब्रांच इसकी पड़ताल में जुटी है। पुलिस अफसरों ने सवाल उठाया है कि जब पासपोर्ट के वक्त एलआईयू और पुलिस उनका सत्यापन करने जाती थी तो उन्होंने अपने स्तर से ये पड़ताल क्यों नहीं की। सभी महिलाओं के पासपोर्ट का भी सत्यापन कराया जा रहा है।