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हाउस टैक्स की चार सौ लखटकिया फाइलें गायब

Wed, 04 Feb 2015 03:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Wed, 04 Feb 2015 03:16 AM IST
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House Tax missing files
नगर निगम में आपत्तियों के आधार पर हाउस टैक्स को घटाने-बढ़ाने का बड़ा गोलमाल सामने आया है। नगर आयुक्त ने सभी जोनल अफसरों से ऐसी लगभग चार सौ फाइलें तलब की हैं, जिनमें सालाना हाउस टैक्स की डिमांड एक लाख से ज्यादा है।
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कलई खुलती देख ऐसी ज्यादातर फाइलें गायब कर दी गईं। नगर आयुक्त के कई बार मांगने के बावजूद फाइलें टेबल पर नहीं भेजी गई हैं। माना जा रहा है कि हाउस टैक्स कम करके निगम को करोड़ों की क्षति पहुंचाई गई है।
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पूर्व नगर आयुक्त डीके सिंह ने जोनल अफसरों को एक लाख रुपये तक सालाना हाउस टैक्स की डिमांड से जुड़ी फाइलों में आने वाली आपत्तियों या कर निर्धारण की पावर दी थी।
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मगर जोनल अफसरों ने इससे कहीं ज्यादा राशि की फाइलों को निस्तारित कर दिया। उदाहरण के तौर पर जाजमऊ की एक टेनरी की हाउस टैक्स की डिमांड पांच लाख रुपये थी, जिसे आपत्ति के आधार पर मात्र पचास हजार रुपये में निपटा दिया गया।

सूत्रों की मानें तो ज्यादातर मामलों में ऐसी अनाप-शनाप आपत्तियों के आधार पर टैक्स घटा दिया गया, जिनका कोई आधार ही नहीं बनता। एक दो नहीं हर जोन में ऐसे दर्जनों मामले निपटाए गए।

खबर है कि सर्वाधिक मामले जोन-दो में निपटाए गए हैं, जिसमें नौबस्ता, यशोदा नगर, लाल बंगला, श्याम नगर, रूमा, चकेरी आदि क्षेत्र आते हैं। इस पूरे घपले में ज्यादातर व्यावसायिक, औद्योगिक या फिर बड़ी आवासीय संपत्तियों से जुड़ी फाइलें हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस तरह हाउस टैक्स घटाकर नगर निगम को कई करोड़ की क्षति पहुंचाने की खबर जब नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह को मिली तो उन्होंने गोपनीय जांच करवाई।

जांच में सूचना पुख्ता होने पर उन्होंने बीती 21 जनवरी को एक आदेश जारी करते हुए सभी छह जोन से 30 अगस्त 2013 के बाद की ऐसी सभी फाइलें तलब कर लीं, जिनमें एक लाख से ज्यादा के टैक्स की डिमांड की गई थी।

इसके लिए एक सप्ताह का वक्त दिया गया था। यह भी कहा गया था कि संबंधित प्रकरण को निस्तारित करने वाले अधिकारी का नाम भी बताया जाएगा।

आदेश में यह भी स्पष्ट लिखा कि एक लाख तक की सीमा के बावजूद जोनल अफसरों ने इससे ज्यादा डिमांड की फाइलों का निस्तारण किया है जो सेवा नियमों के विपरीत है।


उन्होंने जोन एक, दो और तीन की सभी फाइलों को अपर नगर आयुक्त राकेश गुप्ता और जोन चार, पांच और छह की फाइलों को अपर नगर विनोद गुप्ता के जरिए तलब की हैं।

ऐसी लगभग चार सौ फाइलों को तलब किए जाने की खबर से सभी जोन में तैनात जोनल अफसरों, कर अधीक्षकों और कर निरीक्षकों में हड़कंप मच गया।

सूत्रों की मानें तो धीरे-धीरे करके ऐसी ज्यादातर फाइलों को ही गायब कर दिया गया, जिनमें गैरवाजिब आपत्तियों के आधार पर हाउस टैक्स घटाया गया है।

इसकी बानगी इसी बात से मिलती है कि नगर आयुक्त का आदेश जारी होने को लगभग पखवाड़ा भर बीत जाने के बाद भी एक फाइल नगर आयुक्त कार्यालय को नहीं मुहैया कराई जा सकी है।
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