इत्रनगरी का सदियों पुराना इतिहास: कभी मुसाफिर रुकते थे इन इमारतों में, अब हुई खंडहर
कन्नौज जिले में जीटी रोड बनने पर जगह-जगह सड़क किनारे आरामगाह बने थे।बदलते वक्त के साथ अनदेखी से कई इमारतें बेमकसद हो गईं और अब खंडहर में बदल गई हैं।
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देश की सबसे लंबी सड़क में से एक जीटी रोड से गुजरने वाले मुसाफिरों की थकान दूर करने के लिए बने आरामगाह अब खंडहर में तब्दील हो गए हैं। 16वीं सदी में जीटी रोड के निर्माण के साथ ही बनी यह इमारतें खंडहर होने के बावजूद मजबूत बुनियाद की बदौलत आज भी शान से खड़ी हैं। सरकार के जिम्मेदारों की निगाह पड़ जाए तो काया पलट हो सकता है।
देश-दुनिया में खुशबू के लिए मशहूर कन्नौज शहर ने अपने दामन में सुनहरे इतिहास को समेटे रखा है। 1300 साल पहले यशस्वी शासक रहे सम्राट हर्षवर्धन का शासनकाल रहा हो या फिर 11वीं सदी में राजा जयचंद का शासनकाल। हर दौर में कन्नौज साम्राज्य का झंडा बुलंद रहा। उनसे जुड़ी यादों को शहर में अलग-अलग जगहों पर समेट कर रखा गया है। मुगलकाल में जब जीटी रोड का निर्माण हुआ तो इस सड़क से होकर गुजरने वाले राहगीरों को पनाह देने के लिए यहां जगह-जगह सड़क किनारे पनाहगाह बनाया गया। बेहतरीन कारीगरी और मजबूत बुनियाद वाली यह इमारतें अब खंडहर में तब्दील हो रही हैं। इनकी देखरेख न होने से इनकी रौनक खत्म हो रही है। कन्नौज शहर में जीटी रोड किनारे जगह-जगह यह इमारत दिख जाती है लेकिन अब इन इमारतों की अनदेखी हो रही है। जिम्मेदारों की अनदेखी के बावजूद इन इमारतों की बुनियाद मजबूत है। जिम्मेदारों की निगाह पड़ जाए तो यह खंडहर भी पर्यटन स्थल बन सकते हैं।
कन्नौज का इतिहास सदियों पुराना है। कभी इसका साम्राज्य देश के बड़े हिस्से तक फैला था। इसकी सरहद नेपाल से लेकर कश्मीर तक फैली थी। मगध तक विस्तार था। बदलते समय में इसका भूगोल जरूर बदला, लेकिन अहमियत कम नहीं हुई। अपने बहादुर शासकों की बदौलत इसकी गौरवगाथा अब भी लोगों की जुबान पर है। आल्हा-ऊदल जैसे योद्धाओं को पनाह देने वाले इस शहर में चीनी यात्री भी आ चुके हैं। यहां की इसी ऐतिहासिक उपलब्धी को यहां शहर के जीटी रोड किनारे बने राजकीय म्यूजियम में सहेज कर रखा गया है। इसमें कन्नौज में समय-समय पर खुदाई के दौरान निकली अगल-अलग सदी की प्राचीन मूर्तियां भी सहेज कर रखी गई हैं। सपा सरकार के दौरान बने तीन मंजिला म्यूजियम की हर मंजिल पर कन्नौज की अलग-अलग उपलब्धि को कायदे से सहेजा गया है। यहां रखी मूर्तियां सरकार की ओर से दुनिया के अलग-अलग देशों में देश की शान बढ़ा चुकी हैं। इसमें सम्राट हर्षवर्धन, राजा जयचंद के शासनकाल को मूर्तिकला से बखूबी दर्शाया गया है।
म्यूजियम का संचालन हो तो बढ़े पयर्टन
यह भी इत्तेफाक है कि कन्नौज की सदियों पुरानी विरासत को सहेजे राजकीय म्यूजियम को बनकर तैयार हुए छह साल से हो चुका है। सपा शासनकाल में इसके निर्माण के लिए अलग-अलग समय में करोड़ों का बजट जारी हुआ। इससे म्यूजियम की शानदार इमारत बनकर तैयार हुई। बावजूद इसके अब तक इसे औपचारिक रूप से संचालित नहीं किया जा सका है। हालांकि यहां रोजाना कई लोग इसका भ्रमण करने पहुंचते हैं। विदेश से आने वाले भी यहां आते हैं। म्यूजियम से जुड़े लोग कहते हैं कि औपचारिक रूप से उदघाटन होने पर यहां जरूरी स्टाफ उपलब्ध हो सकेगा। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा होगी।