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Kanpur News: पिता की कैंसर से हो गई थी माैत, दुकान भी बंद हो गई, सक्षम ने पाई 83वीं रैंक
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मां गीता के साथ सक्षम भाटिया (बाएं)।
- फोटो : संवाद
कानपुर। यूपीएससी परीक्षा में रामपुर के पटेलनगर सराय गेट स्थित सक्षम भाटिया ने 83वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने स्वरूपनगर स्थित उत्कर्ष कोचिंग से परीक्षा की तैयारी की थी। वर्ष 2021 में ब्रहमानंद डिग्री कॉलेज से विज्ञान वर्ग से स्नातक किया था। उनको तीसरे प्रयास में सफलता मिली है।
शुक्लागंज में रहकर परीक्षा की तैयारी करने वाले सक्षम ने बताया कि पिता सुनील कुमार भाटिया की छोटी सी किराना की दुकान थी। पिता को कैंसर था, उनके इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा। हालात ये हो गए थे कि आर्थिक वजह से 2006 में दुकान भी बंद करनी पड़ी। पिता की वर्ष 2007 में बीमारी से मौत हो गई। मां गीता ने घर का खर्च चलाने के लिए एक स्कूल में लाइब्रेरियन की नौकरी कर ली। 2016 में 95 फीसदी अंकों के साथ हाईस्कूल और 2018 में 98 फीसदी अंकों के साथ इंटर की परीक्षा पास की है। इंटर में उन्हाेंने सिटी में टॉप 5 में जगह बनाई थी। गुमटी नं पांच स्थित ननिहाल में उनके मामा कपिल भाटिया, पुनीत भाटिया रहते हैं। बोले कि मां, बहन साक्षी और मामा जी की वजह से आज से मुकाम हासिल कर पाया हूं।
सक्षम ने कहा कि सफलता का कोई शाॅर्टकट नहीं होता। तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस बार पढ़ने का कोई समय तय नहीं किया था। बस जब भी समय मिला पढ़ाई करने लगे। साक्षात्कार में उनसे पीएचडी विषय से जुड़े सवाल पूछे गए।
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शुक्लागंज में रहकर परीक्षा की तैयारी करने वाले सक्षम ने बताया कि पिता सुनील कुमार भाटिया की छोटी सी किराना की दुकान थी। पिता को कैंसर था, उनके इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा। हालात ये हो गए थे कि आर्थिक वजह से 2006 में दुकान भी बंद करनी पड़ी। पिता की वर्ष 2007 में बीमारी से मौत हो गई। मां गीता ने घर का खर्च चलाने के लिए एक स्कूल में लाइब्रेरियन की नौकरी कर ली। 2016 में 95 फीसदी अंकों के साथ हाईस्कूल और 2018 में 98 फीसदी अंकों के साथ इंटर की परीक्षा पास की है। इंटर में उन्हाेंने सिटी में टॉप 5 में जगह बनाई थी। गुमटी नं पांच स्थित ननिहाल में उनके मामा कपिल भाटिया, पुनीत भाटिया रहते हैं। बोले कि मां, बहन साक्षी और मामा जी की वजह से आज से मुकाम हासिल कर पाया हूं।
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सक्षम ने कहा कि सफलता का कोई शाॅर्टकट नहीं होता। तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस बार पढ़ने का कोई समय तय नहीं किया था। बस जब भी समय मिला पढ़ाई करने लगे। साक्षात्कार में उनसे पीएचडी विषय से जुड़े सवाल पूछे गए।
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