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रोजगार के अवसर भी देती है हिंदी
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कानपुर देहात। हिंदी बेहद सरल और सहज भाषा है। आम लोगों की बोलचाल की भाषा होने की वजह से इसे आसानी से लोग समझ लेते हैं। विदेशों में भी कई विश्वविद्यालय हिंदी की पढ़ाई करा रहे हैं। देश में 75 फीसदी आबादी हिंदी को अच्छे तरह से समझती है।
मातृ भाषा होने के साथ हिंदी रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराती है। युवाओं को इसे अच्छे से समझने की जरूरत है। ये बातें अकबरपुर राजकीय महाविद्यालय में अमर उजाला के तत्वाधान में आयोजित हिंदी हैं हम विषय की गोष्ठी में प्राचार्य व प्रवक्ताओं ने छात्र छात्राओं से कहीं।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भुवनेश श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी भाषा देशवासियों को दुनियां भर में सम्मान दिला रही है। अब विदेशों में भी हिंदी का डंका बजने लगा है। हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष राय ने कहा कि इंटरनेट युग में हिंदी का महत्व बढ़ा है। हिंदी वैश्विक भाषा है। इसके माध्यम से युवा अपना कॅरिअर बना सकते हैं।
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कहा कि आमतौर पर बाजार में अच्छे से समझे जाने वाली भाषा हिंदी ही है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पाद हर देश में बेच रही हैं। भारत में ग्राहक तक पहुंच बनाने के लिए हिंदी में प्रचार करना मजबूरी है। युवा ऐसी कंपनियों में जुड़कर बाजार में उत्पादों की विशेषता ग्राहकों के सामने स्थानीय भाषा में रखने के लिए काम कर सकते हैं। हर सरकारी विभाग में हिंदी टाइपिस्ट की जरूरत है।
सोशल मीडिया के युग में हिंदी पर कविताएं, रचनाएं लिखकर आसानी से पहचान बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवा हिंदी की ताकत को पहचानें। इस मौके पर डॉ. संजू, डॉ अर्चना गौर, डॉ. मीनू राजवंशी, डॉ. नीलम मौर्या, डॉ. अतुल शर्मा, डॉ. अनु बांगड़ी, अखिलेश सैनी, अंकित कुमार, राघवेंद्र सिंह, विशाल गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मातृ भाषा होने के साथ हिंदी रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराती है। युवाओं को इसे अच्छे से समझने की जरूरत है। ये बातें अकबरपुर राजकीय महाविद्यालय में अमर उजाला के तत्वाधान में आयोजित हिंदी हैं हम विषय की गोष्ठी में प्राचार्य व प्रवक्ताओं ने छात्र छात्राओं से कहीं।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भुवनेश श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी भाषा देशवासियों को दुनियां भर में सम्मान दिला रही है। अब विदेशों में भी हिंदी का डंका बजने लगा है। हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष राय ने कहा कि इंटरनेट युग में हिंदी का महत्व बढ़ा है। हिंदी वैश्विक भाषा है। इसके माध्यम से युवा अपना कॅरिअर बना सकते हैं।
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कहा कि आमतौर पर बाजार में अच्छे से समझे जाने वाली भाषा हिंदी ही है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पाद हर देश में बेच रही हैं। भारत में ग्राहक तक पहुंच बनाने के लिए हिंदी में प्रचार करना मजबूरी है। युवा ऐसी कंपनियों में जुड़कर बाजार में उत्पादों की विशेषता ग्राहकों के सामने स्थानीय भाषा में रखने के लिए काम कर सकते हैं। हर सरकारी विभाग में हिंदी टाइपिस्ट की जरूरत है।
सोशल मीडिया के युग में हिंदी पर कविताएं, रचनाएं लिखकर आसानी से पहचान बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवा हिंदी की ताकत को पहचानें। इस मौके पर डॉ. संजू, डॉ अर्चना गौर, डॉ. मीनू राजवंशी, डॉ. नीलम मौर्या, डॉ. अतुल शर्मा, डॉ. अनु बांगड़ी, अखिलेश सैनी, अंकित कुमार, राघवेंद्र सिंह, विशाल गुप्ता आदि मौजूद रहे।