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Kanpur News: बिना मेडिकल स्टोर खोले ही दवाओं की खरीदारी कर बेचता रहा
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कानपुर। महाराजपुर स्थित मां दुर्गा मेडिकोज के संचालक रोहन पचौरी ने अपनी फर्म मेसर्स मां दुर्गा मेडिकोज के जरिये लखनऊ के आरपिक फार्मास्यूटिकल से दो लाख 20 हजार 586 कोडीन सिरप की बोतलों की खरीदारी की। मेडिकल स्टोर खोले बिना ही दवाओं की खरीदारी कर उन्हें बेचता रहा। विभाग ने 31 अक्तूबर 2025 को तहरीर दी जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की जांच शुरू की। अब जाकर रोहन पचौरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
रोहन ने मेडिकल स्टोर के लिए जिस दुकान को किराये पर लिया था वहां कभी मेडिकल स्टोर का संचालन किया ही नहीं। नशीली दवाओं को एक जगह से खरीदकर दूसरी जगह बेचता रहा। ड्रग विभाग को इसका पता तब चला जब लक्ष्मी फार्मा के संचालक राहुल अग्रवाल की फर्म में पंजाब से पुलिस छानबीन करने पहुंची। यहीं से रोहन पचौरी के नशीली दवाओं को बेचने के कुछ सुबूत मिले जिसके बाद टीम ने जांच की और सच्चाई सामने आई। 12 अक्तूबर को औरैया ड्रग इंस्पेक्टर ज्योत्सना आनंद और कानपुर से ओमपाल सिंह ने निरीक्षण किया। मौके पर दुकान बंद मिली। मकान मालिक अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दुकान किराये पर ली थी लेकिन मेडिकल स्टोर कभी संचालित नहीं किया गया। एग्रीमेंट पूरा होने पर दुकान में ताला डाल दिया। मेडिकल स्टोर बंद करने की सूचना भी रोहन ने ड्रग विभाग को नहीं दी।
ऑन रिकॉर्ड उसकी ओर से दवाओं की खरीद फरोख्त की जा रही थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर रोहन को फोन लगाया तो उसने कहा कि वो शहर में नहीं है। वो दोबारा कभी मिलने नहीं आया। उसने ड्रग विभाग को लाइसेंस देते समय फीलखाना स्थित जहां अपना घर बताया था वो भी फर्जी निकला। उसका फोन भी बंद जा रहा था। ड्रग विभाग के अधिकारियों के अनुसार वे अभी भी राहुल अग्रवाल, वर्तिका अग्रवाल और रोहन पचौरी के बीच के कनेक्शन की जांच कर रहे हैं और इसकी सूचना पुलिस को भी दी है।
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थोक दवा व्यापारियों के अनुसार महाराजपुर स्थित मां दुर्गा मेडिकल स्टोर में नशीले कफ सिरप खरीदे जाने के शक में छापा मारा गया था वो किसी बड़े दवा के सप्लायर से जुड़ा है। यहां जिस रोहन पचौरी के नाम से लाइसेंस है वो इसे खुद नहीं चला रहा है। व्यापारियों के अनुसार रोहन सीसी कैमरे लगाने का काम करता था। वो दवा कैसे बेच रहा था। उसे मेडिकल स्टोर का लाइसेंस कैसे मिल गया ये सवाल ड्रग विभाग से किया जाना चाहिए। एक मामला तो पंजाब पुलिस की वजह से खुल गया लेकिन इस तरह के कई मामले शहर में हैं उन्हें अब तक नहीं पकड़ा गया है।
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रोहन ने मेडिकल स्टोर के लिए जिस दुकान को किराये पर लिया था वहां कभी मेडिकल स्टोर का संचालन किया ही नहीं। नशीली दवाओं को एक जगह से खरीदकर दूसरी जगह बेचता रहा। ड्रग विभाग को इसका पता तब चला जब लक्ष्मी फार्मा के संचालक राहुल अग्रवाल की फर्म में पंजाब से पुलिस छानबीन करने पहुंची। यहीं से रोहन पचौरी के नशीली दवाओं को बेचने के कुछ सुबूत मिले जिसके बाद टीम ने जांच की और सच्चाई सामने आई। 12 अक्तूबर को औरैया ड्रग इंस्पेक्टर ज्योत्सना आनंद और कानपुर से ओमपाल सिंह ने निरीक्षण किया। मौके पर दुकान बंद मिली। मकान मालिक अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दुकान किराये पर ली थी लेकिन मेडिकल स्टोर कभी संचालित नहीं किया गया। एग्रीमेंट पूरा होने पर दुकान में ताला डाल दिया। मेडिकल स्टोर बंद करने की सूचना भी रोहन ने ड्रग विभाग को नहीं दी।
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ऑन रिकॉर्ड उसकी ओर से दवाओं की खरीद फरोख्त की जा रही थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर रोहन को फोन लगाया तो उसने कहा कि वो शहर में नहीं है। वो दोबारा कभी मिलने नहीं आया। उसने ड्रग विभाग को लाइसेंस देते समय फीलखाना स्थित जहां अपना घर बताया था वो भी फर्जी निकला। उसका फोन भी बंद जा रहा था। ड्रग विभाग के अधिकारियों के अनुसार वे अभी भी राहुल अग्रवाल, वर्तिका अग्रवाल और रोहन पचौरी के बीच के कनेक्शन की जांच कर रहे हैं और इसकी सूचना पुलिस को भी दी है।
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थोक दवा व्यापारियों के अनुसार महाराजपुर स्थित मां दुर्गा मेडिकल स्टोर में नशीले कफ सिरप खरीदे जाने के शक में छापा मारा गया था वो किसी बड़े दवा के सप्लायर से जुड़ा है। यहां जिस रोहन पचौरी के नाम से लाइसेंस है वो इसे खुद नहीं चला रहा है। व्यापारियों के अनुसार रोहन सीसी कैमरे लगाने का काम करता था। वो दवा कैसे बेच रहा था। उसे मेडिकल स्टोर का लाइसेंस कैसे मिल गया ये सवाल ड्रग विभाग से किया जाना चाहिए। एक मामला तो पंजाब पुलिस की वजह से खुल गया लेकिन इस तरह के कई मामले शहर में हैं उन्हें अब तक नहीं पकड़ा गया है।