Innovation in Paint: काजू के छिलके से बनेगा पेंट, अन्य पेंट के मुकाबले 25 फीसदी टिकाऊ, 30 फीसदी सस्ता भी
एचबीटीयू के छात्र ने प्रोफेसर की देखरेख में एमटेक छात्र पेंट तैयार कर रहा है। यह पेंट काजू के छिलके से बनेगा, जो पानी में भी घुलेगा। साथ ही, अन्य पेंट के मुकाबले 25 फीसदी टिकाऊ और 30 फीसदी सस्ता भी होगा।
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काजू के छिलके से अब पेंट बनाया जाएगा। यह रिसर्च हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के छात्र सहेज धीर ने की है। पेंट टेक्नोलॉजी से सेवानिवृत्त प्रो. प्रमोद कुमार और विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण मैथानी के निर्देशन में इस तकनीक को बनाने में सफलता हासिल की है।
एचबीटीयू की लैब में इसकी टेस्टिंग हो चुकी है। बाजार में मिलने वाले पेंट में स्प्रिट मिलाकर उसे इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन एचबीटीयू की ओर से तैयार किए जा रहे इस पेंट को पानी के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा। पानी के साथ इसका इस्तेमाल होता है या नहीं इसका लैब में प्रशिक्षण होना बाकी है।
पेंट टेक्नोलाजी से एमटेक कर रहे सर्वोदय नगर निवासी छात्र सहज धीर ने बताया कि काजू के छिलके से काजू नट शेल लिक्विड (सीएनएसएल) निकलता है। इस तेल में कार्डानाल, कार्डाल और एनाकार्डिक एसिड नामक रसायन होते हैं। कार्डानाल रसायन की मात्रा ज्यादा होती है, जिसका इस्तेमाल करके फिनालिक रेजिन बनाया जाता है।
फिनालिक रेजिन में पेंट के दूसरे पदार्थों को बांधने की शक्ति होती है। सहज ने बताया कि कार्डानाल में फिनाल रसायन और हाइड्राक्सिल का संयोजन होता है, इसीलिए इसे पानी में घुलनशील बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पेंट खराब होने के कारण सूर्य की किरणें और पानी होता है।
काजू के छिलके से बनने वाला पेंट पानी और जंग प्रतिरोधी है। साथ ही यह इको फ्रेंडली है।इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले पेंट को इससे बदला जा सकता है। कार में इस्तेमाल होने वाले प्राइमर में भी इसका इस्तेमाल होता है। वर्तमान में सभी पेंट में स्प्रिट मिलाई जाती है।
25 फीसदी टिकाऊ, 30 फीसदी सस्ता
काजू के छिलके से बनने वाला पेंट अन्य के मुकाबले 25 फीसदी अधिक टिकाऊ और 30 फीसदी अधिक सस्ता है। वर्तमान के पेंट्स में पेट्रोलियम आधारित पदार्थों का इस्तेमाल होता है, जो काफी महंगा पड़ता है। काजू के छिलके से तैयार होने वाला पेंट पानी में घुलनशील होने के कारण इसका इस्तेमाल भी आसानी से कम कीमत पर हो सकेगा।
पेंट टेक्नोलाजी के विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण मैथानी ने बताया कि इसकी एक बड़ी खामी है कि इससे केवल गहरे रंग ही तैयार किए जाते हैं। इससे हल्का रंग नहीं तैयार किया गया है। हालांकि इस पर भी रिसर्च चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही हल्के रंग भी तैयार हो सकेंगे।