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Kanpur News: हवा की नमी से बिजली बनाएगी एचबीटीयू की डिवाइस
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कानपुर। एचबीटीयू ने हवा में मौजूद नमी से बिजली बनाने वाली तकनीक विकसित की है। संस्थान के दो शिक्षकों, चार पीएचडी शोधार्थियों और प्रोजेक्ट विद्यार्थियों की इस हाइड्रोजेल आधारित थर्मोइलेक्ट्रिक डिवाइस को 20 साल के लिए यूटिलिटी पेटेंट मिला है। यह तकनीक कम बिजली में चलने वाले वेअरेबल और आईओटी उपकरणों के लिए उपयोगी हो सकती है।
विवि को 15 अक्तूबर को भारत सरकार से इसका पेटेंट मिल गया है। एचबीटीयू के डॉ. एसवीएआर शास्त्री की अगुवाई में डॉ. श्रवण कुमार, मानसी तिवारी, स्वाति पटेल, पूजा सिंह व काजल सिंह ने यह तकनीक विकसित की है। डॉ. शास्त्री ने बताया कि इस डिवाइस की खास बात यह है कि बिजली बनाने के लिए किसी बाहरी गर्मी या धूप की जरूरत नहीं होगी। डिवाइस में एक जेल जैसा पदार्थ इस्तेमाल किया गया है जो हवा से नमी सोखता है।
इसके ऊपरी हिस्से से पानी धीरे-धीरे भाप बनकर बाहर निकलता रहता है जबकि निचला हिस्सा बंद रहता है। इससे डिवाइस के अंदर नमी और तापमान का अंतर बनता है। इस अंतर के कारण जेल के अंदर मौजूद छोटे-छोटे आयन एक दिशा में जाने लगते हैं। इनकी गति से विद्युत ऊर्जा पैदा होती है। यह डिवाइस हवा की नमी को बिजली में बदलने का काम करती है। इससे बहुत अधिक बिजली नहीं बनेगी लेकिन कम ऊर्जा में चलने वाले उपकरणों के लिए यह उपयोगी हो सकती है। इसका इस्तेमाल शरीर पर पहने जाने वाले सेंसर, स्वास्थ्य जांच में इस्तेमाल होने वाले बाॅयोसेंसर, ब्लूटूथ बीकन और अन्य छोटे आईओटी उपकरणों में किया जा सकता है। एक सेल से करीब 0.5 से एक वोल्ट से अधिक तक का वोल्टेज मिलने की क्षमता बताई गई है।
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बैटरी पर निर्भरता घटाने की उम्मीद
इस तकनीक का बड़ा फायदा भविष्य में छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी पर निर्भरता कम करना हो सकता है। खासकर ऐसे सेंसर और आईओटी उपकरण, जिन्हें बहुत कम ऊर्जा की जरूरत होती है, उन्हें लगातार ऊर्जा उपलब्ध कराने में यह तकनीक काम आ सकती है। हालांकि अभी अत्यधिक सूखे मौसम में इसकी क्षमता में कमी आने की चुनौती है। इसके बावजूद लंबे समय तक खुद ऊर्जा पैदा करने वाले उपकरणों के विकास की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
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विवि को 15 अक्तूबर को भारत सरकार से इसका पेटेंट मिल गया है। एचबीटीयू के डॉ. एसवीएआर शास्त्री की अगुवाई में डॉ. श्रवण कुमार, मानसी तिवारी, स्वाति पटेल, पूजा सिंह व काजल सिंह ने यह तकनीक विकसित की है। डॉ. शास्त्री ने बताया कि इस डिवाइस की खास बात यह है कि बिजली बनाने के लिए किसी बाहरी गर्मी या धूप की जरूरत नहीं होगी। डिवाइस में एक जेल जैसा पदार्थ इस्तेमाल किया गया है जो हवा से नमी सोखता है।
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इसके ऊपरी हिस्से से पानी धीरे-धीरे भाप बनकर बाहर निकलता रहता है जबकि निचला हिस्सा बंद रहता है। इससे डिवाइस के अंदर नमी और तापमान का अंतर बनता है। इस अंतर के कारण जेल के अंदर मौजूद छोटे-छोटे आयन एक दिशा में जाने लगते हैं। इनकी गति से विद्युत ऊर्जा पैदा होती है। यह डिवाइस हवा की नमी को बिजली में बदलने का काम करती है। इससे बहुत अधिक बिजली नहीं बनेगी लेकिन कम ऊर्जा में चलने वाले उपकरणों के लिए यह उपयोगी हो सकती है। इसका इस्तेमाल शरीर पर पहने जाने वाले सेंसर, स्वास्थ्य जांच में इस्तेमाल होने वाले बाॅयोसेंसर, ब्लूटूथ बीकन और अन्य छोटे आईओटी उपकरणों में किया जा सकता है। एक सेल से करीब 0.5 से एक वोल्ट से अधिक तक का वोल्टेज मिलने की क्षमता बताई गई है।
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बैटरी पर निर्भरता घटाने की उम्मीद
इस तकनीक का बड़ा फायदा भविष्य में छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी पर निर्भरता कम करना हो सकता है। खासकर ऐसे सेंसर और आईओटी उपकरण, जिन्हें बहुत कम ऊर्जा की जरूरत होती है, उन्हें लगातार ऊर्जा उपलब्ध कराने में यह तकनीक काम आ सकती है। हालांकि अभी अत्यधिक सूखे मौसम में इसकी क्षमता में कमी आने की चुनौती है। इसके बावजूद लंबे समय तक खुद ऊर्जा पैदा करने वाले उपकरणों के विकास की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।