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अफसरशाही खत्म करें प्रधानमंत्री मोदी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 30 Nov 2014 03:47 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इंडिया नारा दिया है। लेकिन वह तभी पूरा हो सकेगा जब देश-प्रदेश में सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म किया जाए।
सरकारी अफसर आज भी अपनी अफसरशाही दिखाते हैं। एक छोटा सरकारी कर्मचारी भी आम आदमी से अच्छे तरीके से बात नहीं करता।
यदि मोदी इसमें बदलाव कर सकने में सफल रहे तो ही देश की तस्वीर बदल सकती है।
1980 में 8 डालर लेकर अमेरिका गए एचबीटीआई 1975 बैच के पूर्व छात्र और अमेरिका-यूरोप में प्लास्टिक की दिग्गज कंपनी जीपीएम के प्रेसिडेंट योगेश गोयल ने एल्युमनाई एसोसिएशन, एचबीटीआई के 10वें पूर्व छात्र सम्मेलन में अपने अनुभव साझा करते हुए यह बातें कही।
वहीं इससे पहले 1947 बैच के वयोवृद्घ प्रोफेसर सहित तीन पूर्व छात्रोें को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
गोयल ने बताया कि 2009 में उन्होंने राजस्थान के भिवाड़ी में 15 करोड़ रुपये की लागत से फैक्ट्री लगाई थी। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की रोज-रोज की किचकिच कि यह मानक नहीं पूरा, इस कानून का पालन नहीं किया के बाद 2012 में कंपनी को बंद कर दिया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया की बात कर रहे हैं यदि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाई जाए।
उनके कामकाज का तरीका सुधरे तो देश में मेक इन इंडिया का माहौल बन सकता है। बताया कि उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 8-10 मिलियन डालर है।
1947 बैच के छात्र रहे और पूर्व प्रोफेसर एचबीटीआई गणेश चंद्रा ने बताया कि आजादी के समय और आज की पीढ़ी में काफी अंतर है।
पहले छात्र शिक्षकों का सम्मान करते थे। अनुशासन मानते थे, लेकिन अब सब पुरानी बातें हो गई हैं। इसके अलावा पहले के टीचर छात्रों को पढ़ाने के लिए हॉस्टल तक से खींच लाते थे।
लेकिन अब तो यह संभव नही है। उन्होंने बताया कि एचबीटीआई में पहले इंजीनियरिंग सिर्फ सब्जेक्ट होता था। अब इंजीनियरिंग की डिग्री कई साल में पूरी हो पाती है।
साथ ही पुरानी यादों में बताया कि आजादी के बाद देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एचबीटीआई का विजिट किया था।
साथ ही युवा पीढ़ी को संस्कारी और अनुशासन बढ़ाने के लिए अभिभावकों को अपनी भूमिका में बदलाव लाने की बात बताई।
वहीं 1975 बैच के पूर्व छात्र और अमेरिका में रिसर्च कंपनी चला रहे राजन कृष्णा ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि देश की इकोनॉमी कृषि आधारित है।
लेकिन इसे अब एग्रो-इंडस्ट्री से जोड़कर देखने की जरूरत है। इसके अलावा देश में एग्रो वेस्ट मैटीरियल से उत्पाद तैयार करने पर रिसर्च करने की जरूरत है ताकि एग्रो इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिल सके।
इससे पहले दो दिन तक चलने वाले पूर्व छात्र सम्मेलन का उद्घाटन कानपुर स्थित प्लास्टीपैक लिमिटेड कंपनी के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम नौकरी ढूढंने के बजाय नौकरी देने पर ध्यान दें। उत्पादकता को कानपुर समेत देश भर में बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
इसके अलावा वक्ताओं ने एसोसिएशन के साथ नए छात्रों को जोड़कर मिलजुल कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
इस दौरान वयोवृद्घ प्रोफेसर गणेश चंद्रा, निदेशक गेल डा. आशुतोष कर्नाटक, पूर्व चेयरपर्सन बैंक आफ बड़ौदा डा.एके खंडेलवाल को स्मृति चिन्ह, शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
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सरकारी अफसर आज भी अपनी अफसरशाही दिखाते हैं। एक छोटा सरकारी कर्मचारी भी आम आदमी से अच्छे तरीके से बात नहीं करता।
यदि मोदी इसमें बदलाव कर सकने में सफल रहे तो ही देश की तस्वीर बदल सकती है।
1980 में 8 डालर लेकर अमेरिका गए एचबीटीआई 1975 बैच के पूर्व छात्र और अमेरिका-यूरोप में प्लास्टिक की दिग्गज कंपनी जीपीएम के प्रेसिडेंट योगेश गोयल ने एल्युमनाई एसोसिएशन, एचबीटीआई के 10वें पूर्व छात्र सम्मेलन में अपने अनुभव साझा करते हुए यह बातें कही।
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वहीं इससे पहले 1947 बैच के वयोवृद्घ प्रोफेसर सहित तीन पूर्व छात्रोें को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
गोयल ने बताया कि 2009 में उन्होंने राजस्थान के भिवाड़ी में 15 करोड़ रुपये की लागत से फैक्ट्री लगाई थी। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की रोज-रोज की किचकिच कि यह मानक नहीं पूरा, इस कानून का पालन नहीं किया के बाद 2012 में कंपनी को बंद कर दिया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया की बात कर रहे हैं यदि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाई जाए।
उनके कामकाज का तरीका सुधरे तो देश में मेक इन इंडिया का माहौल बन सकता है। बताया कि उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 8-10 मिलियन डालर है।
1947 बैच के छात्र रहे और पूर्व प्रोफेसर एचबीटीआई गणेश चंद्रा ने बताया कि आजादी के समय और आज की पीढ़ी में काफी अंतर है।
पहले छात्र शिक्षकों का सम्मान करते थे। अनुशासन मानते थे, लेकिन अब सब पुरानी बातें हो गई हैं। इसके अलावा पहले के टीचर छात्रों को पढ़ाने के लिए हॉस्टल तक से खींच लाते थे।
लेकिन अब तो यह संभव नही है। उन्होंने बताया कि एचबीटीआई में पहले इंजीनियरिंग सिर्फ सब्जेक्ट होता था। अब इंजीनियरिंग की डिग्री कई साल में पूरी हो पाती है।
साथ ही पुरानी यादों में बताया कि आजादी के बाद देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एचबीटीआई का विजिट किया था।
साथ ही युवा पीढ़ी को संस्कारी और अनुशासन बढ़ाने के लिए अभिभावकों को अपनी भूमिका में बदलाव लाने की बात बताई।
वहीं 1975 बैच के पूर्व छात्र और अमेरिका में रिसर्च कंपनी चला रहे राजन कृष्णा ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि देश की इकोनॉमी कृषि आधारित है।
लेकिन इसे अब एग्रो-इंडस्ट्री से जोड़कर देखने की जरूरत है। इसके अलावा देश में एग्रो वेस्ट मैटीरियल से उत्पाद तैयार करने पर रिसर्च करने की जरूरत है ताकि एग्रो इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिल सके।
इससे पहले दो दिन तक चलने वाले पूर्व छात्र सम्मेलन का उद्घाटन कानपुर स्थित प्लास्टीपैक लिमिटेड कंपनी के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम नौकरी ढूढंने के बजाय नौकरी देने पर ध्यान दें। उत्पादकता को कानपुर समेत देश भर में बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
इसके अलावा वक्ताओं ने एसोसिएशन के साथ नए छात्रों को जोड़कर मिलजुल कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
इस दौरान वयोवृद्घ प्रोफेसर गणेश चंद्रा, निदेशक गेल डा. आशुतोष कर्नाटक, पूर्व चेयरपर्सन बैंक आफ बड़ौदा डा.एके खंडेलवाल को स्मृति चिन्ह, शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।