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गर्भवतियों के लिए कोरोना कवच बना हारमोंस चक्र, कोरोना पॉजीटिव तीन सौ गर्भवतियों में सिर्फ की एक मौत हुई
Mon, 08 Mar 2021 11:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 08 Mar 2021 11:28 PM IST
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गर्भवती महिला
- फोटो : pixabay
गर्भवतियों का हारमोंस चक्र कोरोना से बचाव में उनके लिए कवच बन गया। संक्रमण हुआ जरूर लेकिन चक्र ने बचा लिया। इनमें कुछ गर्भवती ऐसी भी रही हैं जो कोमॉर्बिड (कई रोगों से ग्रस्त) थीं। उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और सांस की दिक्कत भी रही है। फिर भी सुरक्षित प्रसव हुआ तथा जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहे।
तीन सौ कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ लेकिन सिर्फ एक मौत हुई। इससे संबंधी रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और शासन को भेजी है। स्त्री रोग विभाग के हैलट परिसर स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल में इन कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ।
इनमें सिर्फ एक की मौत हुई है। उस महिला की मौत का कारण झटके की बीमारी बनी। प्रसव के दिन ही उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा सारी महिलाएं सुरक्षित अपने घर गईं। जच्चा-बच्चा अस्पताल में कोरोना संक्रमित इन महिलाओं की हिस्ट्री तैयार की गई है। कोरोना काल में हुए सभी प्रसव की रिपोर्ट शासन और आईसीएमआर को भेजी गई है।
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12 नवजात कोरोना की गिरफ्त से निकले
तीन सौ जच्चाओं के 12 नवजात को भी कोरोना का संक्र मण हो गया था। लेकिन वे भी सुरक्षित रहे। उन्हें बालरोग अस्पताल के एनआईसीयू में रखा गया। बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि इलाज से सभी नवजात संक्रमण मुक्त हो गए। उनका रिकवरी रेट शत प्रतिशत रहा।
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तीन सौ कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ लेकिन सिर्फ एक मौत हुई। इससे संबंधी रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और शासन को भेजी है। स्त्री रोग विभाग के हैलट परिसर स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल में इन कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ।
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इनमें सिर्फ एक की मौत हुई है। उस महिला की मौत का कारण झटके की बीमारी बनी। प्रसव के दिन ही उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा सारी महिलाएं सुरक्षित अपने घर गईं। जच्चा-बच्चा अस्पताल में कोरोना संक्रमित इन महिलाओं की हिस्ट्री तैयार की गई है। कोरोना काल में हुए सभी प्रसव की रिपोर्ट शासन और आईसीएमआर को भेजी गई है।
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12 नवजात कोरोना की गिरफ्त से निकले
तीन सौ जच्चाओं के 12 नवजात को भी कोरोना का संक्र मण हो गया था। लेकिन वे भी सुरक्षित रहे। उन्हें बालरोग अस्पताल के एनआईसीयू में रखा गया। बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि इलाज से सभी नवजात संक्रमण मुक्त हो गए। उनका रिकवरी रेट शत प्रतिशत रहा।
हारमोंस सुरक्षा चक्र
महिला के गर्भवती होने के बाद विभिन्न प्रकार के हारमोंस के रिसाव की गति बढ़ जाती है। इससे महिला की प्रेगनेंसी बनी रहती है। इसके साथ गर्भस्थ शिशु का विकास होता है। खासतौर पर प्रोजेक्टेरोन हारमोंस गर्भ को बचाने और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह अंडाशय से निकलता है लेकिन इसका नियंत्रण मस्तिष्क में भी होता। इसके अलावा एचसीजी हारमोन की भी भूमिका होती है। इनकी वजह से मां और शिशु दोनों को बल मिलता है। इससे सुरक्षा बनी रहती है।
करीब तीन सौ कोरोना संक्रमित महिलाओं के प्रसव हुए हैं। एक को छोड़कर बाकी सभी सुरक्षित रहीं। मौत अन्य बीमारियों से हुई। इनकी रिपोर्ट शासन को भी दी गई और आईसीएमआर को भी। कोरोना से बचाव में हारमोंस चक्र, आयु और खानपान की भी भूमिका रही है।
डॉ. किरन पांडेय, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष स्त्री रोग विभाग
कुछ तथ्य
- जच्चाओं की उम्र 20 से 35 साल के बीच रही।
- उनके खानपान का ध्यान रखा गया।
- परिजनों से उनकी मुलाकात, बात कराई गई।
-बच्चा होने की खुशी से मानसिक तनाव कम रहा
महिला के गर्भवती होने के बाद विभिन्न प्रकार के हारमोंस के रिसाव की गति बढ़ जाती है। इससे महिला की प्रेगनेंसी बनी रहती है। इसके साथ गर्भस्थ शिशु का विकास होता है। खासतौर पर प्रोजेक्टेरोन हारमोंस गर्भ को बचाने और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह अंडाशय से निकलता है लेकिन इसका नियंत्रण मस्तिष्क में भी होता। इसके अलावा एचसीजी हारमोन की भी भूमिका होती है। इनकी वजह से मां और शिशु दोनों को बल मिलता है। इससे सुरक्षा बनी रहती है।
करीब तीन सौ कोरोना संक्रमित महिलाओं के प्रसव हुए हैं। एक को छोड़कर बाकी सभी सुरक्षित रहीं। मौत अन्य बीमारियों से हुई। इनकी रिपोर्ट शासन को भी दी गई और आईसीएमआर को भी। कोरोना से बचाव में हारमोंस चक्र, आयु और खानपान की भी भूमिका रही है।
डॉ. किरन पांडेय, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष स्त्री रोग विभाग
कुछ तथ्य
- जच्चाओं की उम्र 20 से 35 साल के बीच रही।
- उनके खानपान का ध्यान रखा गया।
- परिजनों से उनकी मुलाकात, बात कराई गई।
-बच्चा होने की खुशी से मानसिक तनाव कम रहा