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Hardoi: मंदिर में 80 साल से चल रहा पुस्तकालय, बांट रहा ज्ञान, ब्रिटिश कालीन अखबार और पत्र-पत्रिकाएं यहां मौजूद

Mon, 01 May 2023 02:43 PM IST
शिखा पांडेय अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, हरदोई
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, हरदोई Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 01 May 2023 02:43 PM IST
सार

यूपी के हरदोई जिले में एक मंदिर में 80 साल से पुस्तकालय चल रहा है। बताया जा रहा है कि पुस्कालय में ब्रिटिश कालीन अखबार और पत्र-पत्रिकाएं मौजूद हैं। मंदिर के पुजारी और पुस्तकालय की देखरेख करने वाले शिवनंदन लाल पटेल ने बताया कि रोज 50 बच्चे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले पुस्तकालय में पढ़ने आते हैं।

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Hardoi: Library running for 80 years in the temple, British era newspapers and magazines are present here
मंदिर में 80 साल से चल रहा पुस्तकालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरदोई जिले में बेहंदर के कासिमपुर थाना क्षेत्र का तेरवा दहिगवा गांव में पढ़ाई की होड़ हो या नौकरी की दौड़, कामयाबी की हर कसौटी खरा उतरा है। शिक्षा के मामले में यह गांव बड़े बड़े कस्बों को पीछे छोड़ चुका है। गांव के एक मंदिर में करीब 80 साल पहले ग्राम सुधार पुस्तकालय की स्थापना हुई, तब से लगातार 50 बच्चे रोज पुस्तकालय में आकर पढ़ाई कर रहे हैं।

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अब तक हजारों की संख्या में यहां से तैयारी करने वाले बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर और समाजसेवी बनकर गांव का नाम देश और विदेश में रोशन कर रहे हैं। मंदिर के पुजारी और पुस्तकालय की देखरेख करने वाले 75 वर्षीय शिवनंदन लाल पटेल ने बताया कि रोज 50 बच्चे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले पुस्तकालय में पढ़ने आते हैं। इस पुस्तकालय की स्थापना सन 1938 में गांव के बीचों बीच स्थित शिव मन्दिर में स्थापना उनके पिता स्व. दुलारे लाल ने की थी।

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शिवनंदन का कहना है कि उस समय गांव बच्चों को पढ़ने के लिए पुस्तकें नहीं मिलती थी। तैयारी करने वाले बच्चे परेशान रहते थे। इसे देखते हुए मेरे पिता ने शिव मंदिर में पुस्तकालय की स्थापना की थी। तब से पढ़ने लिखने वाले बच्चे पुस्तकें एक माह के लिए घर भी ले जा सकते हैं। इसके लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। पुस्तकालय संचालन के सहयोगी युवा शानू सिंह ने बताया, पुस्तकालय में आजादी के पहले तक के समाचार पत्र और सैकड़ों पुस्तकेंमौजूद हैं। पुस्तकालय पर प्रतिदिन अखबार आते हैं।

पांच हजार से अधिक प्रति योगी पुस्तकें हैं उपलब्ध
ग्राम सुधार पुस्तकालय से पढ़कर आधा दर्जन से अधिक प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, इंजीनियर, डॉक्टर,शिक्षक, वैज्ञानिक बनकर युवा अपने गांव का नाम देश और विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। पुस्तकालय में पांच हजार के करीब प्रतियोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तकालय के खर्च के लिए अधिकारियों ने एक ग्रुप बना रखा है। जिससे पुस्तकालय में होने वाला खर्च का पैसा देते हैं।
 
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- 1938 में हुई थी ग्राम सुधार पुस्तकालय की स्थापना
- स्व. दुलारे लाल ने की थी पुस्तकालय की शुरूआत
- प्रतिदिन 50 बच्चे यहां आकर करते परीक्षा की तैयारी
- खर्च के लिए अधिकारियों ने बना रखा है ग्रुप
- बिना शुल्क के बच्चे घर ले सकते हैं पुस्तकें
- आजादी के पहले के समाचार व पत्र पत्रिकाएं यहां मौजूद।
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